सर्दी, जुकाम और गले में जलन एक आम बीमारी है। दुनिया में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो, जिसे ये समस्या न आई हो। पूरी दुनिया में इसके ऊपर अनेक खोजबीन की गई, लेकिन अभी तक इसका कोई इलाज या कारण सामने नहीं आया है। साथ ही सर्दी को लेकर जो भी इलाज किए जाते हैं, उससे कफ पूरी तरह से बाहर नहीं निकल पाता और फिर यही आगे चल कर अनेक बीमारियों का कारण बनता है।
ठंड नहीं, इस वजह से होती है जुकाम, गर्मी के मौसम में भी हो सकती है परेशानी
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सर्दी, जुकाम का इलाज न ढूंढ पाने की एक वजह यह भी है कि आज तक कोई ये नहीं बता सका कि आखिर सर्दी, जुकाम की वजह से गले में जलन क्यों होती है और जो कफ शरीर से नाक के रास्ते निकलता है वह क्यों, कैसे और कहां बनता है।
सांस के जरिए शरीर में गए बैक्टीरिया और प्रदूषण कफ बनकर मौसम में हुए बदलाव के कारण नाक बहने और बलगम आने का कारण बनते हैं, जिसे सर्दी कहा जाता है।
एलोपैथी चिक्तिसा पद्धत्ति के मुताबिक, नाक के पीछे जो कोशिकाएं होती है, उनमे जब संक्रमण हो जाता है, तो कुछ कोशिकाएं मर जाती है, जो कफ के रूप में परिवर्तित हो कर नाक से बाहर के ओर बहने लग जाती हैं।
कफ होता है असली वजह
चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, सर्दी, जुकाम के दौरान शरीर से जो कफ निकलता है, उसे समझने से पहले हमें शरीर की कार्य रचना और पाचन क्रिया के बारे में बारे में समझना होगा। शरीर हमारे द्वारा किए गए भोजन से शुगर और अन्य एसिड बनाता है, जो लिवर में जाकर जमा हो जाते हैं। फिर लिवर शरीर में उसको ईंधन के रूप में खून के रास्ते पहुंचाता है, जहां यह शुगर मांसपेशियों को चलाने वाले ईंधन की तरह इस्तेमाल होती है।
हम जब भी कोई काम करते हैं, तो वो ईंधन जलता है और उसे जलने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, जो सांस द्वारा फेफड़ों तक खून के माध्यम से पहुंचती है। चूंकि पर्यावरण इतना अधिक प्रदूषित है कि सांस लेने के दौरान ऑक्सीजन के साथ धूल, धुंआ और बैक्टीरिया शरीर के अंदर चले जाते हैं। ईंधन जलने के दौरान दो प्रकार का कचरा बनता है, कार्बन डाइऑक्साइड तो दूसरा धूल, प्रदूषण और बैक्टीरिया का कचरा।
कार्बन डाइऑक्साइड और छोटे बैक्टीरिया तो सांस के साथ बाहर निकल जाते हैं। मगर धूल, प्रदूषण और बड़े बैक्टीरिया से बना कचरा खून और गुर्दों के जरिए पेशाब और मल के रास्ते बाहर निकलता है और कुछ फेफड़ों से चिपक जाता है। ये कचरा तब तक पूरी तरह नहीं निकलता है, जब तक हमारे शरीर में पानी की कमी पूरी न हो जाए।
इसका फेफड़ों से चिपका हुआ हिस्सा सर्दी होने की वजह बनता है। ये पेशाब और मल के रास्ते भी बाहर निकल जाता है। शरीर में पानी या खून की कमी होने पर यह नहीं निकल पाता है और वहां सड़ कर कफ बन जाती है और शरीर के अंदर जमा होना शुरू कर देता है।
क्यों होती है गले में जलन
शरीर में जरूरत से अधिक कफ पर गले में दर्द या जलन पैदा होती है। इस कारण से कभी-कभी बुखार भी आ जाता है और हम खाना खाना कम या बंद कर देते हैं। जैसे ही हम खाना खाना बंद या कम करते हैं, तो हमारे मस्तिष्क पर मौसम का दबाव बढ़ जाता है और नाक बहने लगती है। साथ ही कफ भी नाक के रास्ते बाहर निकलना शुरू हो जाता है।
इसे बलगम भी कहते हैं। यदि इस दौरान हम शरीर के काम में रुकावट डाल देते हैं, तो वो प्रक्रिया वहीं रुक जाती है और जब तक वो कफ बाहर नहीं निकलता है, तब तक सर्दी, ज़ुकाम या गले में जलन बनी रहती है।