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जानना जरूरी: 20-30 की उम्र वालों में भी हो रहा है हार्ट अटैक, जानिए दिल की दौरा पड़ने पर तुरंत क्या करें

Sun, 13 Sep 2026 08:34 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 13 Sep 2026 08:34 PM IST
सार

हार्ट अटैक सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं है। कम उम्र में धूम्रपान, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और खराब जीवनशैली जोखिम बढ़ा रहे हैं। सीने में दबाव, सांस फूलने या असामान्य कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। तुरंत इमरजेंसी मदद लें और समय पर इलाज कराएं।

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Heart Attacks in Young Adults know Risk Factors, Prevention and First Aid
हार्ट अटैक की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI

हृदय रोग और हार्ट अटैक को कुछ दशकों पहले तक बुजुर्गों की बीमारी के रूप में जाना जाता था, हालांकि जिस तरह से हमारी खान-पान और दिनचर्या गड़बड़ होती जा रही है इसने कम उम्र के लोगों में भी इसका खतरा काफी बढ़ा दिया है।  हाल की कई घटनाओं में आपने भी  30 से कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक से मौत की खबरें जरूर सुनी-देखी होंगी।



भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के विशेषज्ञों की रिपोर्ट में युवाओं में हृदय संबंधी बीमारियों के बढ़ते जोखिमों को लेकर अलर्ट किया गया है। धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज के साथ मोटापा और शारीरिक गतिविधियो की कमी ने खतरे को और भी बढ़ा दिया है।

अब सवाल ये है कि जिस तरह से हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे में इससे बचाव कैसे किया जाए और किसी को हार्ट अटैक हो तो तुरंत क्या तरीके अपनाकर उसकी जान बचाई जाए?

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हृदय रोग और हार्ट अटैक का खतरा - फोटो : Freepik.com

हृदय रोग विशेषज्ञ कहते हैं, हार्ट अटैक के ज्यादातर मामलों में सबसे बड़ी समस्या ये देखी जाती है कि अक्सर लोग इसके लक्षणों पर समय रहते ध्यान ही नहीं देते। सीने में दर्द या सांस फूलने जैसे संकेतों को गैस या थकान समझकर टाल देते हैं। हार्ट अटैक में सीने में दबाव या जकड़न के साथ दर्द हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े या पीठ तक जा सकता है। कुछ लोगों में सांस फूलना, मितली या असामान्य कमजोरी भी हो सकती है। इसलिए इस तरह की किसी भी दिक्कत को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

हार्ट अटैक में शुरुआती समय बहुत कीमती होता है, लक्षणों को पहचानकर समय रहते इलाज से जान बचाई जा सकती है।

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हार्ट अटैक की स्थिति - फोटो : Adobe stock photos

कौन से लक्षण दिखें तो तुरंत सावधान हो जाएं?

हार्ट अटैक की स्थिति में सीने में दर्द, दबाव, भारीपन या जकड़न होना सबसे आम संकेत है। यह दर्द कुछ मिनट तक रह सकता है या आता-जाता रह सकता है। 
 

  • कुछ लोगों में सीने का दर्द हाथों, कंधे, पीठ, गर्दन, जबड़े या पेट के ऊपरी हिस्से तक फैल सकता है। 
  • हार्ट अटैक के कारण सांस फूलने, ठंडा पसीना आने, मितली-चक्कर या अचानक कमजोरी भी हो सकती है।हर व्यक्ति में लक्षण एक जैसे नहीं होते।
  • ऐसे लक्षणों में खुद से इलाज करना या फिर इन्हें इग्नोर करना मुसीबतों को बढ़ा सकता है।


अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि किस किस तरह से महिलाओं और पुरुषों में हार्ट अटैक के लक्षण अलग अलग हो सकते हैं, इस पर भी सभी लोगों को ध्यान देने की जरूरत है। 

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सीपीआर देने से बच सकती है जान - फोटो : Adobe Stock

हार्ट अटैक हो तो तुरंत क्या करें?
 

  • हार्ट अटैक होने पर जितनी जल्दी मरीज को डॉक्टरी सहायता मिल जाती है, उसके बचने की संभावना उतनी ज्यादा होती है।
  • हार्ट अटैक का शक हो तो तुरंत स्थानीय इमरजेंसी सेवा को कॉल करें। खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने की कोशिश न करें। एम्बुलेंस में इलाज शुरू हो सकता है और अस्पताल पहुंचने में भी समय बच सकता है।
  • मरीज को आराम की स्थिति में रखें और अकेला न छोड़ें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना कोई नई दवा न दें। अमर उजाला में हमने हार्ट अटैक होने पर राम किट लेने से फायदों के बारे में बताया है, हालांकि इसे देने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। 
  • अगर व्यक्ति बेहोश हो जाए और सामान्य सांस न ले रहा हो तो सीपीआर दें। सीपीआर को जीवनरक्षक उपाय माना जाता है।
  • किसी भी तरह के घरेलू नुस्खों पर भरोसा न करें। मरीज को जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल में पहुंचाएं जहां उसका सही तरीके से इलाज हो सके।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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