मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं किसी भी उम्र, लिंग वाले व्यक्ति को प्रभावित कर सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैश्विक स्तर पर इसका जोखिम बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। हम सभी को व्यक्तिगत और अपने आसपास के लोगों के भी मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है।
बड़ी चिंता: हर दो में से एक ऑफिस वर्कर खराब मानसिक स्वास्थ्य का शिकार, महिला कर्मचारियों में जोखिम और भी अधिक
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कॉर्पोरेट कर्मचारियों में खराब मानसिक स्वास्थ्य की समस्या
मार्केट रिसर्च फर्म आईपीएसओएस द्वारा हाल ही में एक सर्वेक्षण किया गया जिसमें ऑफिस में काम करने वाले लोगों के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जानने की कोशिश की गई। इसके अनुसार हर 2 में से एक कॉर्पोरेट कर्मचारी खराब मानसिक स्वास्थ्य के उच्च जोखिम में है। सर्वेक्षण में आठ भारतीय शहरों और ई-कॉमर्स, एफएमसीजी सहित 10 क्षेत्रों के 3,000 कॉर्पोरेट कर्मचारियों को शामिल किया गया।
सर्वेक्षण से यह भी पता चला है कि पिछले वर्ष लगभग 10 में से आठ कर्मचारियों ने मानसिक थकान के कारण कम से कम दो सप्ताह के लिए काम छोड़ दिया था। 10 में से नौ कर्मचारियों को लगता है कि उनका वर्क-लाइफ बैलेंस काफी खराब हो गया है।
महिला कर्मचारियों में अधिक जोखिम
सर्वे में पता चला कि महिला कर्मचारियों में पुरुषों की तुलना में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की समस्या अधिक है। 41 प्रतिशत पुरुषों की तुलना में 56 प्रतिशत महिलाओं में किसी न किसी प्रकार की समस्या का जोखिम है। इसका मुख्य कारण यह है कि महिला कर्मचारियों को लगता है कि उन्हें अक्सर लैंगिक पूर्वाग्रह और महिलाओं के काम को लेकर रूढ़िवादी सोच का सामना करना पड़ता है।
विपरीत परिस्थितियों में काम करने को मजबूर
मनोचिकित्सकों का कहना है, कर्मचारियों में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के कई कारण हो सकते हैं। काम का दबाव, विपरीत परिस्थितियां, जॉब को लेकर अनिश्चितता और समाज में उनके काम को लेकर लोगों में तुलनात्मक भाव होना इसका प्रमुख कारण हो सकता है।
अमर उजाला से बातचीत में मनोचिकित्सक डॉ प्रवीण अस्थाना बताते हैं, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करा रहे कई रोगियों में काउंसिलिंग के दौरान पता चलता है कि भले ही उनका पारिवारिक जीवन उथल-पुथल हो, घर में कोई गंभीर बीमार हो फिर भी उन्हें मजबूरी में काम करना पड़ता है। इस तरह की विपरीत परिस्थितियों में उत्पादकता कम होना स्वाभाविक है, जिसके कारण ऑफिस में उनको लेकर और तनाव बढ़ता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अब भी लोगों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कलंक का भाव है जिसके कारण कर्मचारी एक दूसरे से अपनी समस्याओं को साझा नहीं कर पा रहे हैं। युवाओं में बढ़ रही ये समस्या काफी चिंताकारक है, क्योंकि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सीधा असर कई बीमारियों से संबंधित है। ऑफिस में सपोर्टिव माहौल बनाने की आवश्यकता है। चिंता और अवसाद से जूझ रहे कर्मचारियों को उनकी मानसिक स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए यह आवश्यक है।
सालान हेल्थ चेकअप के साथ सभी कर्मचारियों की काउंसिलिंग भी की जानी चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।