कोरोना की बढ़ती रफ्तार से परेशान लोगों के लिए सोमवार (17 मई) का दिन खुशियों की सौगात लेकर आया है। रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा तैयार की गई दवा 2डीजी अब लोगों के लिए उपलब्ध हो गई है। कोरोना से मुकाबले के लिए स्वास्थ्य संगठन इस दवा को बड़ी कामयाबी के तौर पर देख रहे हैं। इस दवा को इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (आईएनएमएएस) ने हैदराबाद के डॉक्टर रेड्डी लेबोरेटरी के साथ मिलकर विकसित किया है। पाउडर के रूप में उपलब्ध इस दवा को लेकर दावा किया जा रहा है कि यह रोगियों में ऑक्सीजन की कमी को दूर करने और संक्रमितों की जान बचाने में बेहद कारगर साबित हो सकती है।
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कोविड से जंग: 2डीजी के अलावा इन दवाओं को भी विशेषज्ञ मानते हैं कोरोना में असरदार, यहां जानें सबकुछ
Tue, 18 May 2021 08:48 PM IST
Abhilash Srivastava
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Abhilash Srivastava
Updated Tue, 18 May 2021 08:48 PM IST
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एंटी कोविड दवाएं (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Social Media
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार दवा
- फोटो : Pixabay
मैसूर स्थित फर्म द्वारा विकसित दवा
मैसूर की एक कंपनी ने कोरोना वायरस से मुकाबले के लिए दवाओं का एक नया सेट विकसित किया है। इन दवाओं को मौखिक रूप से दिया जा सकता है। डीआरएम इनोवेशन कंपनी के एमडी डॉ मंजूनाथ बी एच के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक टीम ने इस दवा को विकसित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे के वैज्ञानिकों ने अध्ययन की पुष्टि में बताया है कि यह दवा सेल-आधारित सिस्टम में वायरस को मारने में बेहद असरदार साबित हो सकती है। फिलहाल इसके इस्तेमाल को मंजूरी नहीं मिली है।
मैसूर की एक कंपनी ने कोरोना वायरस से मुकाबले के लिए दवाओं का एक नया सेट विकसित किया है। इन दवाओं को मौखिक रूप से दिया जा सकता है। डीआरएम इनोवेशन कंपनी के एमडी डॉ मंजूनाथ बी एच के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक टीम ने इस दवा को विकसित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे के वैज्ञानिकों ने अध्ययन की पुष्टि में बताया है कि यह दवा सेल-आधारित सिस्टम में वायरस को मारने में बेहद असरदार साबित हो सकती है। फिलहाल इसके इस्तेमाल को मंजूरी नहीं मिली है।
ग्लूकोकॉर्टिकोइड्स, अस्थमा रोगियों को दी जाती रही है
- फोटो : iStock
अस्थमा में दी जाने वाली दवा
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार अस्थमा जैसे सांस के रोगियों के इलाज के लिए दी जाने वाली दवा ग्लूकोकॉर्टिकोइड्स, कोविड-19 के रोगियों को तेजी से ठीक करने में सहायक हो सकती है। इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया है कि जो लोग इस दवा के पहले से सेवन कर रहे हैं उनमें कोविड का प्रभाव भी कम देखा जा रहा है।
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार अस्थमा जैसे सांस के रोगियों के इलाज के लिए दी जाने वाली दवा ग्लूकोकॉर्टिकोइड्स, कोविड-19 के रोगियों को तेजी से ठीक करने में सहायक हो सकती है। इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया है कि जो लोग इस दवा के पहले से सेवन कर रहे हैं उनमें कोविड का प्रभाव भी कम देखा जा रहा है।
