कोरोना महामारी के साथ जिस गति से मंकीपॉक्स का संक्रमण भी दुनियाभर में तेजी से बढ़ता जा रहा है, यह निश्चित ही डराने वाला है। अध्ययनों में कोरोना की तुलना में भले ही मंकीपॉक्स को गंभीर समस्याकारक न माना जाता रहा हो, पर जिस गति से यह फैल रहा है वह विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। मंकीपॉक्स से देश में अबतक नौ लोगों को संक्रमित पाया जा चुका है जिसमें से एक की मौत हो गई है। संक्रमण के लेकर लोगों के मन में अब भी कई सारे सवाल हैं, जैसे इस संक्रमण को कितना खतरनाक माना है, किस आयु वाले लोगों में इसका खतरा अधिक होता है और क्या यह कोरोना की तरह कोई एक नई महामारी का कारण बन सकता है?
MonkeyPox: अध्ययन में दावा- ऐसे लोगों में गंभीर जटिलताओं का खतरा अधिक, 5 प्वाइंट्स में जानिए दुनियाभर का हाल
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अध्ययन में क्या पता चला?
जर्नल द लैंसेट, चाइल्ड एंड एडोलसेंट हेल्थ में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि संक्रमितों में से कुछ के मामले एसिम्टोमैटिक भी देखे जा रहे हैं, यह भी समस्याओं का कारक हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि चेचक के टीके मंकीपॉक्स संक्रमण के खिलाफ अच्छी सुरक्षा प्रदान करते हैं, इसका उपयोग प्री-एक्सपोज़र या पोस्ट-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस (बीमारी को रोकने के लिए की गई कार्रवाई) के लिए किया जा सकता है। अपने जोखिम कारकों को समझते हुए सभी लोगों को इससे बचाव के उपाय करते रहने चाहिए।
क्या कहती हैं डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक?
मंकीपॉक्स संक्रमण के बढ़ते मामलों की रोकथाम पर जोर देते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन कहती हैं, कई देशों में यह संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है, इसे शुरुआती स्तर पर ही रोकने की आवश्यकता है। हमें भविष्य में मंकीपॉक्स को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी टीकों की आवश्यकता हो सकती है। हम सिर्फ यहीं तक सीमित न रहें, भविष्य में इस तरह के कई अन्य जूनोटिक संक्रमण का भी जोखिम हो सकता है जिसको लेकर अभी से तैयार रहने की आवश्यकता है। मंकीपॉक्स से बचाव और टीकाकरण को बढ़ावा देने पर विशेष रूप से काम करने की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशानिर्देश
स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने दिशानिर्देशों में कहा कि मंकीपॉक्स आमतौर पर दो से चार सप्ताह तक रहने वाला सेल्फ-लिमिटेज संक्रमण है, यह बहुत जानलेवा नहीं है। आमतौर पर बच्चों में गंभीर मामलों का खतरा अधिक देखा जा रहा है। मंकीपॉक्स के कारण मृत्यदर 0 से 11% तक रहा है हालांकि छोटे बच्चों को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।
जिन लोगों में संक्रमण की पुष्टि होती है उन्हें तुरंत आइसोलेट करने की आवश्यकता है। जटिलताओं की निगरानी और उपचार के माध्यम से संक्रमण को ठीक किया जा सकता है।
जानिए दुनियाभर में अब तक का हाल
मंकीपॉक्स का संक्रमण दुनिया के ज्यादातर देशों को अपनी चपेट में ले चुका है। आइए कुछ प्वाइंट्स में समझते हैं कि अब तक इसकी वैश्विक स्थिति कैसी है?
- भारत में अब तक कुल 9 मामले सामने आए हैं जिसमें 4 मामले दिल्ली और शेष पांच केरल से हैं।
- देश में A.2 स्ट्रेन का पता चला है जो पिछले साल अमेरिका में देखा गया था। वैज्ञानिक इसे ज्यादा खतरनाक नहीं मान रहे हैं।
- डब्ल्यूएचओ ने हाल ही में मंकीपॉक्स के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है।
- दुनिया के 87 से अधिक देशों से संक्रमण के 28 हजार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं।
- अमेरिका की बाइडेन सरकार ने देश में बढ़ते खतरे को देखते हुए पब्लिक हेल्थ एमरजेंसी घोषित कर दिया है।
- अमेरिका ने मंकीपॉक्स वैक्सीन इंजेक्शन की आपूर्ति को बढ़ावा देने के लिए वैकल्पिक इंजेक्शन को प्रस्तावित किया है।
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स्रोत और संदर्भ
The monkeypox outbreak: risks to children and pregnant women
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