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विशेषज्ञ से जानिए: क्या टीकाकरण के बाद साइड-इफेक्ट्स न होने का मतलब, सही से काम नहीं कर रही वैक्सीन?

Tue, 15 Jun 2021 02:15 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Tue, 15 Jun 2021 02:15 PM IST
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no side effects from vaccine good or bad, what expert says
कोरोना टीकाकरण के बाद होने वाले साइड-इफेक्ट्स - फोटो : PTI
Medically reviewed by-

डॉ अजीत सिंह ओबेरॉय
कैंसर रोग विशेषज्ञ
दिल्ली


कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिए देश में इस समय 18 साल से ऊपर के सभी लोगों का वैक्सीनेशन किया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए यही उपाय सबसे प्रभावी हो सकता है। कोविड का टीकाकरण कराने वाले ज्यादातर लोगों को हाथ में दर्द, थकान, सिरदर्द, बुखार या मितली सहित कई तरह के साइड इफेक्ट का अनुभव हो रहा है, जो इस बात का संकेत है कि प्रतिरक्षा प्रणाली वैक्सीन के प्रति अच्छी प्रतिक्रिया दे रही है। लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं जिनमें किसी तरह के साइड-इफेक्ट्स नहीं देखे जा रहे हैं, तो क्या ऐसे लोगों में वैक्सीन ठीक तरह से काम नहीं कर रही है?
लोगों के मन में इस तरह के सवाल हैं कि वैक्सीन के बाद अगर बुखार या सिरदर्द नहीं होता है तो क्या यह भी चिंता की बात है? आइए स्वास्थ्य विशेषज्ञ से इसी बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं?
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वैक्सीनेशन के साइड-इफेक्ट्स (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
वैक्सीनेशन के बाद क्यों होते हैं साइड-इफेक्ट्स
अमर उजाला से बातचीत में डॉ अजीत सिंह बताते हैं कि शरीर के बाहरी एंटीजन के संपर्क में आने के कारण होने वाली प्रतिक्रियाओं को साइड-इफेक्ट्स के रूप में जाना जाता है। किसी भी एंटीजन के खिलाफ शरीर की प्रतिक्रिया जैसी होती है, उससे होने वाले साइड-इफेक्ट्स भी उसी तरह के दिखते हैं।
वैक्सीन के मामले में भी ऐसा ही है, वैक्सीन में मौजूद तत्वों के संपर्क में आते ही हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली सक्रिय हो जाती है। ऐसी स्थिति में शरीर श्वेत रक्त कोशिकाओं और रक्षात्मक एंटीबॉडी को भेजना शुरू कर देती है, जोकि संक्रमण के खिलाफ इंफ्लामेटरी रिएक्शन को प्रेरित करता है। इसी वजह से लोगों को बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगने जैसे लक्षणों का अनुभव होता है।
 
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वैक्सीनेशन के बाद बुखार आना कितना जरूरी (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
वैक्सीनेशन के बाद साइड-इफेक्ट न होने का क्या मतलब है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जिन लोगों को वैक्सीन लगवाने के बाद बुखार या अन्य तरह के साइड-इफेक्ट्स नहीं हो रहे हैं, उन्हें इस बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है। इसका ऐसा मतलब बिल्कुल नहीं है कि वैक्सीन सही से काम नहीं कर रही है। जिन लोगों के शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पहले से ही बेहतर होती है, उनमें भी आमतौर पर इस तरह के साइड-इफेक्ट्स देखने को नहीं मिलते हैं।
 
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वैक्सीन की कार्यप्रणाली को समझिए - फोटो : PTI
क्या कहते हैं अध्ययन
फाइजर वैक्सीन के क्लिनिकल परीक्षण के दौरान भी वैज्ञानिकों ने पाया कि करीब 50 फीसदी प्रतिभागियों को इससे कोई साइड इफेक्ट नहीं हुआ। इतना ही नहीं इनमें से 90 फीसदी से अधिक लोगों में वायरस के अच्छी प्रतिरक्षा विकसित होने का भी पता चला। वहीं मॉडर्ना वैक्सीन पर अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि दस में से एक व्यक्ति को सामान्य दुष्प्रभावों का अनुभव हो सकता है। फिर भी वैक्सीन लेने वाले सभी लोगों को यह संक्रमण से 95 फीसदी तक सुरक्षा देती है।
 
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कैसे दूर करें वैक्सीन के कारण होने वाले साइड-इफेक्ट्स (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए क्या करें?
डॉक्टरों के मुताबिक वैक्सीन के साइड-इफेक्ट्स एक से दो दिन में स्वत: ठीक हो जाते हैं। कुछ लोगों को वैक्सीन लगने वाली जगह पर दर्द और उस बांह में असुविधा का अनुभव हो सकता है। वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए ये सामान्य उपाय किए जा सकते हैं।
  • जहां पर वैक्सीन लगा हो वहां आइस पैक या ठंडी सेकाई कर सकते हैं।
  • वैक्सीनेशन के बाद तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें।
  • खूब मात्रा में पानी, फलों के जूस और पौष्टिक आहार लें।
  • कुछ दिनों तक शराब और धूम्रपान से बचें।
  • हल्के लक्षण महसूस होने पर पैरासिटमॉल ले सकते हैं। 
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नोट: यह लेख डॉ अजीत सिंह ओबेरॉय (कैंसर रोग विशेषज्ञ, दिल्ली) से अमर उजाला की एक बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ अजीत को कोरोना रोगियों के इलाज का भी अनुभव है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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