कोरोना के नए वैरिएंट्स और इनसे बचाव के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों से जल्द से जल्द वैक्सीन लगवाने की अपील कर रहे हैं। माना जा रहा है कि वैक्सीन लगवाने से शरीर में बनीं एंटीबॉडीज कोरोना वायरस संक्रमण से सुरक्षा दे सकती हैं। हालांकि कई अध्ययनों में लोगों में एंटीबॉडीज का स्तर अलग-अलग होने की बात कही जा रही है। इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि वृद्ध लोगों में वैक्सीनेशन के बाद भी कोरोनावायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज, युवाओं की तुलना में कम हो सकती हैं। इस आधार पर कहा जा सकता है कि वैक्सीनेशन के बाद भी वृद्ध लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है।
अध्ययन: इस आयुवर्ग में टीके की दोनों डोज के बाद भी कम पाई गई एंटीबॉडीज, संक्रमण का खतरा हो सकता है अधिक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एंटीबॉडीज को लेकर उम्र आधारित अध्ययन
अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि तमाम उम्र के लोगों में वैक्सीन के बाद शरीर में बनीं एंटीबॉडीज के स्तर पर अध्ययन किया गया। ओएचएसयू स्कूल ऑफ मेडिसिन में मॉलिक्यूलर माइक्रोबायोलॉजी और इम्यूनोलॉजी के सहायक प्रोफेसर और अध्ययन के वरिष्ठ लेखक फिकाडू ताफेसे कहते हैं, उम्रदराज लोगों के शरीर में एंटीबॉडीज का स्तर कम पाया गया है। हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि वृद्ध लोगों में भले ही एंटीबॉडी प्रतिक्रिया कम हो सकती है लेकिन ऐसे लोगों को भी कोरोना के गंभीर संक्रमण से काफी हद तक सुरक्षित माना जा सकता है।
कोरोना के प्रसार और गंभीर संक्रमण से बचाती है वैक्सीन
शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका है पर भले ही उनमें कम एंटीबॉडीज है, ऐसे लोग भी कोरोना के गंभीर संक्रमण और इससे होने वाली मौत से सुरक्षित माने जा सकते हैं। टीकाकरण नए और संभावित रूप से अधिक संक्रामक वायरस के भी प्रसार को कम कर देता है। ऐसे में विशेष रूप से वृद्ध लोगों का टीकाकरण काफी आवश्यक है क्योंकि ऐसे लोग संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। वृद्ध लोगों को सुरक्षित रखने के लिए आसपास के सभी लोगों का टीकाकरण होना भी बेहद आवश्यक है, संक्रमण को रोकने के लिए यह तरीका अपनाया जाना चाहिए।
युवाओं में देखी गई अधिक एंटीबॉडी प्रतिक्रिया
इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने फाइजर वैक्सीन की दूसरी खुराक लेने के दो सप्ताह बाद 50 लोगों के रक्त में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को जानने के लिए अध्ययन किया। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि 70 से 82 वर्ष की आयु के लोगों की तुलना में 20 साल के आसपास की आयु वाले लोगों में एंटीबॉडी प्रतिक्रिया लगभग सात गुना अधिक हो सकती है। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि चूंकि उम्रदराज लोगों में एंटीबॉडी प्रतिक्रिया कम हो सकती है, ऐसे में यह लोग संक्रमण के खिलाफ अतिसंवेदनशील माने जा सकते हैं। प्रोफेसर टैफेस कहते हैं, कोरोना के नए वैरिएंट्स के प्रति युवा व्यक्तियों की तुलना वृद्ध लोगों खतरा अधिक हो सकता है, हालांकि टीका फिर भी काफी हद तक सुरक्षा देने के योग्य है।
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
ओएचएसयू स्कूल ऑफ मेडिसिन में संक्रामक रोगों के एसोसिएट प्रोफेसर और अध्ययन के सह-लेखक मार्सेल कर्लिन ने कहते हैं, इस अध्ययन के निष्कर्ष के आधार पर हम कह सकते हैं कि वृद्ध लोगों के साथ-साथ अन्य लोगों का टीकाकरण भी बेहद आवश्यक है। अध्ययनों में यह स्पष्ट हो चुका है कि प्राकृतिक संक्रमण की तुलना में वैक्सीनेशन से शरीर में मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा हो सकती है। वृद्ध लोगों का टीकाकरण जरूरी है क्योंकि इससे कोरोना से होने वाला गंभीर खतरा कम हो सकता है। आसपास के लोगों का यदि टीकाकरण हो जाए तो कम एंटीबॉडी प्रतिक्रिया वाले लोगों को भी अतिरिक्त सुरक्षा मिल सकती है।
------------
स्रोत और संदर्भ:
Study links vaccine immune response to age
अस्वीकरण नोट: यह लेख OHSU स्कूल ऑफ मेडिसिन की विज्ञप्ति और अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित अध्ययनके आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। संबंधित विषय के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए अपने चिकित्सक से सलाह लें।