विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार दुनियाभर में अवसाद के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं जोकि गंभीर चिंता का विषय है। कोरोना की विपरीत परिस्थियों के चलते इस गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। दूसरी लहर में संक्रमण के कारण फेफड़ों और हृदय संबंधी रोगों में बढ़ोतरी के साथ कई लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर देखा जा रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर में मौत के काफी ज्यादा मामले देखे गए। अपने आसपास लोगों को मरते देख और चारो तरफ फैली नकारात्मकता का असर स्पष्टतौर पर लोगों में तनाव, अवसाद और चिड़चिड़ेपन के रूप में देखा जा रहा है।
सलाह: कोरोना ने बढ़ा दी है अवसाद की समस्या? अध्ययन आधारित इन खाद्य पदार्थों से मिलेगा शीघ्र लाभ
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चिकन
डिप्रेशन को दूर करने में मांसाहार, विशेषरूप से चिकन का सेवन लाभदायक माना जाता है। पबमेड सेंट्रल में "डाइटरी सेलेनियम एंड मेजर डिप्रेशन" नाम से प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, शरीर में सेलेनियम की कमी अवसाद के जोखिमों को बढ़ा देती है। चिकन और अन्य प्रकार के लीन मीट के माध्यम से इसकी आसानी से पूर्ति की जा सकती है। जिन लोगों को डिप्रेशन की शिकायत है उन्हें चिकन का सेवन जरूर करना चाहिए।
जामुन
जामुन को एंटीऑक्सिडेंट का एक समृद्ध स्रोत माना जाता है। एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन डिप्रेशन कारकों को कम करने में मददगार है। जर्नल ऑफ न्यूट्रिशनल एंड एनवायरनमेंटल मेडिसिन में "चिंता और अवसाद के लक्षणों पर एंटीऑक्सीडेंट का प्रभाव'' नाम से प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक एंटी-ऑक्सीडेंट मूड को ठीक करने के साथ तनाव और अवसाद के लक्षणों के नियंत्रित करने में काफी मददगार हो सकते हैं।
दूध
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जिन लोगों में विटामिन डी की कमी या अपर्याप्तता होती है उनमें अवसाद होने का खतरा अधिक होता है। ऐसे लोगों के लिए रोजाना दूध पीना फायदेमंद हो सकता है। पबमेड सेंट्रल में प्रकाशित अध्ययन में दूध को अवसाद रोगियों के लिए काफी फायदेमंद बताया गया है। अध्ययन में बताया गया है कि दूध एक सुपरफूड और विटामिन डी का अच्छा स्रोत है। अवसाद के शिकार लोगों को इसे आहार में जरूर शामिल करना चाहिए।
सी फूड
सी फूड को ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत माना जाता है, यह पोषक तत्व अवसाद के शिकार लोगों के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकता है। इसी से संबंधित नेचर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार ओमेगा-3 पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड अवसाद के उपचार और इसके लक्षणों को नियंत्रित करने में काफी सहायक माना जाता है। अवसाद के शिकार लोगों को आहार के माध्यम से ओमेगा-3 फैटी एसिड प्राप्त करने के उपायों पर जोर देना चाहिए।
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नोट: यह लेख अवसाद को कम करने के उपायों पर हुए तमाम अध्ययनों के आधार पर तैयार किया गया है। अध्ययन संलग्न हैं।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।