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चिंता: जिस बीमारी को 2025 तक खत्म करने का था लक्ष्य उसके बढ़ रहे हैं मरीज, ऐसे लक्षण हैं तो हो जाएं सावधान

Wed, 30 Oct 2024 12:43 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Wed, 30 Oct 2024 12:43 PM IST
सार

भारत साल 2025 तक तपेदिक या ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) रोग के उन्मूलन के लक्ष्य पर भी काम कर रहा है, हालांकि ये राह इतनी आसान नजर नहीं आ रही है। इसके मरीज हर साल बढ़ रहे हैं। हालिया आंकड़े और भी परेशान करने वाले हैं।

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India reported 25.5 lakh cases of tuberculosis in 2023 know tb symptoms complications in hindi
टीबी के बढ़ते मरीज - फोटो : amarujala.com

निर्धारित लक्ष्य पर गंभीरता से काम करके और लोगों में जागरूकता बढ़ाकर पिछले दो दशकों में भारत ने कई गंभीर बीमारियों पर विजय पाई है। पोलियो पर भारत की विजय ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। इसी क्रम में भारत साल 2025 तक तपेदिक या ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) रोग के उन्मूलन के लक्ष्य पर भी काम कर रहा है, हालांकि ये राह इतनी आसान नजर नहीं आ रही है।



फेफड़ों में होने वाले इस गंभीर संक्रमण से हर साल दुनियाभर में लाखों लोग प्रभावित होते हैं, भारत के लिए भी ये बीमारी चिंता का कारण बनी हुई है। भारत से टीबी को अगले साल तक खत्म करने का लक्ष्य रखा गया था हालांकि इसके मरीज हर साल बढ़ रहे हैं।

आंकड़ों के मुताबिक साल 2023 में भारत में 25.37 लाख टीबी के मामले दर्ज किए गए। इससे पहले 2022 में करीब 24.22 लाख लोगों में इस बीमारी का पता चला था। ज्यादातर मामले सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों द्वारा रिपोर्ट किए गए, निजी क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में मामलों को निदान किया जा रहा है। इतना ही नहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हो सकते हैं जिन्हें ये बीमारी तो है पर उनका निदान नहीं किया गया है जिससे संक्रमण के और भी बढ़ने का खतरा रहता है।

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ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) रोग - फोटो : Freepik.com

दुनियाभर में बढ़ रहे हैं टीबी के मामले

टीबी के मरीज दुनियाभर में देखे जा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक रिपोर्ट में बताया कि साल 2023 में दुनियाभर में 8 मिलियन (80 लाख) से अधिक लोगों में तपेदिक का पता चला है। यह संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा 1995 में ट्रैक रखना शुरू करने के बाद से दर्ज किए गए मामलों की सबसे अधिक संख्या है। इससे पहले 2022 में डब्ल्यूएचओ ने टीबी के 7.5 मिलियन (75 लाख) मामले दर्ज किए। पिछले साल लगभग 1.25 मिलियन (12.5 लाख) लोगों की टीबी से मृत्यु भी हुई है।

डब्ल्यूएचओ ने कहा कि टीबी के ज्यादातर मामले दक्षिण पूर्व एशिया, अफ्रीका और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र के लोगों में देखे जा रहे हैं। 

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डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस - फोटो : ANI

डब्ल्यूएचओ ने जताई चिंता

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्येयियस ने एक बयान में कहा, टीबी अभी भी इतने लोगों को बीमार कर रहा है और लाखों लोगों की मौत हो रही है, ये निश्चित ही चिंताजनक है। हमारे पास इसे रोकने, इसका पता लगाने और इलाज करने के उपकरण हैं फिर भी ये बीमारी लगातार बढ़ रही है, जो वास्तव में परेशान करने वाली स्थिति है।

टीबी से संबंधित मौतों की संख्या में मामूली गिरावट जरूर आई है। साल 2022 में 1.32 मिलियन (13.2 लाख) मौतों से घटकर साल 2023 में यह 1.25 (12.5 लाख) रह गई है, लेकिन नए संक्रमितों की संख्या बढ़ना गंभीर विषय है। 

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भारत में टीबी के मरीज - फोटो : Freepik.com

वैश्विक टीबी के लगभग 25% मामले भारत से

भारत की बात करें तो यहां सामने आने वाले मामले अब भी वैश्विक टीबी का लगभग 25% हिस्सा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में गंभीर व्यावसायिक जोखिमों को रेखांकित करते हुए एक अध्ययन में पाया गया कि भारत में सामान्य आबादी की तुलना में स्वास्थ्य कर्मियों के बीच टीबी के मामले बहुत अधिक हैं।

साल 2004 से 2023 के बीच किए गए 10 अलग-अलग अध्ययनों के विश्लेषण से पता चला है कि भारत में प्रति एक लाख स्वास्थ्य कर्मियों पर औसतन 2,391.6 मामले हैं। टीबी कई तरह से स्वास्थ्य के लिए गंभीर माना जाता है जिससे बचाव के उपाय करते रहना बहुत जरूरी है।

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फेफड़ों में संक्रमण की समस्या - फोटो : Freepik.com

टीबी संक्रमण के बारे में जानिए

टीबी, माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया के कारण होने वाला संक्रामक रोग है। ये मुख्यरूप से वायुजनित ड्रॉपलेट्स के माध्यम से फैलता है। टीबी रोग वाले लोगों की खांसी या छींक से निकलने वाले बूंदों के माध्यम से आसपास के अन्य लोगों में संक्रमण का खतरा हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दो सप्ताह से अधिक समय तक अगर खांसी की दिक्कत बनी रहती है और कफ या खून आता है, सीने में दर्द, कमजोरी या थकान की समस्या रहती है तो ये टीबी का संकेत हो सकता है। इसके अलावा कुछ लोगों में टीबी के कारण वजन कम होने, भूख कम लगने, ठंड लगने, बुखार और रात में पसीना आना की भी दिक्कत हो सकती है। अगर आपमें भी इस तरह के लक्षण हैं तो तुरंत इसकी जांच कराएं। टीबी रोग का समय पर इलाज होने से इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।



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स्रोत और संदर्भ
Eradicating TB by 2025


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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