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कोरोना महामारी की दूसरी लहर से मुकाबले और संभावित तीसरी लहर के असर को कम करने के लिए विशेषज्ञ टीकाकरण को ही सबसे प्रभावी उपाय मान रहे हैं। देश में फिलहाल 18 साल से ऊपर के लोगों के टीकाकरण की व्यवस्था की गई है, हालांकि वैक्सीन की कमी फिलहाल चिंता का विषय बनी हुई है। इस बीच देश के कुछ हिस्सों में लोगों को दोनों डोज में अलग-अलग टीके लगाने के मामले सामने आए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या टीकों का 'मिक्स-एंड मैच' सेहत पर बुरा इसर डाल सकता है? यहां जान लेना जरूरी है कि भारत में वैक्सीनेशन प्रोटोकॉल के मुताबिक पहली डोज में जो टीका दिया गया है, दूसरी में भी वही टीका लगाना आवश्यक है।
अमर उजाला फाउंडेशन की पहल के माध्यम से कोरोना महामारी को लेकर मंगलवार को हुई चर्चा में हमने विशेषज्ञों से टीकों को मिक्स-एंड मैच के असर को जानने की कोशिश की। इस दौरान अपोलो दिल्ली में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ जतिन आहूजा ने इससे संबंधित सभी सवालों के जवाब दिए।
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अमर उजाला फाउंडेशन की पहल: विशेषज्ञ से जानिए, 'मिक्स-एंड मैच' वैक्सीन का शरीर पर क्या असर हो सकता है?
Tue, 01 Jun 2021 07:23 PM IST
Abhilash Srivastava
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
Published by: Abhilash Srivastava
Updated Tue, 01 Jun 2021 07:23 PM IST
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टीको का मिक्स-एंड मैच
- फोटो : Social media
वैक्सीनेशन को लेकर प्रोटोकॉल
- फोटो : Pixabay
टीकों के मिक्स-एंड मैच का असर
इस सवाल के जवाब में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ जतिन आहूजा बताते हैं कि यह विषय फिलहाल दुनियाभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इसी को लेकर हाल ही में हुए कुछ अध्ययन बताते हैं कि दोनों डोज में अलग-अलग वैक्सीन लगवाने से एंटीबॉडी रिस्पॉस ज्यादा देखा जा रहा है। हालांकि डब्ल्यूएचओ ने दोनों डोज में सिर्फ एक ही वैक्सीन लगवाने की सलाह दी है। चूंकि भारतीय टीकों के मिक्स-एंड मैच को लेकर अभी तक ज्यादा अध्ययन सामने नहीं आए हैं इसलिए इसका शरीर पर क्या असर होगा, इस बारे में स्पष्ट कहा नहीं जा सकता है।
इस सवाल के जवाब में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ जतिन आहूजा बताते हैं कि यह विषय फिलहाल दुनियाभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इसी को लेकर हाल ही में हुए कुछ अध्ययन बताते हैं कि दोनों डोज में अलग-अलग वैक्सीन लगवाने से एंटीबॉडी रिस्पॉस ज्यादा देखा जा रहा है। हालांकि डब्ल्यूएचओ ने दोनों डोज में सिर्फ एक ही वैक्सीन लगवाने की सलाह दी है। चूंकि भारतीय टीकों के मिक्स-एंड मैच को लेकर अभी तक ज्यादा अध्ययन सामने नहीं आए हैं इसलिए इसका शरीर पर क्या असर होगा, इस बारे में स्पष्ट कहा नहीं जा सकता है।
कोवैक्सीन इनएक्टिवेटेड वायरस आधारित वैक्सीन है
- फोटो : Social media
वैक्सीन की प्रकृति जान लीजिए
