कोरोना वायरस महामारी ने साल 2020 में लोगों द्वारा बनाए गए प्लान पर पूरी तरह पानी फेर दिया। ये वायरस इस तरह से फैला कि विश्व के ज्यादातर देशों में लंबे समय तक के लिए लॉकडाउन लगाना पड़ा। लगभग हर किसी के लिए ये ऐसा समय था, जो उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था। ऐसे में लोगों को लंबे समय तक अपने घर पर ही रहना पड़ा और घर से अपना काम भी करना पड़ा, जिसके कारण वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने का लोगों को मौका मिला और वो अपने परिवार वालों के साथ भी ज्यादा से ज्यादा समय बिताए पाए। लेकिन हाल ही में एक सर्वे सामने आया है, जिसमें घर से काम करने वाले लोगों को लेकर एक सर्वे किया गया है। तो चलिए जानते हैं इस बारे में।
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लॉकडाउन के दौरान शहरों में रहने वाले भारतीय लोगों के पारिवारिक रिश्ते बेहतर हुए। लेकिन बहुत से युवाओं को चिंता और अकेलेपन का भी सामना करना पड़ा। कोविड-19 महामारी ने मानव अस्तित्व के लगभग हर पहलू को बाधित कर दिया। लॉकडाउन के दौरान जीवनशैली में बदलाव ने कुछ को खुश कर दिया, तो कुछ खुश नहीं हो पाए। दरअसल, हाल ही में 'YouGov-Mint-CPR मिलेनियल सर्वे' में पाया गया कि लॉकडाउन के दौरान जो लोग घर पर थे उनके पारिवारिक संबंध काफी हद तक सुधरे हैं, फिर भी कई लोग घर से काम करने को लेकर उत्साहित नहीं हैं। जहां इस दौरान युवा तनाव में रहे और उन्हें चिंताओं ने घेरा, तो वहीं अधिकांश लोग दोस्तों से मिलने या छुट्टियों पर जाने के लिए तरसते हैं।
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अक्टूबर और नवंबर 2020 में हुए इस सर्वेक्षण में देश के 203 शहरों और कस्बों के लगभग 10 हजार उत्तरदाताओं को लॉकडाउन के दौरान जीवन के बारे में कई सवाल पूछे गए थे। बात अगर सर्वेक्षण में पाई गई सकारात्मक बात की करें तो अधिकांश उत्तरदाताओं यानी 62% लोगों ने महसूस किया कि लॉकडाउन के बाद से परिवार के सदस्यों के साथ उनके संबंधों में सुधार हुआ है। प्रकृति के साथ जुड़ाव अधिकांश समय के लिए बढ़ गया और इसलिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय भी उनके मन में आया।
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शहरी भारतीयों के बीच पूर्व कोविड जीवन के लिए उदासीनता स्पष्ट थी। लगभग सभी ने कहा कि उन्होंने बंद के दौरान सामाजिक जीवन के कुछ पहलुओं को याद किया। दोस्तों और परिवार के साथ बैठक इस सूची में सबसे ऊपर है, लेकिन 40% से अधिक उत्तरदाताओं ने काम या कॉलेज जाने के बारे में बताया है। लोगों ने मित्रों और परिवार के साथ सामाजिक समारोह, शादियों में जाने के पलों को याद किया।
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ये सर्वेक्षण वैश्विक बाजार अनुसंधान फर्म YouGov मिंट के भारतीय शाखा और दिल्ली स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। इसमें शामिल लोगों की उम्र 18 साल से लेकर 39 साल के ऊपर तक की थी। ये भारत के डिजिटल मूल निवासियों की आकांक्षाओं, चिंताओं और दृष्टिकोण की जांच करने के उद्देश्य से द्विशताब्दी वार्षिक सर्वेक्षणों की श्रृंखला का पांचवा हिस्सा था।