वैश्विक स्तर पर पिछले दो साल से अधिक समय से जारी कोरोना संक्रमण के चलते लोगों को कई तरह की सामाजिक और सेहत से संबंधित परेशानियां झेलनी पड़ी हैं। महामारी की शुरुआत में जहां वायरस को सांस की बीमारी से जोड़कर देखा जा रहा था, वहीं समय के साथ सामने आए कोरोना के तमाम वैरिएंट्स ने जिस तरह से शरीर के कई अंगों पर प्रभाव डाला है, उसने विशेषज्ञों की चिंता जरूर बढ़ा दी है। कोरोना संक्रमण के कारण लोगों को मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। अध्ययनों में इसके दीर्घकालिक गंभीर प्रभावों के बारे में भी पता चलता है। वहीं हाल ही में हुए एक शोध में वैज्ञानिकों ने कोरोना संक्रमण के कारण बढ़ती एक और गंभीर समस्या को लेकर लोगों को आगाह किया है।
अध्ययन में दावा: संक्रमण के कारण कम उम्र में ही हो सकती हैं बुढ़ापे वाली समस्याएं, रोग से ठीक होने का रफ्तार भी काफी धीमा
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कम उम्र में ही बुढ़ापे जैसी समस्याएं
क्लिनिकल मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि सार्स-सीओवी-2 वायरस के कारण उम्र बढ़ने की प्रक्रिया काफी तेज हो गई है। इसके अलावा वायरस ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इसका असर लोगों को आईक्यू लेवल पर भी देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि तमाम हालिया अध्ययन इस बात की तरफ संकेत करते हैं कि कोरोना वायरस को सीमित रूप से वर्णित नहीं किया जा सकता है। यह संक्रमण, के अलावा इंसानों को कई तरह से प्रभावित कर रहा है।
अध्ययन में क्या पता चला?
यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज और इंपीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा किए गए अध्ययन में 46 प्रतिभागियों को शामिल किया गया। कई स्तर पर किए गए इस शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि प्रतिभागियों में संज्ञानात्मक हानि और कई उस तरह की मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं भी देखी गईं जो आमतौर पर 50 से 70 वर्ष की आयु वाले लोगों में देखा जाता रहा है। शोधकर्ताओं ने पाया कि संक्रमितों में यह वायरस आईक्यू लेवल में गिरावट का भी कारण बन रहा है। ज्यादातर प्रतिभागियों में अपने उम्र की तुलना में 10 आईक्यू प्वाइंट्स की कमी देखी गई।
क्या कहते हैं शोधकर्ता
अध्ययन के बारे में प्रमुख शोधकर्ता और इंपीरियल कॉलेज लंदन के प्रोफेसर एडम हैम्पशायर कहते हैं, इस अध्ययन से स्पष्ट होता है कि संक्रमण के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के अलावा कोरोना वायरस लोगों के कॉगनेटिव समस्याओं का भी कारण बन रहा है। यह समस्या उन प्रतिभागियों में भी देखी जा रही है जिनको संक्रमण के दौरान अस्पताल में भर्ती होने की भी आवश्यकता नहीं पड़ी थी। इस खतरे को ध्यान में रखते हुए हमें तत्काल इस बारे में प्रयास करने की आवश्यकता है जिससे ऐसे लोगों की मदद की जा सके।
न्यूरोलॉजिकल रोगों के संकेत
अध्ययन के एक अन्य लेखक प्रोफेसर डेविड मेनन कहते हैं, इसके पहले के शोध में भी इस बात के संकेत मिले थे कि कोरोना वायरस मानसिक स्वास्थ से संबंधित और कई तरह की न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य की समस्याओं को बढ़ा रहा है। मस्तिष्क संबंधी इन विकारों की एक विस्तृत श्रृंखला हो सकती है। अगर समय रहते इन पर ध्यान न दिया जाए तो कम उम्र में ही लोगों में अल्जाइमर जैसे न्यूरोलॉजिकल रोगों के मामले देखने को मिल सकते हैं, जो आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ होते रहे हैं।