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जानना जरूरी: गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर या शुगर बढ़े रहने से क्या दिक्कतें हो सकती हैं? डॉक्टर से जानिए

Fri, 23 May 2025 09:55 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 23 May 2025 09:55 PM IST
सार

गर्भावस्था के दौरान आप जो कुछ भी खाती-पीती हैं, जैसे जीवनशैली का पालन करती हैं उसका सीधा असर गर्भस्थ शिशु की सेहत पर भी पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर और शुगर का स्तर सामान्य से अधिक होना मां और शिशु दोनों के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। 
 

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गर्भावस्था में डायबिटीज की समस्याएं - फोटो : Freepik.com

गर्भावस्था किसी भी महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत समय होता है, इस दौरान आपको सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान आप जो कुछ भी खाती-पीती हैं, जैसे जीवनशैली का पालन करती हैं उसका सीधा असर गर्भस्थ शिशु की सेहत पर भी पड़ता है। यही वजह है कि इस दौरान सभी महिलाओं को कुछ विशेष सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए।



क्या आप जानती हैं कि गर्भावस्था के दौरान अक्सर शुगर या ब्लड प्रेशर बढ़ा रहना आपके और बच्चे दोनों की सेहत को प्रभावित करने वाला हो सकता है?
 

गर्भावस्था और प्री-एक्लेम्प्सिया की समस्या 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर और शुगर का स्तर सामान्य से अधिक बना रहना मां और शिशु दोनों के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। अध्ययनों से पता चलता है कि गर्भावस्था के दौरान कई महिलाओं में प्री-एक्लेम्प्सिया की समस्या देखी जाती रही है। इसमें ब्लड प्रेशर काफी बढ़ जाता है ये आमतौर पर गर्भावस्था के 20 सप्ताह के बाद होता है।

एक अध्ययन के अनुसार, प्री-एक्लेम्प्सिया के कारण अमेरिका में हर साल लगभग 70,000 महिलाओं की जान जाती है और करीब पांच लाख नवजात भी प्रभावित होते हैं।

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गर्भावस्था के दौरान होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : Freepik.com

क्या कहता है डब्ल्यूएचओ?

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज (गेस्टेशनल डायबिटीज) करीब 25% गर्भवती महिलाओं को प्रभावित करती है। यदि ये नियंत्रित न रहे तो मातृ और शिशु मृत्यु दर बढ़ाने वाली हो सकती है।  
  • ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छपी रिपोर्ट के अनुसार, जिन महिलाओं को गर्भावस्था में हाई बीपी या शुगर रहा है, उन्हें भविष्य में कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (हृदय रोग) होने का खतरा 2–4 गुना अधिक हो सकता है।
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ब्लड प्रेशर की समस्या - फोटो : Freepik.com

गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर

ब्लड प्रेशर बढ़ने पर प्रीक्लेम्पसिया होता है। इसमें गर्भवती को हाई ब्लड प्रेशर, सिर दर्द, आंखों से धुंधला दिखाई देना, पेशाब में प्रोटीन बढ़ने, शरीर में सूजन आना, उल्टी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। जब यह स्थिति गंभीर रूप ले लेती है तो दौरे आने का खतरा भी बढ़ जाता है। गर्भवतियों की मौत की दूसरी सबसे बड़ी वजह एक्लेम्पसिया है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं 100 में दस गर्भवतियों में प्रीक्लेम्पसिया का जोखिम रहता है। खराब जीवनशैली, 30 साल की उम्र के बाद गर्भधारण और मोटापा जैसी स्थितियां इसके खतरे को और भी बढ़ा देती हैं।

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मीरा पाठक बताती हैं कि प्रीक्लेम्पसिया का यदि समय पर इलाज न किया जाए तो जच्चा-बच्चा की मौत भी हो सकती है। इनमें प्लेसेंटा सही नहीं बन पाता है, रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं जिससे मां से बच्चे को खून सुचारू रूप से नहीं मिल पाता है। ब्लड सर्कुलेशन कम होने से गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का खतरा हो सकता है।

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मधुमेह की समस्या - फोटो : Freepik.com

गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज की समस्या

इसी तरह गर्भकालीन मधुमेह की समस्या भी मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) और मेयो क्लिनिक के अनुसार, हाई ब्लड शुगर के स्तर से जन्म दोष, समय से पहले जन्म होनो, जन्म के समय बच्चे की मृत्यु होने या अधिक वजन वाले शिशुओं के जन्म का जोखिम बढ़ सकता है। गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज की स्थिति प्रसव के दौरान भी कई प्रकार की जटिलताएं पैदा कर सकती है।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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