क्या आपने कभी सोचा है कि जिस पानी को आप सुरक्षित समझकर पी रहे हैं, जिस खाने को पौष्टिक मानकर खा रहे हैं और जिस हवा में सांस ले रहे हैं, उसके साथ प्लास्टिक के बेहद छोटे-छोटे कण भी हमारे शरीर में प्रवेश कर रहे हैं? मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जिस तरह से दुनियाभर में प्लास्टिक वाली चीजों का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है, इसने माइक्रोप्लास्टिक के खतरे को भी बढ़ा दिया। यह अब केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि तेजी से उभरता हुआ स्वास्थ्य का भी बड़ा मुद्दा बन चुका है।
Microplastics: कहीं आपके शरीर में भी तो नहीं जमा हो रहा है प्लास्टिक? डॉक्टर ने बताया कैसे दूर करें ये खतरा
शरीर में माइक्रोप्लास्टिक मुख्य रूप से तीन रास्तों से प्रवेश कर सकता है- भोजन, पानी और सांस के जरिए। आइए जानते हैं कि इससे क्या खतरे हो सकते हैं? और इससे कैसे छुटकारा पाया जा सकता है?
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माइक्रोप्लास्टिक हृदय की सेहत के लिए भी खतरनाक
अमर उजाला में प्रकाशित हालिया रिपोर्ट में हमने बताया था कि माइक्रोप्लास्टिक हृदय की सेहत के लिए भी बड़ा खतरा हो सकता है। वैज्ञानिकों ने हार्ट अटैक का शिकार रहे कई मरीजों के खून में बड़ी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक कण पाए हैं।
- शरीर में माइक्रोप्लास्टिक मुख्य रूप से तीन माध्यमों भोजन, पानी और सांस के जरिए प्रवेश करता है।
- सी फूड्स, बोतलबंद पानी, पैक्ड फूड, नमक और कुछ अन्य खाद्य पदार्थों में माइक्रोप्लास्टिक मिलने की रिपोर्ट भी सामने आ चुकी है।
- इसके अलावा हवा में मौजूद सूक्ष्म प्लास्टिक कण सांस के साथ शरीर में जा सकते हैं।
क्या होता है इसका स्वास्थ्य पर असर
अध्ययन बताते हैं कि माइक्रोप्लास्टिक शरीर में इंफ्लेमेशन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और कोशिकाओं पर प्रभाव डाल सकता है।
- कुछ अध्ययनों में हार्मोनल सिस्टम और प्रतिरक्षा प्रणाली पर संभावित असर की भी चर्चा की गई है।
- हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी यह स्पष्ट रूप से साबित नहीं हुआ है कि सामान्य स्तर पर माइक्रोप्लास्टिक का संपर्क किन-किन बीमारियों का प्रत्यक्ष कारण बनता है।
मोहाली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने खुलासा करते हुए बताया कि सिंगल-यूज पीईटी बोतलों से निकलने वाले नैनोप्लास्टिक इंसानी शरीर के महत्वपूर्ण जैविक तंत्रों को बाधित कर सकते हैं। ये कण आंतों में मौजूद फायदेमंद जीवाणुओं, रक्त कोशिकाओं और एपिथेलियल सेल्स के सामान्य कामकाज को कमजोर करते हैं, जिससे सेहत पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
माइक्रोप्लास्टिक के खतरे से कैसे बचें?
कैलिफोर्निया में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी कहते हैं कुछ आसान तरीके अपनाकर आप माइक्रोप्लास्टिक के खतरे को कम कर सकते हैं।
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- डिब्बाबंद चीजें, भोजन में प्लास्टिक के केमिकल मिलने का एक मुख्य जरिया है। डॉ. सेठी के अनुसार, इसे पूरी तरह से छोड़ देना चाहिए। इसकी अंदरूनी परत से बीपीए (बिस्फेनॉल A) सीधे खाने वाली चीजों में मिल जाता है। डिब्बाबंद ड्रिंक्स भी नुकसानदायक हैं।
- अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाना सिर्फ पाचन के लिहाज से ही पेट के लिए नुकसानदायक नहीं होता। ये अक्सर प्लास्टिक की पैकेजिंग में आते हैं, जिससे खाने में प्लास्टिक के केमिकल मिल जाते हैं। कॉर्न चिप्स और पैक्ड स्नैक्स इसका मुख्य स्रोत रहे हैं। डॉ. सेठी बताते हैं अल्ट्रा-प्रोसेस्ड चीजें सेहत के लिए कई तरह से खतरनाक हो सकती हैं
- खाने में माइक्रोप्लास्टिक से बचने का एक आसान तरीका यह है कि प्लास्टिक पैकेजिंग से पूरी तरह बचा जाए, यहां तक कि ताजे खाने के मामले में भी ऐसा होता है। डॉ. सेठी कहते हैं, प्लास्टिक पैकेजिंग वाली चीजों को खोलकर खाने से पहले उसमें माइक्रोप्लास्टिक वाली चीजें हो सकती हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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