कैंसर वैश्विक स्तर पर मृत्य के प्रमुख कारणों में से एक है, हर साल लाखों लोगों की मौत अलग-अलग प्रकार के कैंसर के कारण हो जाती है। हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कैंसर से होने वाली मौत के संभावित कारणों के बारे में जानने की कोशिश की। शोधकर्ताओं ने इसके लिए जिन तीन कारणों को प्रमुख रूप से रेखांकित किया है, भारत की बड़ी आबादी में यह समस्याएं अधिक देखी जाती रही हैं।
Latest Study: कैंसर से होने वाली मौत के लिए ये कारण हैं सबसे ज्यादा जिम्मेदार, अधिकतर भारतीयों में यह समस्याएं
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कैंसर के जोखिम कारकों को जानिए
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) कहता है, एक डीएएलवाई, स्वस्थ जीवन के एक वर्ष कम होने के बराबर होती है। इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने डीएएलवाई यानि कि डिसेबिलिटी एडजेस्टेड लाइफ इयर के संदर्भ में जोखिम कारकों को समझने की कोशिश की। इस आधार पर किए गए अध्ययन के विश्लेषण में शोधकर्ताओं ने कैंसर से संबंधित डीएएलवाई के लिए पुरुषों में तंबाकू के सेवन को प्रमुख जोखिम कारक के रूप में पाया गया है।
यह साल 2019 में पुरुषों में सभी प्रकार के कैंसर डीएएलवाई का 33.9 प्रतिशत था। इसका मतलब है कि जो पुरुष किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं, उनके अधिक समय तक जीवित रहने की संभावना कम हो जाती है।
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
अमेरिका स्थित वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IHME) के निदेशक क्रिस्टोफर मरे कहते हैं, यह शोध बताता है कि कैंसर का बोझ वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है जो साल दर साल तेजी से बढ़ती जा रही है। अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि इस तरह के जोखिम को गंभीरता से लेते हुए नीति निर्माताओं को इसके रोकथाम को लेकर प्रयास करने की आवश्यकता है।
धूम्रपान कैंसर के लिए प्रमुख जोखिम कारक है, इसके अलावा शराब का सेवन और हाई बीएमआई भी गंभीर खतरे का कारण बन सकती है।
तंबाकू और शराब का सेवन बहुत नुकसानदायक
शोधकर्ताओं ने अध्ययन के विश्लेषण में पाया कि दुनियाभर में बढ़ते कैंसर के खतरे और इसके कारण होने वाली मौत के लिए तंबाकू और शराब का सेवन, असुरक्षित यौन संबंध और आहार संबंधी जोखिम तथा लोगों में बढ़ता मोटापा काफी खतरनाक है, इन सभी कारकों को नियंत्रित करना बहुत आवश्यक है।
विशेषज्ञों ने बताया कि पुरुषों और महिलाओं दोनों में इन जोखिम कारकों की पहचान की गई है। जिन कैंसर पीड़ितों में इस तरह के जोखिम कारक होते हैं, उनकी अन्य रोगियों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहने की संभावना भी कम हो जाती है।
अध्ययन का निष्कर्ष
अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने बताया कि तंबाकू-शराब के सेवन और हाई बीएमआई के कारण कैंसर रोगी 15 लाख महिलाओं की तुलना में 28 लाख पुरुषों की मौत के लिए हुई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन तीनों को नियंत्रित कर लिया जाए तो न सिर्फ कैंसर के मामलों, बल्कि इसके कारण होने वाली मौत के आंकड़ों को भी भविष्य में कम किया जा सकता है।
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स्रोत और संदर्भ
The global burden of cancer attributable to risk factors, 2010–19: a systematic analysis for the Global Burden of Disease Study 2019
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