कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग में दुनियाभर के देश कई सारे उपाय अपना रहे हैं। इससे बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग को शुरुआत से ही मजबूत हथियार बताया जाता रहा है। लॉकडाउन नहीं होने की स्थिति में संक्रमण के मामले और ज्यादा होते। लेकिन लॉकडाउन स्थाई उपाय नहीं है, इसलिए भारत समेत कई देशों में अब पाबंदिया हटाई जा रही हैं। कम होती पाबंदियों के बीच परिवार के सदस्य एक-दूसरे से मिलते हैं तो संक्रमण के मामले कम हो सकते हैं, ऐसा कहना है शोधकर्ताओं का। इस मॉडल को 'सोशल बबल' मॉडल कहा जा रहा है, जो कि पहले न्यूजीलैंड में अपनाया गया और अब ब्रिटेन में भी अपनाया जाएगा। आइए, जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।
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कोरोना वायरस: क्या है न्यूजीलैंड का 'सोशल बबल' मॉडल, फिजिकल डिस्टेंसिंग से कितना अलग और क्यों है जरूरी?
Tue, 09 Jun 2020 11:49 AM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Tue, 09 Jun 2020 11:49 AM IST
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'सोशल बबल' मॉडल (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay/Amar Ujala
'सोशल बबल' मॉडल (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
'सोशल बबल' मॉडल की खूब चर्चा
- कोरोना संक्रमण से मुक्त होने के बाद दुनियाभर में न्यूजीलैंड के 'सोशल बबल' मॉडल की खूब चर्चा हो रही है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी न्यूजीलैंड में अपनाए गए इस मॉडल को लागू करने की बात कही है। ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने सोशल बबल मॉडल पर रिसर्च के बाद कहा है कि इस मॉडल को अपनाने से संक्रमण के मामले कम हो सकते हैं।
संक्रमण रोकने को जरूरी है ठोस रणनीति
- फोटो : PTI
क्या है सोशल बबल मॉडल?
- घरवाले, परिवार के सदस्य, दोस्त वगैरह जो अक्सर एक-दूसरे से मिलते रहते हैं, उनके समूह को ही सोशल बबल कहा जा रहा है। लॉकडाउन के दौरान भी इन्हें मिलने की अनुमति हो, जैसा कि न्यूजीलैंड में हुआ। न्यूजीलैंड में इस मॉडल का प्रयोग सफल रहा है। हालांकि मिलने के दौरान दूरी बरकरार रखना भी जरूरी है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च कहती है कि अगर लोग छोटे-छोटे ग्रुप में एक-दूसरे से मिलें तो वायरस संक्रमण पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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कोरोना वायरस का संक्रमण काल
- फोटो : PTI
न्यूजीलैंड में मजबूत रणनीति
- भारत, ब्रिटेन, अमेरिका जैसे देशों की तुलना में न्यूजीलैंड की आबादी 50 लाख से भी कम है। यहां पर फरवरी के अंतिम सप्ताह में कोरोना के मामले सामने आए और सरकार ने तैयारी शुरू कर दी। चिकित्सा विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के साथ चार सूत्रीय कार्यक्रम तैयार किया गया, जिसमें 43 बिंदु शामिल थे। सोशल बबल इन्हीं 43 बिंदुओं में से एक था। न्यूजीलैंड में सात हफ्ते का सख्त लॉकडाउन रहा। इस बीच 1154 मामले सामने आए और महज 22 लोगों की मौत हुई। अब देश कोरोना मुक्त है।
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दुनिया में कोरोना वायरस (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : PTI
सोशल डिस्टेंसिंग और सोशल बबल में अंतर
- ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक, सोशल बबल और सोशल डिस्टेंसिंग में अंतर हैं। सोशल डिस्टेंसिंग में लोगों को भीड़ या समूह में रहने की अनुमति नहीं होती ताकि एक-दूसरे के संपर्क में न आएं, जबकि सोशल बबल में घर में ही सदस्यों को, दोस्तों को या जॉबमेट को मिलने-जुलने की इजाजत रहती है। हालांकि बात करते वक्त पर्याप्त दूरी रखना जरूरी होता है।