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कोरोना से जंग: एफडीए ने ऐसे लोगों को दी तीसरे डोज की मंजूरी, जानिए क्या आपको भी है बूस्टर शॉट की जरूरत?

Tue, 17 Aug 2021 11:48 AM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Tue, 17 Aug 2021 11:48 AM IST
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immunocompromised booster covid vaccine, who is immunocompromised for booster dose
वैक्सीन के बूस्टर डोज की जरूरत (सांकेतिक) - फोटो : PTI

दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के एक बार फिर से तेजी से बढ़ते मामले स्वास्थ्य संगठनों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। इससे बड़ी चिंता यह है कि कोरोना के नए वैरिएंट्स अधिक संक्रामक और शरीर की प्रतिरक्षा को आसानी से चकमा देने वाले बताए जा रहे हैं। इन सबके बीच कुछ अध्ययनों में दावा किया जा रहा है कि वैक्सीनेशन से बनी एंटीबॉडीज कुछ महीनों में कम हो जा रही हैं, ऐसे में लोगों को नए वैरिएंट्स से सुरक्षित रहने के लिए बूस्टर डोज की आवश्यकता हो सकती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हाल ही में यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड लोगों के लिए फाइजर/ बायोएनटेक या मॉडर्ना के टीकों की तीसरी खुराक लेने को मंजूरी दे दी है।


एफडीए का कहना है कि जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर हो या जिनमें ऐसी स्थितियों का निदान किया जाए जिन्हें इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज के बराबर स्तर माना जाता है, ऐसे लोग तीसरी डोज ले सकते हैं। गौरतलब है भारत में भी बूस्टर डोज को लेकर कुछ समय में चर्चा चल रही है। हाल ही में एक बयान में कोविशील्ड वैक्सीन की निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर सायरस पूनावाला ने भी लोगों को तीसरी डोज देने की जरूरत का जिक्र किया था।

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वैक्सीन की तीसरी डोज है बूस्टर शॉट - फोटो : पीटीआई

क्या है यह बूस्टर शॉट?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोविड की ज्यादातर वैक्सीन दो शॉट पर आधारित हैं। कोरोना के नए और अपेक्षाकृत अधिक संक्रामक वैरिएंट्स को देखते हुए लोगों को तीसरी खुराक के रूप में वैक्सीन की बूस्टर डोज देने की आवश्यकता महसूस हो रही है। माना जा रहा है कि बूस्टर शॉट वायरस के खिलाफ बेहतर सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। बूस्टर शॉट में क्या लोगों को वही वैक्सीन देनी चाहिए जिसकी वह पहले दो डोज ले चुके हैं, या किसी अन्य कंपनी का टीका शरीर की प्रतिरक्षा को अधिक मजबूती दे सकता है? इस बारे में जानने के लिए फिलहाल अध्ययन किया जा रहा है।

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कमजोर इम्यूनिटी वालों के लिए जरूरी है बूस्टर डोज - फोटो : Pixabay

इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड लोगों के लिए क्यों जरूरी माना जा रहा है तीसरा शॉट?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में कोरोना संक्रमण होने का अधिक खतरा होने के साथ गंभीर बीमारी और उसके कारण मृत्यु का जोखिम भी अधिक होता है। ऐसे लोग पूरी तरह से टीकाकरण के बाद भी संक्रमण के शिकार हो सकते हैं। चूंकि कुछ अध्ययनों में कहा जा रहा है कि वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा भी कुछ महीनों में कम हो जाती है, ऐसी स्थिति में इन लोगों के लिए तीसरा डोज बेहद आवश्यक हो गया है।
रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के निदेशक रोशेल वालेंस्की के अनुसार, “चूंकि दुनियाभर में डेल्टा वैरिएंट्स तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए वैक्सीन की एक अतिरिक्त खुराक, गंभीर संक्रमण से सुरक्षा देने में सहायक हो सकती है।

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इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड लोगों के लिए जरूरी है तीसरी खुराक - फोटो : Social media

इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड किन्हें माना जाता है?
सीडीसी के मुताबिक कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों के आधार पर इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड लोगों का निदान किया जाता है। ऐसे लोगों को कोरोना वैक्सीन की तीसरी खुराक लेना जरूरी है।

  • ट्यूमर और ब्लड कैंसर का इलाज करवा रहे लोग।
  • एचआईवी संक्रमण के शिकार।
  • जिन लोगों का अंग प्रत्यारोपण हुआ है।
  • जिन लोगों का स्टेम सेल ट्रांसप्लांट हुआ और वे इम्यूनोसप्रेसेन्ट दवाएं ले रहे हैं।
  • जिन लोगों को किसी रोग के उपचार के तौर पर हाई डोज वाले कॉर्टिकोस्टेरॉइड दवा की आवश्यकता पड़ रही हो।
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नए वैरिएंट्स ने बढ़ा दिया है संक्रमण का खतरा - फोटो : iStock

भारत में कोरोना के संक्रमण की स्थिति
भारत में प्रमुख रूप से कोरोना के अल्फा और डेल्टा वैरिएंट्स के कारण संक्रमण के मामले सबसे ज्यादा देखने को मिले हैं। बीटा और गामा वैरिएंट भी कुछ स्थानों पर संक्रमण के मामलों का कारण माने जा रहे हैं। दुनियाभर के वैज्ञानिकों का कहना है कि डेल्टा वैरिएंट्स, वैक्सीनेशन से तैयार शरीर की प्रतिरक्षा को चकमा देने की क्षमता रखते हैं, हालांकि टीके, संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने के खतरे को जरूर कम कर सकते हैं। कई अध्ययनों में कहा जा रहा है कि शरीर में वैक्सीन से बनी एंटीबॉडीज कुछ महीनों में कमजोर पड़ने लगती हैं, ऐसे में लोगों को आने वाले दिनों में बूस्टर शॉट की आवश्यकता हो सकती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक भारत में भी आने वाले दिनों में लोगों को बूस्टर शॉट की आवश्यकता हो सकती है।


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नोट: यह लेख तमाम अध्ययनो की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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