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Kerala: केरल के डॉक्टरों ने किया कमाल, 'काल के गाल' से 14 वर्षीय लड़के को बचाया; जानिए पूरा मामला

Mon, 22 Jul 2024 07:04 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 22 Jul 2024 07:04 PM IST
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rare case of recovery from amoebic meningoencephalitis in kerla know details
केरल में गंभीर रोग से ठीक हुआ लड़का - फोटो : freepik.com

दक्षिण का राज्य केरल इन दिनों कई संक्रामक बीमारियों की चपेट में है। रविवार (21 जुलाई) को 14 वर्षीय एक लड़के की निपाह वायरस से संक्रमण के कारण मौत हो गई, जिसके बाद से राज्यभर में अलर्ट जारी कर दिया गया है। इससे पहले इसी माह की शुरुआत में कोझिकोड़ जिले में दुर्लभ और खतरनाक अमीबिक मेनिंगोएन्सेफेलाइटिस (पीएएम) संक्रमण के मामले रिपोर्ट किए गए थे। 'दिमाग खाने वाले अमीबा' के नाम से जाने जाने वाले इस रोग से एक बच्चे की मौत भी हो गई थी। पीएएम के कारण मृत्युदर 97 प्रतिशत तक माना जाता रहा है।



इन सब जोखिमों के बीच सोमवार को एक राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया कि अमीबिक मेनिंगोएन्सेफेलाइटिस का इलाज करा रहा 14 वर्षीय एक लड़का अब पूरी तरह से ठीक हो गया है। उन्होंने इस बीमारी की उच्च मृत्यु दर को देखते हुए इसे देश के लिए एक दुर्लभ घटना और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए बड़ी कामयाबी बताई है। जॉर्ज ने कहा कि दुनियाभर में केवल 11 लोग ही अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस से ठीक हुए हैं। 


ये भी पढ़िए- केरल में 'दिमाग को खाने वाले' अमीबा संक्रमण से लड़के की मौत, दो महीने में सामने आया तीसरा मामला

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बच्चों में संक्रमण का खतरा - फोटो : Freepik

स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टरों को दी बधाई

स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने इस सफलता के लिए इलाज कर रही डॉक्टरों की टीम को बधाई दी है। अमीबिक मेनिंगोएन्सेफेलाइटिस वैसे तो अत्यंत दुर्लभ रोग है लेकिन इसके कारण सेंट्रल नर्वस सिस्टम को गंभीर क्षति होने का खतरा रहता है। ये आमतौर पर झीलों, नदियों के पानी के संपर्क में आने के कारण फैलता है।

केरल में पीएएम के मामले सामने आने के बाद से इसको लेकर अलर्ट जारी किया गया था। 

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मीबिक मेनिंगोएन्सेफेलाइटिस (सांकेतिक) - फोटो : istock

कैसी थी रोगी की स्थिति

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमीबिक मेनिंगोएन्सेफेलाइटिस से ठीक होने वाले लड़के को लेकर शुरुआत में जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के कर्मियों को संदेह था कि उसे मेनिंगोएन्सेफलाइटिस हो सकता है। लड़के को मिर्गी का दौरा पड़ा था जिसके बाद उसे कोझिकोड के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। फिलहाल अब लड़के को इससे ठीक बताया जा रहा है।

इससे पहले 5 जुलाई को मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की अध्यक्षता में एक विशेष बैठक भी हुई थी जिसमें रोग की प्रारंभिक अवस्था में ही पुष्टि करने के निर्देश दिए गए थे। 20 जुलाई को अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस के लिए उपचार प्रोटोकॉल जारी किया गया था। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया कि यह देश में इस बीमारी के लिए पहला व्यापक उपचार प्रोटोकॉल था।

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अमीबिक मेनिंगोएन्सेफेलाइटिस संक्रमण - फोटो : istock

अमीबिक मेनिंगोएन्सेफेलाइटिस के बारे में जानिए

अमीबिक मेनिंगोएन्सेफेलाइटिस या प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफेलाइटिस (पीएएम), नेगलेरिया फाउलेरी नामक अमीबा के संक्रमण के कारण होने वाली बीमारी है। यह संक्रमण मस्तिष्क के ऊतकों को नष्ट करने लगता है जिससे ज्यादातर मामलों में मस्तिष्क में गंभीर सूजन और मृत्यु हो जाती है। आंकड़ों से पता चलता है कि वैसे तो पीएएम दुर्लभ है पर ये आमतौर पर स्वस्थ बच्चों, किशोरों और युवा वयस्कों में हो सकता है। संक्रमण की आशंका तब अधिक हो सकती है जब दूषित पानी नाक में प्रवेश कर जाता है। पानी में गोते लगाने वाले लोगों में इसका खतरा अधिक देखा जाता रहा है।

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अमीबिक मेनिंगोएन्सेफेलाइटिस के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : istock

पीएएम के लक्षण और बचाव के तरीके

अध्ययन की रिपोर्ट से पता चलता है कि संक्रमितों में शुरुआती लक्षण आमतौर पर फ्लू की तरह (जैसे सिरदर्द, बुखार, मतली और उल्टी) होते हैं। गंभीर स्थिति में गर्दन में अकड़न, भ्रम, दौरे पड़ने, कोमा जैसी मस्तिष्क से संबंधित समस्याओं का खतरा भी हो सकता है। इसके लक्षण तेजी से विकसित हो सकते हैं और पांच से 18 दिनों के भीतर संक्रमण घातक हो सकता है।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सावधान करते हुए कहा, बच्चों को तालाब या ठहरे हुए पानी में नहाने से बचना चाहिए। स्विमिंग पूल और वाटर थीम पार्क में पानी को नियमित रूप से क्लोरीनेट करते रहना भी जरूरी है। दूषित पानी के संपर्क में आने के कारण इस संक्रमण का खतरा होता है।


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स्रोत और संदर्भ
Primary Amebic Meningoencephalitis


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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