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बड़ी चिंता: हर दो में से एक ऑफिस वर्कर खराब मानसिक स्वास्थ्य का शिकार, महिला कर्मचारियों में जोखिम और भी अधिक

Sun, 25 Jun 2023 11:29 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 25 Jun 2023 11:29 AM IST
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mental health awareness, corporate employees is at a high risk of poor mental health
ऑफिस वर्कर में तनाव की समस्या - फोटो : istock

मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं किसी भी उम्र, लिंग वाले व्यक्ति को प्रभावित कर सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैश्विक स्तर पर इसका जोखिम बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। हम सभी को व्यक्तिगत और अपने आसपास के लोगों के भी मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है। 



हाल के अध्ययनों में ऑफिस वर्कर्स में यह समस्या काफी तेजी से बढ़ती देखी जा रही है। एक अध्ययन में बताया गया कि भारत में हर दो में से एक कॉर्पोरेट कर्मचारी में किसी न किसी प्रकार की मानसिक स्वास्थ्य समस्या का जोखिम हो सकता है। इसका असर लिंग आधारित भी देखा गया है।

शोध में बताया गया है कि पुरुष कर्मचारियों की तुलना में महिला कर्मियों में इसका जोखिम अधिक देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरफ सभी लोगों को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। अगर कर्मचारियों का मन ही स्वस्थ नहीं होगा तो इसका सीधा असर उनकी कार्यात्मक उत्पादकता पर हो सकता है। यह उनके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है।

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तनाव-चिंता की बढ़ रही समस्या - फोटो : Pixabay

कॉर्पोरेट कर्मचारियों में खराब मानसिक स्वास्थ्य की समस्या

मार्केट रिसर्च फर्म आईपीएसओएस द्वारा हाल ही में एक सर्वेक्षण किया गया जिसमें ऑफिस में काम करने वाले लोगों के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जानने की कोशिश की गई। इसके अनुसार हर 2 में से एक कॉर्पोरेट कर्मचारी खराब मानसिक स्वास्थ्य के उच्च जोखिम में है। सर्वेक्षण में आठ भारतीय शहरों और ई-कॉमर्स, एफएमसीजी सहित 10 क्षेत्रों के 3,000 कॉर्पोरेट कर्मचारियों को शामिल किया गया।

सर्वेक्षण से यह भी पता चला है कि पिछले वर्ष लगभग 10 में से आठ कर्मचारियों ने मानसिक थकान के कारण कम से कम दो सप्ताह के लिए काम छोड़ दिया था। 10 में से नौ कर्मचारियों को लगता है कि उनका वर्क-लाइफ बैलेंस काफी खराब हो गया है।  

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मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं - फोटो : istock

महिला कर्मचारियों में अधिक जोखिम

सर्वे में पता चला कि महिला कर्मचारियों में पुरुषों की तुलना में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की समस्या अधिक है। 41 प्रतिशत पुरुषों की तुलना में 56 प्रतिशत महिलाओं में किसी न किसी प्रकार की समस्या का जोखिम है। इसका मुख्य कारण यह है कि महिला कर्मचारियों को लगता है कि उन्हें अक्सर लैंगिक पूर्वाग्रह और महिलाओं के काम को लेकर रूढ़िवादी सोच का सामना करना पड़ता है।

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कर्मचारियों में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य की समस्या - फोटो : istock

विपरीत परिस्थितियों में काम करने को मजबूर

मनोचिकित्सकों  का कहना है, कर्मचारियों में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के कई कारण हो सकते हैं। काम का दबाव, विपरीत परिस्थितियां, जॉब को लेकर अनिश्चितता और समाज में उनके काम को लेकर लोगों में तुलनात्मक भाव होना इसका प्रमुख कारण हो सकता है।

अमर उजाला से बातचीत में मनोचिकित्सक डॉ प्रवीण अस्थाना बताते हैं, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करा रहे कई रोगियों में काउंसिलिंग के दौरान पता चलता है कि भले ही उनका पारिवारिक जीवन उथल-पुथल हो, घर में कोई गंभीर बीमार हो फिर भी उन्हें मजबूरी में काम करना पड़ता है। इस तरह की विपरीत परिस्थितियों में उत्पादकता कम होना स्वाभाविक है, जिसके कारण ऑफिस में उनको लेकर और तनाव बढ़ता है।

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मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कलंक का भाव - फोटो : Pixabay

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अब भी लोगों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कलंक का भाव है जिसके कारण कर्मचारी एक दूसरे से अपनी समस्याओं को साझा नहीं कर पा रहे हैं। युवाओं में बढ़ रही ये समस्या काफी चिंताकारक है, क्योंकि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सीधा असर कई बीमारियों से संबंधित है। ऑफिस में सपोर्टिव माहौल बनाने की आवश्यकता है। चिंता और अवसाद से जूझ रहे कर्मचारियों को उनकी मानसिक स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए यह आवश्यक है।

सालान हेल्थ चेकअप के साथ सभी कर्मचारियों की काउंसिलिंग भी की जानी चाहिए।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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