आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद की समस्या एक आम शिकायत बन गई है। अक्सर लोग रात में बार-बार जागने की समस्या से परेशान रहते हैं। नींद न केवल हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, बल्कि यह हमारी प्रोडक्टिविटी और मूड को भी प्रभावित करती है। अगर आपकी भी नींद रात में बार-बार टूटती है, तो यह स्थिति न केवल थकावट और चिड़चिड़ापन पैदा करती है, बल्कि अगर यह लगातार बनी रहे तो कई स्वास्थ्य समस्याओं को भी जन्म दे सकती है।
Sleeping Problem: रात में बार-बार खुल जाती है आपकी भी नींद, जानिए क्या है कारण और उपाय?
अक्सर लोग रात के समय में नींद खुलने की समस्या से परेशान रहते हैं। बहुत से लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन ये आपके सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। आइए इसे लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
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नींद न आने पर क्या करें?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर नींद न आ रही हो, तो बिस्तर पर लेटे रहने के बजाय उठकर कुछ हल्की गतिविधियां करें। आप कोई किताब पढ़ सकते हैं, पहेली (पजल) सॉल्व कर सकते हैं, या ऑडियो बुक सुन सकते हैं। ये गतिविधियां दिमाग को शांत करने में मदद करती हैं। हालांकि, इन गतिविधियों के दौरान तेज रोशनी या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल करने से बचें।
रात में खाने से बचें
रात में देर से या भारी भोजन करने से नींद पर बुरा असर पड़ता है। डिनर और सोने के समय के बीच कम से कम 2-3 घंटे का अंतर होना चाहिए। हल्का और पौष्टिक भोजन नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है। कैफीन और शराब जैसे पदार्थों से भी बचना चाहिए, क्योंकि ये नींद को बाधित करते हैं।
मोबाइल फोन से दूरी बनाएं
बिस्तर पर जाने के बाद मोबाइल फोन का उपयोग करना नींद की सबसे बड़ी दुश्मन है। सोशल मीडिया, ईमेल या मैसेज चेक करने की आदत नींद को प्रभावित करती है। सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल फोन का उपयोग बंद कर देना चाहिए। अगर जरूरी हो, तो फोन को बेडरूम से बाहर रखें।
व्यायाम स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है, लेकिन इसका समय नींद पर असर डाल सकता है। देर शाम या रात में भारी वर्कआउट करने से शरीर उत्तेजित रहता है, जिससे नींद आने में दिक्कत होती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, वर्कआउट सुबह या दोपहर में करना चाहिए। अगर शाम को व्यायाम करना हो, तो हल्का व्यायाम करें।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।