कोरोना महामारी से बचाव को ही सुरक्षा का सबसे कारगर उपाय माना जाता है। बचाव और सुरक्षा उन लोगों के लिए और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है जो लगातार कोरोना संक्रमितों की देखरेख में जुटे हैं, या जो लोगों ऐसे काम से जुड़े हैं जिसमें संक्रमण होने का खतरा अधिक होता है। देश में कोविड से बचाव के लिए जारी गाइडलाइंस में कोविड संक्रमितों के संपर्क में आने वाले सभी लोगों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) पहनने की सलाह दी गई है। पीपीई किट एक बार इस्तेमाल किए जा सकते हैं, इस्तेमाल करने के बाद इन किटों को नष्ट कर दिया जाता है। यही कारण है कि कई बार डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों को लगातार कई घंटों तक किट पहन कर रखना पड़ता है।
बड़ी कामयाबी: अब पीपीई किटों को संक्रमण मुक्त कर दोबारा किया जा सकेगा प्रयोग, नई तकनीक आई सामने
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‘वज्र कवच’ प्रणाली
देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच कोविड-19 उपचार एवं उसके नियंत्रण के दौरान पैदा होने वाले कचरे का निपटान भी एक बड़ी चुनौती है। मुंबई स्थित स्टार्टअप ‘इंद्रावाटर’ द्वारा हाल में विकसित की गई एक डिस्इन्फेक्शन प्रणाली इस मुश्किल को हल करने में मददगार हो सकती है। ‘वज्र कवच’ नामक यह प्रणाली पीपीई किट जैसे चिकित्सकीय और गैर-चिकित्सकीय कपड़ों को संक्रमण से मुक्त कर सकती है, जिससे उनका फिर से उपयोग किया जा सकता है।
कोविड-19 अपशिष्ट को कम किया जा सकेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘वज्र कवच’ नामक इस प्रणाली से न सिर्फ अत्यधिक मात्रा में उत्पन्न हो रहे कोविड-19 अपशिष्ट को कम करने में मदद मिल सकती है, साथ ही यह पीपीई किट पर हो रहे बड़े खर्च को कम करने में भी काफी सहायक हो सकती है।
अधिकारियों के मुताबिक इस उत्पाद में एक बहु-चरणीय डिस्इंफेक्शन प्रणाली का प्रयोग किया गया है, जो वायरस एवं बैक्टीरिया जनित संक्रमण और अन्य विषाक्त तत्वों को पीपीई किट में मौजूद उन्नत ऑक्सीकरण और यूवी–सी प्रकाश स्पेक्ट्रम के माध्यम से 99 प्रतिशत तक निष्क्रिय कर सकती है। इस प्रणाली को महाराष्ट्र और तेलंगाना के कई अस्पतालों में लगाया जा रहा है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे के जैव-विज्ञान एवं जैव-अभियांत्रिकी विभाग में परीक्षण के बाद इस प्रक्रिया को प्रभावी पाया गया है, इसी के आधार पर अब इसे प्रयोग में लाया जा रहा है।
कई संस्थानों से मिल चुकी है मान्यता
आईआईटी बॉम्बे के अलावा इस प्रणाली को वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद की नागपुर स्थित लैब राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) से भी स्वीकृति मिली है। इसे अब सम्पूर्ण भारत में कोरोना संक्रमित रोगियों का उपचार करने वाले चिकित्सालयों में स्थापित किया जा रहा है।
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स्रोत और संदर्भ:
India Science wire
अस्वीकरण नोट: यह लेख इंडिया साइंस वायर द्वारा प्रकाशित नई तकनीक पत्र के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं।