कैंसर दुनिया की सबसे घातक और गंभीर बीमारियों में से एक है, जिसके कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। पुरुषों में फेफड़े-पेट और मुंह के कैंसर के सबसे ज्यादा मामले रिपोर्ट किए जाते हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग प्रोस्टेट कैंसर का भी शिकार हो रहे हैं।
पुरुषों में कैंसर: चुपचाप बढ़ता है ये जानलेवा कैंसर, हर घंटे हो रही एक मौत; पूर्व पीएम ऋषि सुनक की बड़ी पहल
ब्रिटेन में ऋषि सुनक समेत कई प्रमुख लोगों ने ज्यादा जोखिम वाले पुरुषों के लिए राष्ट्रीय प्रोस्टेट कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम की मांग की है। ब्लैक पुरुषों और प्रोस्टेट कैंसर की हिस्ट्री वाले पुरुषों में खतरा अधिक हो सकता है। अभियानकर्ता शुरुआती पहचान पर जोर दे रहे हैं ताकि जल्दी से इसका पता किया जा सके।
ऋषि सुनक समेत कई हस्तियों ने सरकार को लिखा पत्र
अमर उजाला में हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रोस्टेट कैंसर की जानकारी दी थी। वे लंबे समय से इसका शिकार हैं। बाइडन के बेटे हंटर बाइडन ने एक हालिया इंटरव्यू में बताया कि उनके पिता का कैंसर हड्डियों तक फैलने के बाद अब उससे भी आगे बढ़ गया है। बीमारी की वजह से बाइडन को काफी दर्द और शारीरिक कमजोरी का सामना करना पड़ रहा है।
मेडिकल विशेषज्ञ कहते हैं, अगर समय रहते प्रोस्टेट कैंसर का पता चल जाए तो इससे हर साल लाखों मौतों को रोका जा सकता है। इसी को लेकर ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक समेत कई चर्चित हस्तियों ने सरकार का ध्यान खींचा है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर ज्यादा जोखिम वाले पुरुषों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर टारगेटेड प्रोस्टेट कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम शुरू करने की मांग की है।
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मसलन अगर किसी के पिता या भाई को पहले प्रोस्टेट कैंसर हो चुका है, तो परिवार के दूसरे पुरुष सदस्यों का जोखिम भी बढ़ जाता है। ऐसे जोखिम वालों की समय पर स्क्रीनिंग करने से बड़ी मदद मिल सकती है। इस मांग को राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है। 250 से ज्यादा सांसद इसके पक्ष में बताए जा रहे हैं और एक लाख से अधिक लोग याचिका पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।
किन पुरुषों के लिए समय पर स्क्रीनिंग बहुत जरूरी?
प्रोस्टेट कैंसर का खतरा भारतीय पुरुषों में भी गंभीर रहा है, ऐसे में सवाल है कि किन लोगों में इसका जोखिम अधिक होता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हर पुरुष में प्रोस्टेट कैंसर होने का खतरा एक जैसा नहीं होता। जिनमें इस कैंसर की फैमिली हिस्ट्री रही है या फिर जिन्हें प्रोस्टेट की कोई अन्य दिक्कत हो उनके लिए स्क्रीनिंग बहुत जरूरी है।
- मेडिकल रिपोर्ट्स में 50 साल से अधिक उम्र के पुरुषों को अपने डॉक्टर की सलाह पर स्क्रीनिंग जरूर करा लेनी चाहिए।
- जिन लोगों में पहले से BRCA1 या BRCA2 जैसा जेनेटिक म्यूटेशन है, उन्हें 40 से 45 साल की उम्र के बीच डॉक्टर से मिलकर जांच करानी चाहिए।
प्रोस्टेट कैंसर शुरुआती चरण में कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी विकसित हो सकता है। यही वजह है कि कुछ पुरुषों में बीमारी का पता देर से चलता है। आमतौर पर इस कैंसर के कारण पेशाब करने में परेशानी, पेशाब की धार कमजोर होने, बार-बार पेशाब लगने, पेशाब या वीर्य में खून आने और पीठ या कमर के निचले हिस्से में अक्सर दर्द की दिक्कत देखी जाती रही है।
प्रोस्टेट कैंसर हो सकता है गंभीर
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि प्रोस्टेट कैंसर शरीर के आसपास के हिस्सों में भी फैल सकता है जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार, प्रोस्टेट कैंसर के शरीर में फैलने पर हड्डियां जैसे रीढ़ की हड्डी और कूल्हे प्रभावित हो सकते हैं। हड्डियों में कैंसर फैलने से लगातार या तेज दर्द हो सकता है। इससे हड्डियां कमजोर होकर फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ा सकता है।
अगर कैंसर रीढ़ की हड्डी के आसपास फैलकर स्पाइनल कॉर्ड यानी रीढ़ की नसों के मुख्य हिस्से पर दबाव डालता है, तो पैरों में कमजोरी या सुन्नपन और पेशाब या मल पर नियंत्रण खोने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
क्या इससे बचाव किया जा सकता है?
अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया था कि खान-पान की कुछ चीजों को अध्ययनों में प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को कम करने वाला पाया गया था। एपिडेमियोलॉजिकल और क्लिनिकल अध्ययनों से पता चलता है कि लाइकोपीन फ्री रेडिकल्स को बेअसर करने, डीएनए को होने वाले नुकसान को कम करने के साथ कैंसर सेल्स के फैलने की रफ्तार को धीमा करने में मदद करता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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