प्रयागराज में जारी भव्य महाकुंभ स्नान के लिए दुनियाभर से लोगों की भीड़ पहुंच रही है। कुंभ स्नान के दौरान छिटपुट घटनाएं भी सुर्खियों में रही हैं। ऐसा ही एक मामला रविवार को भी सामने आया। प्राप्त हो रही जानकारियों के मुताबिक गंगा स्नान के दौरान एक युवती अचानक बेहोश हो गई। उसे तत्काल डॉक्टर के पास ले जाया गया जहां विशेषज्ञों ने बेहोशी के लिए हाइपोथर्मिया नामक समस्या को कारण बताया।
Hypothermia: क्या होती है हाइपोथर्मिया की समस्या जिस वजह से कुंभ में बेहोश हो गई युवती, आप भी बरतिए सावधानी
रविवार को कुंभ में गंगा स्नान के दौरान एक युवती अचानक बेहोश हो गई। उसे तत्काल डॉक्टर के पास ले जाया गया जहां विशेषज्ञों ने बेहोशी के लिए हाइपोथर्मिया नामक समस्या को कारण बताया। जानिए इस समस्या के बारे में विस्तार से।
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हाइपोथर्मिया के बारे में जानिए
हाइपोथर्मिया की स्थिति में शरीर का तापमान 95 डिग्री फारेनहाइट (35 डिग्री सेल्सियस) से कम हो जाता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है।
हाइपोथर्मिया के कारण जब शरीर का तापमान गिरता है, तो इसके दुष्प्रभाव के कारण हृदय, तंत्रिका तंत्र और अन्य अंगों का सामान्य कामकाज प्रभावित हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हाइपोथर्मिया के कारण श्वसन तंत्र के फेल होने का भी खतरा रहता है इसलिए सभी लोगों को बचाव को लेकर सावधान रहने की आवश्यकता है।
क्यों होती है हाइपोथर्मिया की दिक्कत?
हाइपोथर्मिया मुख्य रूप से अत्यधिक ठंड के संपर्क में आने के कारण होती है। अगर आप किसी ठंडी जगह पर जाते हैं जहां तापमान बहुत कम हो, या फिर सर्दियों के दौरान ठंडे पानी से नहाते हैं तो इससे शरीर का तापमान कम हो जाता है, जिससे हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ जाता है।
ठंड में सोने वाले लोग, विशेष रूप से बेघर व्यक्तियों में ये समस्या अधिक देखी जाती रही है। शराब या नशीले पदार्थों का सेवन भी आपमें जोखिमों को बढ़ाने वाला हो सकता है। शराब आपके रक्त वाहिकाओं का विस्तार करती है, जिससे शरीर अधिक गर्मी खो देता है।
हाइपोथर्मिया की क्या पहचान है?
शरीर का तापमान सामान्य से बहुत ज्यादा कम हो जाने के कारण आपको कई प्रकार की स्वास्थ्य जटिलताएं हो सकती हैं। आमतौर पर हाइपोथर्मिया के लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं और यदि समय रहते इन पर ध्यान न दिया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
शरीर का तापमान बहुत कम हो जाने के कारण कंपकंपी, ठंड के कारण बोलने में कठिनाई, सुस्ती और थकान महसूस होने, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई की दिक्कत होती है। गंभीर स्थितियों में सांस और दिल की धड़कन कम होने, बेहोशी का भी खतरा हो सकता है।
हाइपोथर्मिया से बचाव के उपाय
हाइपोथर्मिया से बचने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं।
- सर्दी के दिनों में शरीर के तापमान को स्थिर रखने के लिए गर्म कपड़े पहनें।
- सर्दियों में ठंडे पानी में नहाने से बचें। हल्के गुनगुने पानी से नहाने की सलाह दी जाती है।
- शराब और नशीले पदार्थों से बचें। इससे शरीर की गर्मी जल्दी से घटने लगती है।
- सर्दियों में उचित आहार लें। ऊर्जा देने वाला भोजन करें और गर्म पेय पदार्थ पिएं।
हाइपोथर्मिया एक गंभीर स्थिति है, जो जीवन के लिए घातक हो सकती है यदि समय पर इसका उपचार न किया जाए। उचित सावधानियों को अपनाकर और ठंड के प्रति सतर्क रहकर इससे बचा जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति में हाइपोथर्मिया के लक्षण दिखाते हैं, तो उसे तुरंत गर्म स्थान पर ले जाएं, गर्म कपड़े पहनाएँ और समय रहते डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।