Medically Reviewed by
डॉ रविंदर गेरा,
ईएनटी और हेड एंड नेक सर्जरी विभाग , निदेशक
मैक्स हेल्थकेयर, गुरुग्राम
डिग्री- एमबीबीएस, एम.एस, डीएनबी
अनुभव- 20 वर्ष
हाल ही के दिनों में म्यूकोर्मिकोसिस नामक एक दुर्लभ लेकिन घातक फंगल संक्रमण के बारे में लगातार चर्चा हो रही है जिसे बोलचाल की भाषा में "ब्लैक फंगस" कहा जाता है। यह त्वचा पर प्रकट होता है और फेफड़ों और मस्तिष्क को भी प्रभावित करता है। कोविड -19 रोगियों का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने मौजूदा कोरोनावायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में इस नई जटिलता के आने के संभावित जोखिमों की ओर ध्यान केंद्रित किया है। कोविड -19 के लिए नेशनल टास्क फोर्स ने इस संक्रमण के बारे में सामने आए सबूतों के आधार पर एक एडवाइजरी जारी की है। जैसे-जैसे संक्रमण पूरे देश में फैल रहा है, इससे कितना खतरा होने की आशंका है? क्या इसका कोविड से संबंध है? यह कितना फैल सकता है? इससे जुड़ी सच्चाई क्या है? अगली स्लाइड्स में इन सारे सवालों का जवाब दे रहे हैं विशेषज्ञ।
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फंगस के संपर्क में आने का काफी जोखिम होता है
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म्यूकोर्मिकोसिस क्या है?
म्यूकोर्मिकोसिस एक आम फंगस है, जो ज्यादातर मिट्टी और सड़ रही वनस्पति में मौजूद होता है, लेकिन शायद ही कभी मनुष्यों को प्रभावित करता है। हम सभी को अपने दिन-प्रतिदिन के कार्यों के दौरान इस फंगस के संपर्क में आने का काफी जोखिम होता है, लेकिन हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली इसके संक्रमण को रोकने में बेहद प्रभावी है। हालांकि, अनियंत्रित मधुमेह और इम्यूनोसप्रेशन दो सबसे सामान्य स्थितियां हैं जिसमें रोगियों को यह संक्रमण होता है।
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मृत्यु दर लगभग 50% है
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इसका प्रकोप अभी क्यों हो रहा है?
अनियंत्रित मधुमेह और इम्यूनोसप्रेशन दो ऐसी स्थितियां हैं जिसमें रोगियों को यह संक्रमण होता है। चूंकि इसकी मृत्यु दर लगभग 50% है, इसलिए इस संक्रमण को लेकर डर होना स्वाभाविक है और यह कोविड– 19 से होने वाली मौतों को कई गुना बढ़ा सकता है। ऐसा लगता है कि भारत एकमात्र ऐसा देश है, जहां कोविड- 19 महामारी में इन मामलों में भारी वृद्धि देखी जा रही है। इस घातक संक्रमण का कोई निश्चित कारण नहीं है, लेकिन इसका संबंध रोगी की स्वास्थ्य स्थितियों (मधुमेह, स्टेरॉयड का उपयोग) और वायरस की उग्रता (रोगी की प्रतिरक्षा को दबाना और कम लिम्फोसाइट काउंट) से हो सकता है।
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उन्हें स्टेरॉयड दिया गया था
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इसका कोविड-19 से क्या संबंध है?
पश्चिमी वैज्ञानिक साहित्य में, कोविड- 19 का म्यूकोर्मिकोसिस से संबंध का जिक्र किया गया है और टोर्नेडो (तूफान) या सुनामी के बाद केवल क्लस्टर मामलों (50 से कम) की सूचना मिली है। हाल में हो रहे इसके मामले हमारी स्वास्थ्य प्रणाली और स्वच्छता की स्थिति में कमी को दर्शाती है। म्यूकोर्मिकोसिस के अधिकांश मामले एक सामान्य स्थिति में ही देखे जा रहे हैं - सभी रोगियों को कोविड– 19 था, उन्हें स्टेरॉयड दिया गया था, और इलाज के दौरान उनका मधुमेह या शुगर अनियंत्रित था। उनका लिम्फोसाइट काउंट कम था जिससे पता चलता है कि उनमें प्रतिरक्षा का स्तर कम था। स्टेरॉयड या तो बहुत जल्दी, बहुत अधिक या बहुत लंबे समय तक दिए जाने से रक्त शर्करा और प्रतिरक्षा पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है, जिसके कारण आगे चलकर म्यूकोर्मिकोसिस हो सकता है।
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फेफड़ों, त्वचा और मस्तिष्क में आश्चर्यजनक रूप से फैल सकता है
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आप इसके लक्षणों को कैसे पहचानेंगे?
इसके शुरुआती लक्षणों में आंखों में सूजन, जबड़े या दांतों में दर्द, नाक से खून निकलना, गंभीर सिरदर्द या नजर में परिवर्तन‚ जैसे– दोहरा दिखाई देना या अचानक अंधापन आदि शामिल हैं। ये लक्षण इस बीमारी की शीघ्र पहचान और शीघ्र उपचार में सहायता कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि म्यूकोर्मिकोसिस रक्त वाहिकाओं के माध्यम से फैलता है और अगर इसकी जल्दी पहचान नहीं की जाती है तो यह फेफड़ों, त्वचा और मस्तिष्क में आश्चर्यजनक रूप से फैल सकता है। ईएनटी विशेषज्ञ, नेत्र विशेषज्ञ और एमआरआई इमेजिंग द्वारा जांच से इसकी पुष्टि होती है।