ज्यादा मीठी चीजें खाने की आदत आपकी सेहत के लिए कई प्रकार से हानिकारक हो सकती है। इससे सबसे ज्यादा खतरा ब्लड शुगर का लेवल बढ़ने को लेकर होता है, अगर समय रहते इसपर कंट्रोल न किया जाए तो इससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा अधिक हो सकता है। अधिक मीठी चीजें डायबिटीज के साथ मोटापा, हृदय रोग और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को भी बढ़ाने वाली हो सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को आहार में मीठी चीजों की मात्रा को कम रखना चाहिए।
Sweet Craving: क्यों होती है मीठा खाने की तेज तलब, यह गंभीर समस्या तो नहीं? जानिए अध्ययनों में क्या पता चला
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क्यों होती है शुगर की क्रेविंग?
शोधकर्ता कहते हैं, शुगर क्रेविंग आपके मस्तिष्क की स्थितियों से संबंधित हो सकती है। आपके टेम्पोरल लोब में हिप्पोकैम्पस, यादों को संजोने के लिए जिम्मेदार है। हिप्पोकैम्पस ही है जो आपको डार्क चॉकलेट और मिल्क चॉकलेट का स्वाद याद रखने में मदद करती है। इसकी सक्रियता की स्थिति भी फूड क्रेविंग या कुछ चीजों के खाने की इच्छा हो सकती है।
अधिक चीनी खाने की आवश्यकता महसूस होती रहती है तो इसपर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।
सेरोटोनिन थ्योरी को लेकर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
फूड क्रेविंग को लेकर एक थ्योरी सेरोटोनिन से भी संबंधित है। सेरोटोनिन, मूड को ठीक रखने के लिए आवश्यक न्यूरोट्रांसमीटर है। शोधकर्ताओं का मानना है कि मस्तिष्क में सेरोटोनिन का असंतुलन अवसाद के जोखिमों को बढ़ाने वाला हो सकता है। जब आप कार्ब्स या मीठी चीजों को खाने की तीव्र इच्छा रखते हैं तो यह स्थिति सेरोटोनिन उत्पादन को बढ़ाने वाली हो सकती है।
क्या हो सकता है इसका असर?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शुगर की क्रेविंग होना ठीक नहीं है, अगर आपकी भी बहुत अधिक मीठा खाने की इच्छा होती है तो इसपर ध्यान दिया जाना चाहिए। ज्यादा मीठा खाना आपके वजन को बढ़ाने वाला हो सकता है साथ ही इसके कारण डायबिटीज की जटिलता भी बढ़ सकती है।
यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कम से कम मात्रा में चीनी वाली चीजों का सेवन कम करने की सलाह देते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।