कोविड का यह दौर लोगों के लिए तरह-तरह की चुनौतियां लेकर आया है। संक्रमण के चलते रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी तो हो रही रही है साथ में कोरोना काल के कई अप्रत्यक्ष प्रभाव भी देखने को मिल रहे हैं। संक्रमण पर काबू पाने के लिए कई राज्यों में सरकार ने लॉकडाउन का ऐलान किया है, जिसके चलते लोगों को एक बार फिर से घरों में कैद रहना पड़ रहा है। इसका असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी देखने को मिल रहा है। लॉकडाउन के कारण घरों में बंद लोगों को घबराहट, बेचैनी, डिप्रेशन और बहुत ज्यादा गुस्सा आने की समस्याएं हो रही हैं।
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सुझाव: कोरोना के समय में आ रहा है बहुत ज्यादा गुस्सा, जानिए मन को शांत करने वाले असरदार टिप्स
Tue, 18 May 2021 04:12 PM IST
Abhilash Srivastava
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Abhilash Srivastava
Updated Tue, 18 May 2021 04:12 PM IST
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लॉकडाउन में बढ़ रहा है गुस्सा
- फोटो : getty images
हताशा की स्थिति में उत्पन्न होती है गुस्से की भावना
- फोटो : getty images
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में मनोवैज्ञानिक डॉ दीपाली बत्रा बताती हैं कि कोरोना के इस समय में सबसे शांत और संयमित व्यक्ति को भी क्रोध का अनुभव हो सकता है। यह एक ऐसी भावना है जो हताशा की स्थिति में उत्पन्न होती है। हालांकि, यदि आपका क्रोध आक्रामकता में बदल रहा हो या फिर बार-बार आ रहा हो तो इसे नियंत्रित करने के तरीकों पर गंभीरता से सोचने की जरूरत हो सकती है। इसके लिए आगे की स्लाइडों में बताए जा रहे टिप्स आपकी मदद कर सकते हैं।
गहरी सांस लेने से मिलता है लाभ
- फोटो : getty images
गहरी सांस वाले अभ्यास
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यदि आपको बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा है या गुस्से पर काबू नहीं हो पा रहा है तो ऐसी स्थिति में लंबी सांस लेने से काफी लाभ मिलता है। गहरी सांस लेने से मांसपेशियों और नसों को आराम मिलता है। इसके अलावा घर में जिस जगह पर आपको गुस्सा आता हो वहां से हट जाएं और थोड़ी देर के लिए वॉक करें, इससे भी गुस्से को नियंत्रित किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यदि आपको बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा है या गुस्से पर काबू नहीं हो पा रहा है तो ऐसी स्थिति में लंबी सांस लेने से काफी लाभ मिलता है। गहरी सांस लेने से मांसपेशियों और नसों को आराम मिलता है। इसके अलावा घर में जिस जगह पर आपको गुस्सा आता हो वहां से हट जाएं और थोड़ी देर के लिए वॉक करें, इससे भी गुस्से को नियंत्रित किया जा सकता है।
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मन को शांत रखता है संगीत
- फोटो : pixaby
संगीत का आनंद लें
मनोरोग विशेषज्ञ कहते हैं कि दिमाग को शांत रखने और गुस्से को नियंत्रित करने में संगीत एक बेहतर माध्यम साबित हो सकता है। बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा हो तो अच्छी और सुकून देने वाली संगीत सुनें। संगीत मानसिक शांति देने में सहायक होते हैं।
मनोरोग विशेषज्ञ कहते हैं कि दिमाग को शांत रखने और गुस्से को नियंत्रित करने में संगीत एक बेहतर माध्यम साबित हो सकता है। बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा हो तो अच्छी और सुकून देने वाली संगीत सुनें। संगीत मानसिक शांति देने में सहायक होते हैं।
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स्ट्रेचिंग वाले व्यायाम करने के लाभ
- फोटो : istock
मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग
गुस्से के कारण शरीर की मांसपेशियों में तनाव उत्पन्न हो जाता है जो इसके प्रभाव को और अधिक बढ़ा सकते हैं। ऐसी स्थिति में मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकती है। इसके अलावा व्यायाम करने से मस्तिष्क में खुशी की भावना उत्पन्न करने वाले हार्मोन सेरोटेनिन का स्राव बढ़ाता है। यही कारण है कि व्यायाम को एंगर मैनेजमेंट के रूप में भी प्रभावी माना जाता है।
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नोट: यह लेख मनोवैज्ञानिक डॉ दीपाली बत्रा से एक बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
गुस्से के कारण शरीर की मांसपेशियों में तनाव उत्पन्न हो जाता है जो इसके प्रभाव को और अधिक बढ़ा सकते हैं। ऐसी स्थिति में मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकती है। इसके अलावा व्यायाम करने से मस्तिष्क में खुशी की भावना उत्पन्न करने वाले हार्मोन सेरोटेनिन का स्राव बढ़ाता है। यही कारण है कि व्यायाम को एंगर मैनेजमेंट के रूप में भी प्रभावी माना जाता है।
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नोट: यह लेख मनोवैज्ञानिक डॉ दीपाली बत्रा से एक बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।