फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Nomophobia: क्या आप भी थोड़े समय के लिए मोबाइल से नहीं रह पाते हैं दूर? हो सकता है 'नोमोफोबिया' का खतरा

Wed, 14 May 2025 02:56 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Wed, 14 May 2025 02:56 PM IST
सार

आज के समय में फोन को बेवजह बार-बार चेक करना एक गलत आदत बनती जा रही है। फोन से दूर होने पर भी लगातार उसी का ख्याल आना चिंताजनक हो सकता है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह नोमोफोबिया का लक्षण हो सकता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।

विज्ञापन
Nomophobia Risk What Is Nomophobia Symptoms Meaning Mobile Addiction precaution in hindi
मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik

Health Tips: आज के समय मोबाइल फोन हर किसी के लिए एक जरूरी उपकरण बन चुका है। इस डिजिटल युग में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। देखा जाए स्मार्टफोन के एल्गोरिदम को ऐसा डिजाइन किया जा रहा है कि फोन की आदत लगना बहुत आम बात हो गई है। लेकिन अगर आप अपने फोन से कुछ मिनट भी दूर नहीं रह पाते और इसे न देख पाने पर बेचैनी, चिंता या घबराहट महसूस करते हैं, तो यह 'नोमोफोबिया' का लक्षण हो सकता है।



नोमोफोबिया, को और सरल करके कहें तो 'नो मोबाइल फोन फोबिया', एक ऐसी मानसिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को फोन न होने या उससे कनेक्शन टूटने का डर सताता है। नोमोफोबिया से परेशान लोगों को यह समझना जरूरी है कि यह सिर्फ एक लत नहीं, बल्कि एक वास्तविक मानसिक स्थिति है। इस लेख में हम नोमोफोबिया के संकेतों के बारे में जानेंगे, इसके कारणों को समझेंगे और इसमें सुधार लाने के कुछ आसान उपायों के बारे में जानेंगे। आइए जानते हैं।

Nomophobia Risk What Is Nomophobia Symptoms Meaning Mobile Addiction precaution in hindi
मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik

नोमोफोबिया के लक्षण
नोमोफोबिया के लक्षणों में शामिल हैं-
 

  • फोन न होने पर चिड़चिड़ापन, बेचैनी या घबराहट।
  • बार-बार फोन चेक करना, भले ही कोई नोटिफिकेशन न हो।
  • बैटरी खत्म होने या नेटवर्क न मिलने पर तनाव होना।
  • सोते समय फोन को पास रखने की आदत।
  • काम पर ध्यान न दे पाना।

 

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह स्थिति मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है और तनाव, चिंता, डिप्रेशन या नींद की कमी जैसी समस्याओं को जन्म दे सकती है।
 

Nomophobia Risk What Is Nomophobia Symptoms Meaning Mobile Addiction precaution in hindi
मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik
नोमोफोबिया के कारण
नोमोफोबिया के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ मुख्य कारणों के बारे में हम बताने जा रहे हैं-
  • सोशल मीडिया पर लगातार अपडेट्स, लाइक्स और कमेंट्स की चाह नोमोफोबिया को बढ़ाती है।
  • पढ़ाई, काम, बैंकिंग और सामाजिक संपर्क के लिए फोन पर अत्यधिक निर्भरता इस डर को जन्म देती है।
  • हर समय दोस्तों या सहकर्मियों से जुड़े रहने का दबाव नोमोफोबिया को बढ़ावा देता है।
  • अकेलेपन से बचने के लिए लोग फोन का सहारा लेते हैं, जो धीरे-धीरे लत में बदल जाता है।

ये भी पढ़ें- Fatigue Syndrome: सुस्ती, एकाग्रता में कमी और खराब स्लीप साइकिल से हैं परेशान? हो सकता है इस बीमारी का खतरा

 
विज्ञापन
विज्ञापन
Nomophobia Risk What Is Nomophobia Symptoms Meaning Mobile Addiction precaution in hindi
मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik
बचाव के उपाय -
नोमोफोबिया को कंट्रोल करने के लिए कुछ उपाय अपना सकते हैं-
 
  • फोन के उपयोग के लिए समय निर्धारित करें। सोशल मीडिया के लिए रोजाना 1-2 घंटे की सीमा बनाएं। फोन में स्क्रीन टाइम ट्रेक करें और नोटिफिकेशन बंद रखें।
  • सप्ताह में एक दिन या कुछ घंटे फोन से पूरी तरह दूर रहें। इस समय किताब पढ़ें, सैर करें या परिवार के साथ समय बिताएं। फोन को साइलेंट मोड पर रखें और दूसरी गतिविधियों में व्यस्त रहें।

ये भी पढ़ें- जानना जरूरी: डेंगू का किन अंगों पर होता है सबसे ज्यादा असर? गंभीर स्थितियों में हो सकती हैं ये दिक्कतें
 
विज्ञापन
Nomophobia Risk What Is Nomophobia Symptoms Meaning Mobile Addiction precaution in hindi
मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik
  • माइंडफुलनेस और मेडिटेशन तनाव को कम करते हैं और फोन की लत को नियंत्रित करते हैं। रोजाना 10 मिनट गहरी सांस लें या ध्यान का अभ्यास करें। यह मन को शांत रखता है।
  • दोस्तों और परिवार के साथ आमने-सामने बातचीत बढ़ाएं। यह अकेलेपन को कम करता है और फोन की जरूरत को घटाता है। सप्ताह में एक बार दोस्तों से मिलें और फोन कॉल की जगह व्यक्तिगत मुलाकात को प्राथमिकता दें।
  • अगर नोमोफोबिया के लक्षण गंभीर हों, जैसे चिंता या डिप्रेशन, तो मनोवैज्ञानिक से सलाह लें। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) इस स्थिति में प्रभावी है।


नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed