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ये थीं भारत की पहली महिला डॉक्टर, जानिए इनके जीवन से जुड़ी रोचक बातें
amarujala.com- Presented by: मंजू ममगाईं
Updated Wed, 22 Nov 2017 12:40 PM IST
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आज के युग में अगर महिलाएं अपने अधिकारों का इस्तेमाल सही ढंग से कर पा रही हैं तो ये डा. रुखमाबाई राउत की देन हैं। डा. रुखमाबाई राउत भारत की पहली स्त्री थी जिन्होंने अपनी चिकित्सा से कई लोगों को दूसरा जीवन दिया है।
आइए जानते हैं रख्माबाई के जीवन से जुड़ी ऐसी ही कुछ रोचक बातों के बारे में।
पढ़ें-इस तरह लैपटॉप का करते हैं इस्तेमाल तो घट सकती है प्रजनन क्षमता
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आइए जानते हैं रख्माबाई के जीवन से जुड़ी ऐसी ही कुछ रोचक बातों के बारे में।
पढ़ें-इस तरह लैपटॉप का करते हैं इस्तेमाल तो घट सकती है प्रजनन क्षमता
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रख्माबाई की शादी 11 साल में हो गई थी। जिसे मानने से उन्होंने इंकार कर दिया था। जिसके बाद मार्च 1884 में उनके पति दादाजी ने उनके उपर पति के वैवाहिक अधिकारों को पुनर्स्थापित करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की, कि रुखमाबाई आकर उसके साथ रहें। रूखमाबाई अपने विवाह के बाद अपने माता-पिता के घर में रह कर अपनी पढ़ाई पूरी की थी।
अदालत ने रूखमाबाई को अधिकारों का पालन करने या फिर जेल जाने के लिए कहा। जिसके बाद रुखमाबाई ने अदालत को तर्क दिया कि जिस समय उनकी शादी हुई थी उस समय वो अपनी शादी के लिए अपनी सहमति नहीं दे पाई थीं इसलिए वो इस शादी को नहीं मानती । इस तर्क को किसी भी अदालत में इससे पहले कभी नहीं सुना गया था।
मुबंई में साल 1864 में जन्मी रख्माबाई अपने माता पिता जनारधन पांडुरंग और जयंती बाई की इकलौती औलाद थीं। आठ साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया था। जिसके बाद उनकी मां ने डॉक्टर सखाराम अर्जुन से शादी कर ली थी। बाद में 11 साल की उम्र में रूखमाबाई का विवाह दादा जी बिकाजी से करवा दिया गया था।
अदालत ने रूखमाबाई को अधिकारों का पालन करने या फिर जेल जाने के लिए कहा। जिसके बाद रुखमाबाई ने अदालत को तर्क दिया कि जिस समय उनकी शादी हुई थी उस समय वो अपनी शादी के लिए अपनी सहमति नहीं दे पाई थीं इसलिए वो इस शादी को नहीं मानती । इस तर्क को किसी भी अदालत में इससे पहले कभी नहीं सुना गया था।
मुबंई में साल 1864 में जन्मी रख्माबाई अपने माता पिता जनारधन पांडुरंग और जयंती बाई की इकलौती औलाद थीं। आठ साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया था। जिसके बाद उनकी मां ने डॉक्टर सखाराम अर्जुन से शादी कर ली थी। बाद में 11 साल की उम्र में रूखमाबाई का विवाह दादा जी बिकाजी से करवा दिया गया था।
रूखमाबाई के पिता ने उनका केस लड़ने में उनकी मदद की । जिसके बाद दादाजी ने शादी को भंग करने के लिए एक मुद्रा के रूप में मौद्रिक मुआवजा स्वीकार करके समझौता कर लिया। जिसकी वजह से रूखमाबाई को जेल जाने से बचा लिया गया।जिसके बाद रूखमाबाई ने मेडिकल जगत में अपना 35 साल का सफल योगदान दिया।
इतना ही नहीं रूखमाबाई ने बाल विवाह के खिलाफ भी बहुत कुछ लिखते हुए समाज सुधार का काम भी किया। रुखमाबाई एक सक्रिय सामाज सुधारक थीं। उनकी मौत 25 सितंबर, 1991 में 91 वर्ष की आयु में हुई। आज गूगल ने इसी महान स्त्री को सम्मान देते हुए उसका चित्र डूडल पर शेयर किया है।
इतना ही नहीं रूखमाबाई ने बाल विवाह के खिलाफ भी बहुत कुछ लिखते हुए समाज सुधार का काम भी किया। रुखमाबाई एक सक्रिय सामाज सुधारक थीं। उनकी मौत 25 सितंबर, 1991 में 91 वर्ष की आयु में हुई। आज गूगल ने इसी महान स्त्री को सम्मान देते हुए उसका चित्र डूडल पर शेयर किया है।