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सावधान: जिन लोगों को नहीं था कोरोना, उनमें भी देखे जा रहे हैं पोस्ट कोविड के ऐसे लक्षण

Mon, 12 Jul 2021 06:42 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Mon, 12 Jul 2021 06:42 PM IST
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post covid symptoms in non covid people, all you need to know
पोस्ट कोविड की समस्याएं (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

Medically Reviewed by


डॉ आदित्य अग्रवाल
(वरिष्ठ चिकित्सक, वाराणसी)
 

कोरोना की दूसरी लहर देश में भले ही अब लगभग खत्म हो गई हो लेकिन पोस्ट कोविड समस्याएं अब भी कई लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। कोरोना से ठीक होने के बाद भी कई लोगों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं परेशान कर रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि पोस्ट कोविड की यह दिक्कतें कुछ हफ्तों से लेकर महीने तक भी रह सकती हैं।
पोस्ट कोविड का नाम सुनते ही सभी को लगता है कि यह दिक्कतें सिर्फ उन्हीं लोगों को होती हैं, जो कोरोना के शिकार रह चुके हों, पर हर बार ऐसा आवश्यक नहीं है। कुछ मरीज, जो कोरोना से संक्रमित नहीं भी थे उनमें भी पोस्ट (लॉन्ग) कोविड के कुछ लक्षण देखने को मिल रहे हैं। आइए इस लेख में विशेषज्ञों से जानते हैं कि आखिर पोस्ट कोविड की समस्या क्यों होती हैं और यह कितने प्रकार की हो सकती हैं? सबसे महत्वपूर्ण बात, जो लोग कोरोना से संक्रमित नहीं रहे हैं, उनमें पोस्ट कोविड की समस्या किस तरह की देखी जा रही है?

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कोरोना से ठीक होने के बाद की दिक्कतें (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

पोस्ट कोविड समस्याओं का कारण क्या है?
पोस्ट कोविड समस्याएं कितने प्रकार की होती हैं, यह जानने से पहले इसके कारणों के बारे में पता करना आवश्यक है। डॉक्टरों के मुताबिक कोरोना से मुकाबले के दौरान हमारे शरीर में मौजूद मायक्रोन्यूट्रिएंट की काफी खपत हो जाती है, यही कारण है कि लोगों को ठीक होने के बाद भी काफी कमजोरी महसूस होती है। इस कमजोरी को ठीक होने में एक से दो महीने का वक्त लग सकता है। ऐसे में लोगों को पूरा आराम करने और खान-पान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। कोरोना के दौरान शरीर में हुई मायक्रोन्यूट्रिएंट की कमी को जल्द से जल्द दूर करने के प्रयास करने चाहिए। रोजाना पौष्टिक आहार का सेवन इसका सबसे बेहतर उपाय हो सकता है।

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लोगों में देखी जा रही है नींद की समस्या - फोटो : Social media

गैर कोरोना संक्रमितों में किस तरह की दिक्कतें हो रही हैं?
डॉक्टर बताते हैं कि कोरोना, विशेषकर दूसरी लहर ने लोगों के शारीरिक और मानसिक सेहत को बुरी तरह से प्रभावित किया है। जो लोग कोरोना से संक्रमित नहीं थे, उनमें भी इसके कई तरह से अप्रत्यक्ष प्रभाव देखे जा रहे हैं। गैर कोरोना संक्रमितों में कोरोना-सोमेनिया की समस्या इसी का उदाहरण है। यह समस्या इनसोमेनिया यानी अनिद्रा और नींद की अन्य समस्याओं से जुड़ी हुई है। जर्नल ऑफ़ क्लिनिकल स्लीप मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार इस महामारी के कारण लगभग 40 फीसदी लोगों ने अनिद्रा और नींद से जुड़ी तमाम प्रकार की समस्याओं का अनुभव किया। लॉकडाउन के समय बिगड़ी दिनचर्या को भी इसका एक कारण माना जा सकता है। बीमारी को लेकर भय और चिंता के माहौल ने भी कोरोनासोमेनिया को जन्म दिया है।

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कोरोना के बाद गंभीर थकान की समस्या (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

थकान और कमजोरी की समस्या
डॉक्टर बताते हैं कि कोरोना से मुकाबले के दौरान हमारे शरीर में अतिसूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। यह पोषक तत्व शरीर को शक्ति और स्फूर्ति का एहसास कराते हैं। यही कारण है कि कोरोना से ठीक होने वाले ज्यादातर लोग अब भी गंभीर कमजोरी और थकान के साथ शरीर के अंगों विशेषकर हाथ और पैर में दर्द का अनुभव कर रहे हैं। इन समस्याओं से जल्द से जल्द छुटकारा पाने के लिए सभी लोगों को खान-पान में पौष्टिक आहारों को शामिल करने पर जोर देना चाहिए। ऐसे आहार शरीर में दोबारा से मायक्रोन्यूट्रिएंट का निर्माण करने में सहायक हो सकते हैं।

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कई लोगों में बढ़ी हृदय से संबंधित दिक्कतें (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

मायोकार्डिटिस की समस्या 
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि कोरोना के लगभग 70 फीसदी लोगों को मायोकार्डिटिस की दिक्कत हो रही है, गंभीर बात यह है कि इसके शिकार युवा भी हो रहे हैं जिनके पास अभी पूरा जीवन शेष है। मायोकार्डिटिस के कारण दिल की मांसपेशियों में सूजन की समस्या हो जाती है, जोकि हृदय के विद्युत प्रणाली को प्रभावित कर सकती है। आमतौर पर ऐसी स्थिति में हृदय को खून पंप करने में दिक्कत होती है जो धड़कनों की अनियमितता का कारण भी बन सकती है। कोरोना के जो रोगी पहले से ही डायबिटीज, हृदय रोग और मोटापे की समस्या से ग्रसित थे उनमें मायोकार्डिटिस की समस्या अधिक देखी जा रही है।

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नोट: यह लेख डॉ आदित्य अग्रवाल (वरिष्ठ चिकित्सक, वाराणसी) के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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