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बड़ी कामयाबी: मलेरिया का इलाज होगा बेहद आसान, JNU शोधकर्ताओं ने बनाई ऐसी कैंडी जो आसानी से कर देगी बीमारी को ठीक

Fri, 24 Jun 2022 06:28 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 24 Jun 2022 06:28 PM IST
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JNU researchers develop erythritol potent candies to stop malaria among children
कैंडीज से मलेरिया का होगा इलाज - फोटो : istock

मानसून अपने साथ कई तरह की बीमारियां लेकर आता है। वातावरण में नमी के कारण वायरस और बैक्टीरिया को पनपने के लिए यह सबसे उपयुक्त परिस्थियां हो जाती है, जिसके कारण बरसात के मौसम में कई तरह की बीमारियां बढ़ जाती है। बरसात का समय मच्छरों के प्रजनन के लिए भी काफी अनुकूल होता है, जिसके कारण डेंगू, मलेरिया और मच्छरों के कारण होने वाली कई तरह की बीमारियां बढ़ जाती हैं।



विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दक्षिण-पूर्व एशिया डेटा के मुताबिक इस क्षेत्र में सामने आने वाले मलेरिया के कुल मामलो में से 83 फीसदी केस अकेले भारत से ही रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। 

संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छरों के काटने से मलेरिया की बीमारी होती है। बच्चों में इसकी गंभीर स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। आमतौर पर इसके इलाज के लिए करीब दो सप्ताह तक की दवाइयां चलती हैं। हालांकि अब यह उपचार काफी आसान हो सकता है। जेएनयू के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी कैंडी/टॉफी का निर्माण किया है जो मलेरिया को ठीक करने में काफी मदद कर सकती है। विशेषकर बच्चों में मलेरिया के उपचार की दिशा में इसे बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। आइए इस बारे में आगे विस्तार से जानते हैं।   

JNU researchers develop erythritol potent candies to stop malaria among children
मलेरिया का इलाज होगा आसान - फोटो : istock

मलेरिया से बचाएगी कैंडी

मलेरिया के उपचार के लिए प्रभावी दवाओं की खोज कर रहे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के शोधकर्ताओं की टीम ने एक अनोखी कैंडी विकसित की है।दावा किया जा रहा है कि यह मलेरिया के रोगियों पर उसी तरह से काम करेगी जिस तरह से अब तक इसके उपचार के लिए एंटीबायोटिक दवाओं को प्रयोग में लाया जाता रहा है। इस कैंडी को मलेरिया से पीड़ित बच्चों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है क्योंकि बच्चों के लिए लंबे समय तक दवा खाते रहना काफी कठिन होता है। 

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बच्चों में मलेरिया का असर - फोटो : iStock

पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कारगर

शोधकर्ताओं की टीम ने इस कैंडी के बारे में बताया कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों को यह कैंडी दी जा सकती है। वैज्ञानिकों ने इस कैंडी के लिए एरिथ्रिटोल का इस्तेमाल किया। एरिथ्रिटोल को आमतौर पर स्वीटनर के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है। शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि यह एक शक्तिशाली एंटीमलेरियल भी हो सकता है। मेडिकल की भाषा में समझें तो एरिथ्रिटोल शुगर-अल्कोहल एक प्रकार का कार्बनिक यौगिक है जिसका उपयोग खाद्य पदार्थों को मीठा बनाने के लिए किया जाता रहा है। 

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मलेरिया परजीवी को रोक सकेगी कैंडी - फोटो : pixabay

मलेरिया परजीवी को कर देगी बेअसर

प्रीप्रिंट BioXRiv में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, एरिथ्रिटोल, मलेरिया परजीवी के विकास को रोक सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर हमारे अध्ययन को नियामकों से हरी झंडी मिलती है तो यह मलेरिया के प्रसार और इसके कारण हर साल होने वाली बड़ी संख्या में मौत को कम करने में विशेष भूमिका निभा सकती है। फिलहाल अध्ययन प्रीप्रिंट है और इसका रिव्यू किया जा रहा है। 

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मलेरिया का इलाज हो सकेगा आसान - फोटो : पिक्साबे

क्या कहती हैं शोधकर्ता?

जेएनयू के स्पेशल सेंटर फॉर मॉलिक्यूलर मेडिसिन की प्रोफेसर शैलजा सिंह ने अपने नए निष्कर्षों के बारे में बताया, जिन बच्चों को मलेरिया हो जाता है उन्हें लंबे समय तक इलाज की आवश्यकता होती है। इतने दिनों तक बच्चों के लिए दवाइयां खाना कठिन होता रहा है, इसी को ध्यान में रखते हुए ये कैंडीज तैयार की गई है। हमने शोध में पाया कि अगर मलेरिया से पीड़ित बच्चों में इन कैंडीज के साथ आर्टीमिसिनिन थेरेपी को प्रयोग में लाया जाए तो इसके तेज और बेहतर परिणाम हो सकते हैं।



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स्रोत और संदर्भ

Erythritol’, a safe natural sweetener exhibits multi-stage anti-malarial activity by blocking Plasmodium falciparum membrane transporter ‘aquaporin

अस्वीकरण:
 अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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