कोरोना वायरस कहां से आया, इसको लेकर कई सारे शोध और अध्ययन सामने आ चुके हैं। आम जानकारी यही है कि यह चीन से आया। लेकिन इटली और स्पेन जैसे देशों में तो शोधकर्ता अपने अध्ययन में ये भी कह चुके हैं कि उनके यहां शुरुआती मामले चीन से नहीं आए। कोरोना वायरस को लेकर पूरी दुनिया एक बात से तो सहमत है कि इसकी शुरुआत चीन से ही हुई। इस वायरस के वुहान के लैब में तैयार किए जाने के भी आरोप लगे, लेकिन चीन ने ऐसे आरोपों से इनकार किया है। अब चीन के ही एक चिकित्सक ने उस पर सवाल उठाए हैं।
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Coronavirus: कहां से आया कोरोना वायरस, क्या चीन ने मिटाए सबूत? चीनी डॉक्टर कर रहे हैं ये दावा
Tue, 28 Jul 2020 03:53 PM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Tue, 28 Jul 2020 03:53 PM IST
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Coronavirus origin
- फोटो : Amar Ujala
प्रो. क्वॉक-युंग युन
- फोटो : Social Media
- कोरोना वायरस को लेकर चीन माइक्रोबायोलॉजिस्ट और सर्जन प्रो. क्वॉक-युंग युन (Kwok-Yung Yuen) ने कहा है कि वुहान(जिस शहर से कोरोना वायरस की शुरुआत हुई) के प्रशासन ने वायरस के फैलाव को छिपाए रखा और तमाम सबूतों को नष्ट कर दिया, ताकि सच्चाई दुनिया के सामने न आ सके।
Coronavirus
- फोटो : Pixabay
- माइक्रोबायोलॉजिस्ट प्रोफेसर क्वॉक-युंग युन वुहान में कोविड-19 की जांच में मदद करने वालों में से एक हैं। खबरों के मुताबिक, उन्होंने बताया है कि वाइल्ड लाइफ मार्केट से न सिर्फ सबूतों को मिटाया गया बल्कि क्लीनिकल फाइंडिग के रिस्पांस को भी धीमा कर दिया गया था। मालूम हो कि वुहान के इसी वेट मार्केट से वायरस के फैलने की बात कही जाती रही है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : pixabay
- प्रो. युन ने कहा कि जांचकर्ता के तौर पर जब हम हुनान मार्केट पहुंचे तो वहां कुछ भी नहीं था, क्योंकि बाजार को पहले से ही साफ किया जा चुका था। उनका कहना था कि स्थानीय प्रशासन ने इलाके को डिसइन्फेक्ट कर दिया था और ऐसे में सारे सबूत नष्ट हो चुके थे। कहा जा सकता है कि क्राइम सीन से ही छेड़छाड़ की गई थी। चूंकि मार्केट को पूरी तरह साफ कर दिया गया था, इसलिए यह पता नहीं लग पाया कि कोरोना वायरस किस जानवर के जरिए इंसानों में पहुंचा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
- प्रोफेसर क्वॉक-युंग युन ने कहा है कि प्रशासन वुहान में कुछ छिपा रहा है, जिसका शक उन्हे पहले से ही रहा। स्थानीय अधिकारियों को इस बारे में जल्दी जानकारी देनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ऐसी तमाम लापरवाहियां इशारा करती हैं कि कुछ न कुछ छिपाने का प्रयास किया गया।