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Type 2 Diabetes: अब डायबिटीज को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं, इलाज ढूंढ रहे वैज्ञानिकों को मिली बड़ी कामयाबी

Sat, 08 Mar 2025 07:41 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 08 Mar 2025 07:41 PM IST
सार

भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसे दुर्लभ जीन वेरिएंट की पहचान की है जो भारतीयों में टाइप-2 डायबिटीज के प्रसार का एक प्रमुख कारण हो सकता है। यह खोज इस जटिल आनुवंशिक बीमारी के उपचार के नए रास्ते खोल सकती है। 
 

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type 2 diabetes risk factors and treatment diabetes kaise theek ho sakti hai
डायबिटीज की समस्या - फोटो : Adobe stock photos

टाइप-2 डायबिटीज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जो दुनियाभर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है। ये डायबिटीज का सबसे सामान्य रूप है, जिसमें शरीर या तो पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता है या इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता है। इस वजह से ब्लड शुगर का स्तर अक्सर बढ़ हुआ रहता है। हाल के वर्षों में मेडिकल क्षेत्र में नवाचार और प्रभावी दवाओं के चलते डायबिटीज का इलाज आसान हुआ है। हालांकि हर साल इसके बढ़ते मामले अब भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। 



स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डायबिटीज लाइफस्टाइल से संबंधित बीमारी तो ही है, इसका जोखिम आनुवांशिक भी होता है। यानी कि जिन लोगों के माता-पिता में से किसी को ये बीमारी रही है उन्हें भी डायबिटीज की दिक्कत हो सकती है।

इसी संबंध में भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसे दुर्लभ जीन वेरिएंट की पहचान की है जो भारतीयों में टाइप-2 डायबिटीज के प्रसार का एक प्रमुख कारण हो सकता है। यह खोज इस जटिल आनुवंशिक बीमारी के उपचार के नए रास्ते खोल सकती है। 

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टाइप-2 डायबिटीज का बढ़ता खतरा - फोटो : Freepik.com

डायबिटीज के आनुवंशिक कारकों पर अध्ययन

नेचर मेडिसिन में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि हम कई भारतीय पीढ़ियों का अध्ययन करना चाहते थे, ताकि परिवारों में आनुवंशिक कारकों की भूमिका को बेहतर ढंग से समझा जा सके। भारतीयों में टाइप-2 डायबिटीज होने की आशंका यूरोपीय लोगों की तुलना में छह गुना अधिक  है।

अध्ययन से पता चला कि भारतीय समुदायों में एक ही जाति व्यवस्था में विवाह और जीवनशैली के कारण इन दुर्लभ जीन वेरिएंट्स को पहचानने में सहायता मिली। प्रतिभागियों में मिले दुर्लभ जीन परिवर्तन अन्य वैश्विक आबादी में नहीं देखे गए हैं। इससे मधुमेह के कारणों को बेहतर समझने और नई दवाओं के विकास में मदद मिल सकती है।

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डायबिटीज के लिए इलाज की खोज - फोटो : Freepik.com

अध्ययन में क्या पता चला

शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ दुर्लभ जीन वेरिएंट ऐसे थे जो प्रोटीन बनाने के बजाय यह नियंत्रित करते हैं कि कौन सा प्रोटीन कब और कहां बनेगा। यह खोज महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह डायबिटीज से जुड़ी जटिल आनुवंशिक प्रक्रियाओं को समझने में मदद करती है। वैज्ञानिकों ने लाखों लोगों का अध्ययन करके इन जीनों को पाया है। इन परिवारों में मधुमेह की कई पीढ़ियां हैं।

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डायबिटीज का उपचार कैसे करें - फोटो : Adobe stock

जीन और मधुमेह का संबंध

टाइप-2 डायबिटीज के लगभग 50 फीसदी मामले आनुवंशिक कारणों से होते हैं, जबकि बाकी 50 फीसदी खराब आहार और शारीरिक निष्क्रियता जैसी जीवनशैली की वजह से होते हैं। जीन मधुमेह को तीन प्रमुख तरीकों से प्रभावित कर सकते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, हर मरीज पर मधुमेह की सामान्य दवाएं जैसे मेटफॉर्मिन समान रूप से प्रभावी नहीं होतीं। इसलिए आनुवंशिकी के आधार पर उपचार ढूंढना जरूरी है। 

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डायबिटीज को कंट्रोल करने के तरीके जानिए - फोटो : Freepik.com

डायबिटीज से बचाव के लिए क्या करें?

डायबिटीज को मुख्यरूप से जीवनशैली से जुड़ी बीमारी माना जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि देश में 50% लोगों को अपने ब्लड शुगर लेवल की जानकारी नहीं होती है। डब्लूएचओ के अनुसार देश में 7.7 करोड़ लोग डायबिटीज से ग्रसित हैं। ऐसे में चाहे आपको डायबिटीज है या नहीं, जीवनशैली से जुड़ी ये बातें पता होनी चाहिए। 

अगर कोई व्यक्ति मोटापे से ग्रसित है, तो 7-10% वजन कम करके, सही डाइट अपनाकर और हफ्ते में 150 मिनट की शारीरिक गतिविधि (जैसे तेज चलना, साइक्लिंग, योग आदि) करने से डायबिटीज को बढ़ने से रोक सकता है। नियमित रूप से HbA1c और ग्लूकोज लेवल की जांच करना भी जरूरी है ताकि डायबिटीज पर नजर रखी जा सके।


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स्रोत और संदर्भ
The promising potential of gene therapy for diabetes mellitus


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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