हाल ही में फ़िल्म अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान के ड्रग्स केस को लेकर काफी चर्चाएं हो रही हैं। बाकी सारे मुद्दों से इतर सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि देश की किशोर व युवा पीढ़ी तेजी से इन नशीले पदार्थों के शिकंजे में फंस रही है। वैसे यह कोई पहला केस नहीं है, देश के कई हिस्सों में ड्रग्स का सेवन एक बहुत बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रहा है।
विशेषज्ञों से जानिए: मस्तिष्क को किस तरह से प्रभावित करती है ड्रग्स? क्यों माना जाता है इसे बेहद खतरनाक
युवा हो रहे हैं नशे के शिकार
पिछले कुछ वर्षों में तेजी से हमारे आस-पास की दुनिया बदली है। खासकर दो पीढ़ियों के बीच का अंतर और गहरा गया है। बच्चों के पास साधन तो हैं लेकिन संवाद करने वाला कोई अपना नहीं। वहीं जिन बच्चों के पास पर्याप्त साधन नहीं हैं वे जल्द से जल्द साधन जुटाने के लिए आतुर हैं। इन दोनों ही परिस्थितियों का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व बच्चों को नशे की दुनिया में पहुंचा देते हैं।
यदि आपके घर में भी टीनएजर या युवा है तो जरूरी है कि आप उनको समय दें और सतर्क भी रहें। कुछ ऐसी बातों पर गौर करें जो आपको बच्चे के गलत हाथों में फंसने की ओर इशारा करती हैं।
मस्तिष्क पर ड्रग्स का असर
ड्रग्स, दिमाग में मौजूद न्यूरॉन्स के काम में बाधा डालना शुरू कर देती है। ये न्यूरॉन्स पूरे शरीर को सन्देश भेजने, सन्देश लेने और सिग्नल्स को प्रोसेस करने के काम काज को संतुलित करती हैं। मैरुआना (गांजा) और हेरोइन जैसी कुछ ड्रग्स, न्यूरॉन्स को अधिक सक्रिय बना देती हैं क्योंकि उनमें मौजूद रसायन की संरचना शरीर में उपस्थित प्राकृतिक न्यूरोट्रांसमीटर जैसा ही व्यवहार करती है। इससे दिमाग का सामान्य कार्य गड़बड़ा जाता है। इन रसायनों की अधिकता की वजह से ही दिमाग सपनीली स्थिति में पहुंच जाता है।
बच्चों की करें निगरानी
युवाओं में ड्रग्स की लत का खतरा सबसे अधिक होता है, ऐसे में अपने बच्चों के व्यवहार पर ध्यान दें, उनमें कुछ भी असामान्य दिखते ही सावधान हो जाएं।
- अगर आपका बच्चा अचानक सबसे खिंचा-खिंचा रहने लगा है।
- बात-बात पर चिड़चिड़ाहट, गुस्सा और खीझ दिखा रहा है।
- घर से आपको पैसे या कोई मूल्यवान चीज गायब दिख रही है और ऐसा तीन-चार बार हो चुका हो।
- बच्चा अपने कमरे में दरवाजा बन्द करके रहना पसंद करने लगा है और फोन पर बात करते समय किसी कोने में या बाकी लोगों से दूर जाने लगे।
- वह ट्यूशन या किसी बहाने से घर से बाहर बार-बार जाने लगा है।
- उसकी आंखें फूली हुई, लाल या उनींदी दिखाई दे रही हैं।
- पढ़ाई या अन्य किसी भी काम में वह मन नहीं लगा पा रहा है/लगा पा रही है।
- उसकी भूख, प्यास, सोने-जागने, बात करने के पैटर्न में बदलाव आ गया है।
यह जरूरी नहीं कि ऐसा व्यवहार सिर्फ ड्रग्स की चपेट में आए बच्चे का ही हो ऐसा जरूरू नहीं है, कोई और समस्या भी इसके पीछे हो सकती है। लेकिन नशे के शिकार लोगों में यह लक्षण आम होते हैं, इसलिए इनपर गौर करें।
कैसे पाएं इस समस्या से निजात
- सबसे पहले बच्चे से ही शांति से पूछें। ज्यादातर मामलों में इस तरह की लत के शिकार बच्चे अपनी स्थिति समझ चुके होते हैं लेकिन वे इससे निकलने का रास्ता नहीं जानते।
- यह जानने की कोशिश करें कि कहीं बच्चे के साथ कुछ गलत तो नहीं हुआ, कोई उसका फायदा तो नहीं उठा रहा। उसे यह समझाएं कि आप उसकी इससे बाहर निकलने में मदद करेंगे और उसे डरने की कोई जरूरत नहीं है।
- किसी अच्छे काउंसलर और चिकित्सक की मदद लें और रिहैब सेंटर में बच्चे को रखें।
- जब तक बच्चा पूरी तरह इस समस्या से बाहर नहीं आता इलाज या सख्ती में कोताही न बरतें।
- बच्चे के पोषण का पूरा ध्यान रखें।
- उसे कभी यह महसूस न होने दें कि उसने जो किया उससे वह बाहर नहीं आ सकता/सकती। पूरे समय उससे संवाद रखें, उसे आने वाले कल को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करना सिखाएं।
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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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