स्वस्थ रहना कौन नहीं चाहता है? पर क्या आप जानते हैं कि यह कैसे किया जा सकता है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए सभी अंगों पर विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है। इसमें भी फेफड़ों की सेहत का ख्याल रखना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। नेशनल हार्ट, ब्लड एंड लंग इंस्टीट्यूट के अनुसार, फेफड़ों से संबंधित रोगों के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। एक अनुमान के मुताबिक हर साल करीब 2.35 लाख से अधिक लोग फेफड़ों से संबंधित तमाम तरह की बीमारियों के कारण मौत के शिकार हो जाते हैं। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भी लोगों में फेफड़ों से संबंधित तमाम तरह की जटिलताएं देखने को मिली थीं।
आज का हेल्थ टिप्स: फेफड़ों को मजबूत बनाती हैं ऐसी आदतें, जीवनशैली में कर लें अभी से शामिल
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धूम्रपान से तुरंत बना लें दूरी
आप अक्सर सुनते आ रहे होंगे, धूम्रपान से आपके फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन यह एकमात्र बीमारी नहीं है जिसके लिए धूम्रपान को जिम्मेदार माना जा सकता है। धूम्रपान ज्यादातर फेफड़े की बीमारियों से जुड़ा हुआ है, जिनमें सीओपीडी, इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस और अस्थमा शामिल हैं। धूम्रपान इन बीमारियों को और भी गंभीर बना देता है। उदाहरण के लिए, धूम्रपान न करने वालों की तुलना में धूम्रपान करने वालों का सीओपीडी से मरने की खतरा 12 से 13 गुना अधिक होता है।
प्रदूषण से करें बचाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हवा में मौजूद प्रदूषकों के संपर्क में आने से आपके फेफड़े खराब हो सकते हैं। युवावस्था में आपके फेफड़े आसानी से इन विषाक्त पदार्थों का मुकाबला कर लेते हैं, हालांकि उम्र बढ़ने के साथ यह शक्ति कम होती जाती है। यूएस उपभोक्ता उत्पाद सुरक्षा आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक घर के अंदर का प्रदूषण आमतौर पर बाहर के प्रदूषण से भी बदतर होता है, इसलिए किसी भी तरह के प्रदूषण से बचाव करते रहना आवश्यक है, बाहर जाते समय मास्क लगाकर रखें।
गहरी सांस लेने वाले अभ्यास करें
अध्ययनों से पता चलता है कि गहरी सांस लेने वाले अभ्यास करने से फेफड़ों को साफ करने में मदद मिलती है और ऑक्सीजन का पूरा आदान-प्रदान होता है। इंडियन जर्नल ऑफ फिजियोलॉजी एंड फार्माकोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि कुछ मिनटों के लिए भी गहरी सांस लेने वाले अभ्यास करना फेफड़ों के कार्य को बढ़ावा देने के लिए फायदेमंद हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।