Air Pollution: पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के चलते अक्तूबर-नवंबर के महीनों में हर साल राजधानी दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। प्रदूषण को तमाम अध्ययनों में सेहत के लिए गंभीर समस्याएं बढ़ाने वाला पाया गया है। हवा में मौजूद बेहद छोटे कण (PM2.5) हमारी सांस के साथ सीधे फेफड़ों में चले जाते हैं और वहां से खून में मिल जाते हैं। इससे न सिर्फ सांस की समस्या बल्कि हृदय रोग और दीर्घकालिक स्थिति में कैंसर तक का खतरा हो सकता है।
Air Pollution: दिल्ली की हवा में घुला 'जहर', हार्ट और ब्रेन के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ओजोन का अधिक स्तर कई प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों को जन्म देने वाला हो सकता है, जिसको लेकर सभी लोगों को सर्तकता बरतने की जरूरत होती है। आइए इससे होने वाले दुष्प्रभावों को जान लेते हैं।
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पहले ओजोन गैस के बारे में जानिए
ओजोन एक गैस है जो आसमान मौजूद होती है और हमें सूरज की हानिकारक किरणों से बचाती है, लेकिन धरती पर इसका बढ़ता स्तर खतरनाक हो सकता है। वैसे तो यह सीधे किसी स्रोत से नहीं निकलता, बल्कि वाहनों, उद्योगों और बिजलीघरों से निकलने वाली नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनोआक्साइड (सीओ) के सूरज की रोशनी में रासायनिक प्रतिक्रिया से बनता है। यह गैस बहुत प्रतिक्रियाशील होती है और हवा में लंबी दूरी तक फैल सकती है।
शोधकर्ता बताते हैं इस का बढ़ता स्तर सांस की बीमारियों, विशेष रूप से अस्थमा और दमा को बढ़ावा देती है, साथ ही फसलों को नुकसान पहुंचाकर खाद्य सुरक्षा को खतरे में डालती है।
ओजोन का बढ़ता स्तर हो सकता है खतरनाक
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि गर्मी और सूरज की रोशनी ओजोन निर्माण को तेज करती है, जिससे शहरी क्षेत्रों में हॉटस्पॉट बन रहे हैं। लंबे समय तक ओजोन का बढ़ा हुआ स्तर संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला हो सकता है।
ओजोन गैस श्वसन तंत्र के लिए सबसे हानिकारक प्रदूषकों में से एक है। यह फेफड़ों की भीतरी परत में जलन पैदा करती है और सूजन का कारण बनती है। ओजोन प्रदूषण वाले वातावरण में रहने से सांस के माध्यम से शरीर में जाकर सांस फूलना, सीने में दर्द, खांसी, गले में जलन और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखने लगते हैं।
हृदय रोगों का खतरा
ओजोन सिर्फ सांस की समस्याओं के लिए ही नहीं हृदय स्वास्थ्य के लिए भी दिक्कतें बढ़ा सकता है। ये गैस सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करती है और रक्त में सूक्ष्म स्तर पर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस का कारण पैदा करती है। इससे रक्त वाहिकाओं में सूजन होती है और ब्लड प्रेशर अस्थिर हो सकता है। ओजोन के लंबे समय तक संपर्क में रहने से हृदय की धड़कनें अनियंत्रित हो सकती है जिससे दिल के दौरे का जोखिम बढ़ जाता है। अध्ययनों से पता चला है कि ओजोन के बढ़े स्तर वाले दिनों में अस्पतालों में हृदयाघात और स्ट्रोक के मामलों में वृद्धि देखी जाती है।
मस्तिष्क पर इसका असर
शोध से पता चलता है कि वातावरण में ओजोन का बढ़ा हुआ स्तर मस्तिष्क की सेहत को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। ओजोन के कारण दिमाग में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ जाता है। सांस के जरिए जब ये गैस शरीर में प्रवेश करती है तो इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं में क्षति हो सकती है, जो स्मरण शक्ति, ध्यान और निर्णय क्षमता पर असर डालती है। बच्चों और बुजुर्गों में इसका प्रभाव अधिक देखा गया है। ये बुजुर्गों में अल्जाइमर या डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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