डॉ जतिन आहूजा बताते हैं कि देश में मौजूद तीनों वैक्सीन- कोवैक्सीन, कोविशील्ड और स्पूतनिक, तीनों का आधार अलग है। कोविशील्ड वैक्टर आधारित, कोवैक्सीन इनएक्टिवेटेड वायरस और स्पूतनिक का भी कुछ हद तक वैक्टर आधारित प्लेटफार्म है। चूंकि अभी तक इस संबंध में कोई स्टडी नहीं है जो इन तीनों वैक्सीन के मिक्स-एंड मैच के असर को बताती हों। ऐसे में फिलहाल एक ही कंपनी की वैक्सीन लेना सही है। हां, चूंकि कोविशील्ड और स्पूतनिक कुछ हद तक वैक्टर आधारित हैं इसलिए इनका मिक्स-एंड मैच किया जा सकता है, लेकिन अभी इस बारे में अध्ययन और स्वास्थ्य संगठनों से अनुमति की आवश्यकता है।
डॉ जतिन आहूजा बताते हैं कि देश में मौजूद तीनों वैक्सीन- कोवैक्सीन, कोविशील्ड और स्पूतनिक, तीनों का आधार अलग है। कोविशील्ड वैक्टर आधारित, कोवैक्सीन इनएक्टिवेटेड वायरस और स्पूतनिक का भी कुछ हद तक वैक्टर आधारित प्लेटफार्म है। चूंकि अभी तक इस संबंध में कोई स्टडी नहीं है जो इन तीनों वैक्सीन के मिक्स-एंड मैच के असर को बताती हों। ऐसे में फिलहाल एक ही कंपनी की वैक्सीन लेना सही है। हां, चूंकि कोविशील्ड और स्पूतनिक कुछ हद तक वैक्टर आधारित हैं इसलिए इनका मिक्स-एंड मैच किया जा सकता है, लेकिन अभी इस बारे में अध्ययन और स्वास्थ्य संगठनों से अनुमति की आवश्यकता है।
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कोरोना टीका सभी के लिए जरूरी
- फोटो : पीटीआई
क्या वैक्सीन की एक डोज भी कोरोना से बचा सकती है?
इस सवाल के जवाब में डॉ जतिन आहूजा बताते हैं कि ऐसा देखा गया है कि जिन लोगों को वैक्सीन की एक भी डोज लगी है और वह कोरोना से संक्रमित हुए, वैक्सीन के कारण उनमें संक्रमण ज्यादा गंभीर रूप में नहीं जा रहा है। एक फीसदी से भी कम लोग ऐसे हो सकते हैं जिनको वैक्सीन की एक डोज के बाद भी गंभीर रूप से संक्रमण हुआ हो। अगर वह व्यक्ति पहले से ही कोमोरबिडिटी का शिकार भी है तो भी देखा गया है कि वैक्सीन की एक डोज भी उसे गंभीर संक्रमण से काफी हद तक बचा सकती है।
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नोट: यह लेख अपोलो दिल्ली में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ जतिन आहूजा से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ जतिन आहूजा अस्पताल में कोरोना संक्रमितों का इलाज करते रहे हैं।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
इस सवाल के जवाब में डॉ जतिन आहूजा बताते हैं कि ऐसा देखा गया है कि जिन लोगों को वैक्सीन की एक भी डोज लगी है और वह कोरोना से संक्रमित हुए, वैक्सीन के कारण उनमें संक्रमण ज्यादा गंभीर रूप में नहीं जा रहा है। एक फीसदी से भी कम लोग ऐसे हो सकते हैं जिनको वैक्सीन की एक डोज के बाद भी गंभीर रूप से संक्रमण हुआ हो। अगर वह व्यक्ति पहले से ही कोमोरबिडिटी का शिकार भी है तो भी देखा गया है कि वैक्सीन की एक डोज भी उसे गंभीर संक्रमण से काफी हद तक बचा सकती है।
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नोट: यह लेख अपोलो दिल्ली में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ जतिन आहूजा से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ जतिन आहूजा अस्पताल में कोरोना संक्रमितों का इलाज करते रहे हैं।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।