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Cyberbullying: साइबरबुलिंग का मानसिक स्वास्थ्य पर होता है असर, UNICEF की सलाह- जानकारी और सुरक्षा दोनों जरूरी

Mon, 06 Feb 2023 04:24 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 06 Feb 2023 04:24 PM IST
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साइबरबुलिंग क्या है, इस बारे में जानिए - फोटो : amarujala

सोशल मीडिया ने हमें एक दूसरे से जुड़ने और अपने विचारों की अभिव्यक्ति में विशेष मदद की है। अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने के लिए भी पिछले कुछ वर्षों में यह एक बड़ा और खुला प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है, हालांकि जहां कुछ अच्छाइयां हैं वहां इससे जुड़े कुछ नकारात्मक पहलुओं पर भी गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।



सुरक्षित और बेहतर इंटरनेट प्रदान करने के उद्देश्य से हर साल फरवरी में दूसरे सप्ताह के दूसरे दिन को सुरक्षित इंटरनेट दिवस के रूप में मनाया जाता है, इस बार यह 7 फरवरी को मनाया जा रहा है। सेफ इंटरनेट डे का उद्देश्य लोगों के लिए सुरक्षित इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराना है।

चूंकि बात सुरक्षित इंटरनेट की हो रही है, ऐसे में साइबरबुलिंग एक गंभीर विषय है, जिसके बारे में चर्चा करना आवश्यक है। साइबरबुलिंग असल में डिजिटल तकनीकों के उपयोग से लोगों को डराने-धमकाने को संदर्भित करता है। क्या आप जानते हैं कि इसका लोगों की मनोदशा और मानसिक स्थिति पर बुरा असर हो सकता है?

यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल चिल्ड्रन इमरजेंसी फंड (यूनीसेफ) बच्चों-युवाओं की मानसिक सेहत पर असुरक्षित इंटरनेट और ऑनलाइन बुलिंग जैसी समस्याओं के हो रहे दुष्प्रभावों को लेकर अलर्ट करता है। यूनिसेफ इंडिया और अमर उजाला फाउंडेशन की भागीदारी के तहत इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि साइबरबुलिंग क्या है?

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साइबर बुलिंग क्या होता है? - फोटो : istock

साइबरबुलिंग क्या है? इस बारे में जानिए

फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसे कई सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर आपने भी कभी न कभी लोगों को ट्रोल होते देखा होगा। इसे साइबरबुलिंग का एक अंग माना जाता है। साइबरबुलिंग का उद्देश्य  सुनियोजित तरीके से लोगों को डराना, गुस्सा दिलाना या उन्हें शर्मसार करना है। यह कई तरीकों का हो सकता है जैसे सोशल मीडिया पर किसी के बारे में झूठ फैलाना या शर्मनाक फोटो या वीडियो पोस्ट करना। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से हानिकारक, अपमानजनक या धमकी भरे संदेश, चित्र या वीडियो भेजना या फिर किसी की फेक प्रोफाइल बनाकर उसकी छवि को खराब करने की कोशिश आदि, ये सभी साइबरबुलिंग का हिस्सा हैं।

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साइबर बुलिंग के बारे में गंभीरता से दें ध्यान - फोटो : Pixabay

मजाक और बुली करने में फर्क समझिए

अक्सर हम सभी दोस्त एक-दूसरे के साथ मजाक करते हैं, पर इसका एक सीमित दायरा होता है। इस दायरा को लांघना और किसी व्यक्ति को परेशान करने या नीचा दिखाने के उद्देश्य से किया जाने वाला मजाक बुली करने की श्रेणी में आता है। खासकर ऑनलाइन माध्यमों में इसपर गंभीरता से ध्यान दिया जाना आवश्यक हो जाता है। ऑनलाइन बुली के परिणामस्वरूप अजनबियों का भी इस तरह की हरकतों पर ध्यान जाता है। मजाक और बुली के बीच के इस अंतर को समझना सभी के लिए जरूरी है।

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साइबर बुलिंग के दुष्परिणाम - फोटो : istock

साइबरबुलिंग के दुष्प्रभाव

साइबरबुलिंग भले ही देखने-सुनने में काफी सामान्य लगती हो पर असल में इसका व्यक्ति पर गंभीर असर हो सकता है। कई मामलों में यह व्यक्ति के लिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्याओं को बढ़ाने वाली स्थिति भी हो सकती है। बुलिंग का शिकार व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान, शर्मिंदा, भयभीत या क्रोधित महसूस कर सकता है। इसका असर शारीरिक स्वास्थ्य पर भी होता है जिसके कारण थका हुआ (नींद न आने) पेट में दर्द और सिरदर्द जैसे लक्षणों का अनुभव हो सकता है। 

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तनाव-चिंता की समस्या - फोटो : istock

मानसिक स्वास्थ्य पर असर

साइबरबुलिंग का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य पर देखा जाता रहा है। इसके कारण लोगों में शर्म, घबराहट, चिंता और असुरक्षित महसूस करने  वाली भावनाएं बढ़ जाती हैं। व्यक्ति इस बात को सोच-सोचकर परेशान रहता है कि लोग उसके बारे में क्या सोच रहे होंगे। इस तरह की भावनाएं नकारात्मक विचारों को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। इसमें चिंता-तनाव और डिप्रेशन जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा काफी बढ़ जाता है।

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