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आइवरमेक्टीन को विशेषज्ञ मान रहे हैं बेहद कारगर
- फोटो : Social media
आइवरमेक्टीन को लेकर जारी है उठा-पटक
फ्रंट लाइन कोविड-19 क्रिटिकल केयर अलायंस (एफएलसीसीसी) के नेतृत्व में एक अध्ययन की समीक्षा के दौरान वैज्ञानिकों ने 'आइवरमेक्टिन' नामक दवा को कोविड-19 संक्रमण के खिलाफ बेहद प्रभावी बताया था। इतना ही नहीं इसी आधार पर गोवा सरकार ने राज्य में इस दवा के इस्तेमाल को मंजूरी भी दे दी थी। हालांकि बाद में 'आइवरमेक्टिन' के सामान्य उपयोग को लेकर डब्ल्यूएचओ ने अलर्ट जारी कर दिया। डब्ल्यूएचओ द्वारा कहा गया कि क्लिनिकल ट्रायल के अलावा आइवरमेक्टीन को फिलहाल सामान्य रूप के कोविड के मरीजों के लिए प्रयोग में लाना सही नहीं है।
फ्रंट लाइन कोविड-19 क्रिटिकल केयर अलायंस (एफएलसीसीसी) के नेतृत्व में एक अध्ययन की समीक्षा के दौरान वैज्ञानिकों ने 'आइवरमेक्टिन' नामक दवा को कोविड-19 संक्रमण के खिलाफ बेहद प्रभावी बताया था। इतना ही नहीं इसी आधार पर गोवा सरकार ने राज्य में इस दवा के इस्तेमाल को मंजूरी भी दे दी थी। हालांकि बाद में 'आइवरमेक्टिन' के सामान्य उपयोग को लेकर डब्ल्यूएचओ ने अलर्ट जारी कर दिया। डब्ल्यूएचओ द्वारा कहा गया कि क्लिनिकल ट्रायल के अलावा आइवरमेक्टीन को फिलहाल सामान्य रूप के कोविड के मरीजों के लिए प्रयोग में लाना सही नहीं है।
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रेमेडिसविर की बढ़ी मांग
- फोटो : iStock
रेमेडिसविर को माना जाता रहा है कोरोना में असरदार
रेमेडिसविर, गिलियड (यूएस) द्वारा निर्मित एक पेटेंट एंटीवायरल दवा है, जिसे शुरू में वायरल हेपेटाइटिस और रेस्पोरेटरी सिंक्रोटीलियल वायरस (आरएसवी) के इलाज के लिए प्रयोग में लाया जाता था। कोरोना के मामले में शुरुआती दौर में देखा गया कि इससे लोगों को लाभ मिल रहा है, इसी वजह से यूएस एफडीए ने इस दवा को कोविड-19 के इलाज के लिए मंजूरी दे दी।
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स्रोत: यह लेख एंटी-कोविड दवाओं को लेकर किए गए तमाम अध्ययन और मीडिया रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण नोट: यह लेख फ्रंट लाइन कोविड-19 क्रिटिकल केयर अलायंस (एफएलसीसीसी) के नेतृत्व में की गई समीक्षा के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। अमर उजाला राउटर्स के इस अध्ययन और दवा को लेकर कोई दावा नहीं करता है। बिना डॉक्टरी सलाह के दवा के इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है।
रेमेडिसविर, गिलियड (यूएस) द्वारा निर्मित एक पेटेंट एंटीवायरल दवा है, जिसे शुरू में वायरल हेपेटाइटिस और रेस्पोरेटरी सिंक्रोटीलियल वायरस (आरएसवी) के इलाज के लिए प्रयोग में लाया जाता था। कोरोना के मामले में शुरुआती दौर में देखा गया कि इससे लोगों को लाभ मिल रहा है, इसी वजह से यूएस एफडीए ने इस दवा को कोविड-19 के इलाज के लिए मंजूरी दे दी।
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स्रोत: यह लेख एंटी-कोविड दवाओं को लेकर किए गए तमाम अध्ययन और मीडिया रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण नोट: यह लेख फ्रंट लाइन कोविड-19 क्रिटिकल केयर अलायंस (एफएलसीसीसी) के नेतृत्व में की गई समीक्षा के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। अमर उजाला राउटर्स के इस अध्ययन और दवा को लेकर कोई दावा नहीं करता है। बिना डॉक्टरी सलाह के दवा के इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है।