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Health Risk: माइग्रेन रहता है तो हो जाइए सावधान, इससे हार्ट अटैक और इस जानलेवा रोग का भी बढ़ सकता है खतरा

Sun, 20 Aug 2023 04:59 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 20 Aug 2023 04:59 PM IST
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Migraine is associated with stroke and heart attack, know its risk factors in hindi
माइग्रेन की समस्या - फोटो : Pixabay

माइग्रेन बहुत सामान्य सी न्यूरोलॉजिकल समस्या है जिसमें सिर के एक हिस्से में तेज दर्द होने लगता है। इस दर्द के अनुभव के साथ धड़कनों में तेजी, मतली, उल्टी और ध्वनि-प्रकाश के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता का भी अनुभव हो सकता है। माइग्रेन का सिरदर्द, सामान्य सिरदर्द की तुलना में अधिक तीव्रता वाला होता है, इसपर गंभीरता से ध्यान देने की भी आवश्यकता होती है क्योंकि कुछ स्थितियों में ये साइकोसोमेटिक डिसऑर्डर के कारण होने वाली समस्या भी हो सकती है। 



शोधकर्ताओं ने पाया कि अगर आपको लंबे समय से माइग्रेन की समस्या बनी हुई है, तो इसपर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। माइग्रेन पर ध्यान न देना हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है। यही कारण है कि समय रहते इस समस्या का निदान और उपचार किया जाना चाहिए। आइए माइग्रेन के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जानते हैं।

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माइग्रेन हो सकता है खतरनाक - फोटो : istock

माइग्रेन के कारण होने वाली दिक्कतें

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दुनियाभर में, स्ट्रोक मृत्यु का दूसरा सबसे आम कारण है। भारत में सालाना 1.85 लाख से अधिक लोग स्ट्रोक के शिकार होते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि माइग्रेन से पीड़ित लोगों में स्ट्रोक होने का खतरा अधिक हो सकता है। माइग्रेन और इस्केमिक स्ट्रोक के बीच संबंधों को लेकर कई अध्ययनों में भी स्पष्ट किया गया है, क्योंकि ये दोनों रक्त वाहिकाओं की आपूर्ति से संबंधित समस्याएं हैं।

अध्ययन से पता चलता है कि माइग्रेन से मायोकार्डियल इन्फ्रक्शन, स्ट्रोक और हृदय मृत्यु का खतरा भी बढ़ सकता है। 

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ब्रेन स्ट्रोक का जोखिम - फोटो : Pixabay

हृदय रोग और स्ट्रोक का बढ़ सकता है जोखिम

एक अन्य अध्ययन से पता चलता है कि जो लोग माइग्रेन से पीड़ित हैं, उनमें हृदय संबंधी समस्याओं जैसे दिल का दौरा या हृदय गति से संबंधित विकारों जैसे एट्रियल फाइब्रिलेशन का खतरा दो गुना अधिक हो सकता है। जर्नल ऑफ न्यूरॉलजी में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि माइग्रेन का अगर समय रहते उपचार न किया जाए तो इसके कारण इस्केमिक स्ट्रोक हो सकता है जो जानलेवा दुष्प्रभावों वाला माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ऐसे लोग जो पहले से माइग्रेन की समस्या से परेशान हैं उन्हें उपचार के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों से जरूर मिलना चाहिए।

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माइग्रेन वाले रोगी ध्यान दें - फोटो : istock

माइग्रेन और इसके जोखिम

शोधकर्ताओं ने बताया कि माइग्रेन वाले किसी व्यक्ति के जीवनकाल में इस्केमिक स्ट्रोक होने का जोखिम लगभग दोगुना हो जाता है। इसके अलावा क्रोनिक माइग्रेन कुछ लोगों के जीवन की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव भी डाल सकती है। इसके अलावा जिन लोगों को अक्सर माइग्रेन की दिक्कत होती रहती है उनमें मानसिक स्वास्थ्य या नींद की समस्या का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। 

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माइग्रेन को ट्रिगर होने से बचें - फोटो : iStock

माइग्रेन को ट्रिगर होने से बचें

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, माइग्रेन का सिरदर्द कुछ स्थितियों में गंभीर और दीर्घकालिक तौर पर मस्तिष्क क्षति के खतरे बढ़ाने वाला हो सकता है। कुछ स्थितियों में इसके कारण कार्डियोवस्कुलर समस्याओं का भी जोखिम रहता है। आप माइग्रेन को प्रबंधित करने के लिए कुछ उपायों को अपनाकर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

  • यदि आपको सिरदर्द होता है तो इसको ट्रिगर करने वाली समस्याओं के बारे में जानें और उससे बचाव के लिए उपाय करते रहें। 
  • स्वस्थ आहार का सेवन करें और किसी समय भोजन न छोड़ें।
  • कैफीन की अधिकता कुछ लोगों में माइग्रेन का खतरा बढ़ा सकती है, ऐसे में इससे बचाव के लिए जरूरी है कि आप चाय-कॉफी जैसी चीजों का सेवन कम से कम करें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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