देश में कोरोना की दूसरी लहर के धीमा पड़ने के साथ ही तीसरी लहर को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। कोरोना की तीसरी लहर कितनी गंभीर और संक्रामक होगी तथा इसमें लोगों को किस तरह की समस्याएं हो सकती हैं, ऐसे कई सवाल आपके मन में भी चल रहे होंगे। तमाम रिपोर्टस में कोरोना की तीसरी लहर के समय को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, हालांकि हालिया रिपोर्ट में जो दावा किया गया है वह सभी लोगों की चिंता बढ़ा सकती है। डेटा विश्लेषण के आधार पर हैदराबाद के वरिष्ठ भौतिक विज्ञानी ने संकेत दिए हैं कि देश में कोरोना के तीसरी लहर की शुरुआत हो चुकी है।
बड़ा सवाल: क्या देश में शुरू हो गई है कोरोना की तीसरी लहर? भौतिक विज्ञानी का बड़ा दावा
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क्या 4 जुलाई से शुरू हो चुकी है तीसरी लहर?
हैदराबाद विश्वविद्यालय के वरिष्ठ भौतिक विज्ञानी और पूर्व कुलपति डॉ विपिन श्रीवास्तव ने एक अखबार से बातचीत में कहा कि 4 जुलाई से देश में कोविड-19 के संक्रमण और मौतों का पैटर्न वैसा ही देखा जा रहा है जैसा इस साल फरवरी के पहले हफ्ते में था। यही मामले अप्रैल के अंत तक देश में गंभीर रूप ले चुके थे। इस आधार पर कोरोना के तीसरे लहर की शुरुआत की आशंका जताई जा रही है। डॉ विपिन कहते हैं कि अगर लोग सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजेशन, मास्क पहनने और टीकाकरण जैसे कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करने में विफल रहे तो तीसरी लहर तेजी से गति पकड़ सकती है।
बन रहे हैं फरवरी जैसे हालात
डॉ विपिन ने 461 दिनों के कोविड-19 डेटा और मौतों का विश्लेषण करने के बाद महामारी की प्रगति पर तीन मीट्रिक तैयार किए हैं। इनमें से एक में संकेत मिल रहा है कि देश में 4 जुलाई से कोरोना के दूसरी लहर की शुरुआत हो चुकी है। कई स्तरों पर किए गए डेटा अध्ययन के आधार पर वरिष्ठ भौतिक विज्ञानी का कहना है कि फिलहाल के जो आंकड़े देखने को मिल रहे हैं, वह फरवरी के शुरुआती दिनों के डेटा से मिलते जुलते हैं, ऐसे में हमें काफी सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
कोविड से बचाव के उपायों को प्रयोग में लाना बेहद जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना की तीसरी लहर से सुरक्षित रहने के लिए सभी लोगों को निरंतर कोविड बचाव के नियमों का पालन करते रहना चाहिए। अमर उजाला से बातचीत में वरिष्ठ स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ योगेंद्र सारस्वत कहते हैं कि जिस तरह से पिछले दिनों सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के साथ खिलवाड़ करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, वह निश्चित ही काफी चिंताजनक हैं। जिस तरह से कई देशों में कोरोना के मामले फिऱ से रफ्तार पकड़ रहे हैं, ऐसे में हमें बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है।
कोरोना के फिर से बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जताते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने इसके चार प्रमुख कारण बताए हैं। डॉ सौम्या कहती हैं, डेल्टा वैरिएंट्स निश्चित ही हमारे लिए सबसे बड़ी मुसीबत का कारण बना हुआ है। उसके साथ लोगों का फिर से एक दूसरे से मिलना, लॉकडाउन में ढील और टीकाकरण की धीमी रफ्तार के कारण कई देशों में हालात फिर से खराब हो रहे हैं। कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन से ऊब चुके लोग थोड़ी राहत देखते ही दोबारा घरों से बाहर निकलने लगे हैं, इसमें कोविड उपयुक्त व्यवहार का पालन नहीं किया जा रहा है, इसे भी एक कारण के रूप में देखा जाना चाहिए।
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नोट: यह लेख हैदराबाद विश्वविद्यालय के वरिष्ठ भौतिक विज्ञानी और पूर्व कुलपति डॉ विपिन श्रीवास्तव के एक अखबार से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला देश में कोरोना के तीसरी लहर की शुरुआत को लेकर कोई दावा नहीं करता है, यह वरिष्ठ भौतिक विज्ञानी के स्वयं के विचार और आंकड़े हैं।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।