भारतीय जीवनशैली में सदियों से आयुर्वेद एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। कई सारी औषधियों और जड़ी-बूटियों को बेहतर सेहत के लिए प्रयोग में लाया जाता रहा है। आयुर्वेद में तुलसी ऐसी ही एक दिव्य औषधि है जो कई तरह की गंभीर बीमारियों के खतरे को कम करने में मददगार मानी जाती है। तुलसी की पत्तियां, आसानी से उपलब्ध होती हैं और सेहत के लिए इन्हें विशेष लाभदायक माना जाता है। अब तक हुए कई अध्ययनों में तुलसी को लिवर, त्वचा, किडनी जैसे अंगों को विभिन्न संक्रमणों और रोगों से बचाने में प्रभावी पाया गया है।
आयुर्वेद की सलाह: इम्युनिटी बढ़ाने से लेकर शुगर-कोलेस्ट्रॉल को कम करने तक, इस 'दिव्य औषधि' के हैं तमाम फायदे
प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए फायदेमंद
तुलसी की पत्तियों में एंटीऑक्सिडेंट उच्च मात्रा में पाई जाती है जो शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करती है। अध्ययनों से पता चलता है कि तुलसी आपके शरीर को जहरीले रसायनों से बचाने के साथ प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में सहायक हो सकती है। इसमें मौजूद गुण कैंसर कोशिकाओं के विकास को कम करके कैंसर को भी रोक सकते हैं। इसके अलावा तुलसी में जीवाणुरोधी, एंटीवायरल, ऐंटिफंगल, एंटी-इंफ्लामेटरी और एनाल्जेसिक (दर्द निवारक) गुण भी पाए जाते हैं।
डायबिटीज में सहायक
अगर आप प्रीडायबिटीज या टाइप-2 डायबिटीज से परेशान हैं तो तुलसी के पौधे के सभी हिस्से आपके ब्लड शुगर को कम करने में मदद कर सकते हैं। पशुओं और मानव अध्ययनों से पता चलता है कि तुलसी मधुमेह के लक्षणों को रोकने में मदद कर सकती है। चूहों पर किए गए अध्ययन में देखने को मिला कि तुलसी का अर्क 30 दिनों में ब्लड शगर के स्तर को 26 फीसदी तक कम कर सकता है।
कोलेस्ट्रॉल को करती है नियंत्रित
अध्ययनों में पाया गया कि चूंकि तुलसी, मेटाबॉलिक स्ट्रेस को लक्षित करती है, ऐसे में यह वजन घटाने और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में भी मदद कर सकती है। तुलसी के ताजे पत्तों का सेवन करने वालों के वसा अणुओं में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखा गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि यह बैड कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल-कोलेस्ट्रॉल) को कम करने और गुड कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल-कोलेस्ट्रॉल) के स्तर को बढ़ाने में सहायक हो सकती है।
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