तमाम अध्ययनों से पता चलता है कि रोजाना अन्य प्रकार के चाय के मुकाबले ग्रीन-टी का सेवन करना सेहत के लिए विशेष लाभदायक हो सकता है। एंटीऑक्सिडेंट्स और तमाम प्रकार के अन्य आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर ग्रीन-टी का नियमित सेवन कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे को कम करने में सहायक हो सकता है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सस्टेनेबल डेवलपमेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चाय दुनियाभर में पानी के बाद दूसरा सबसे ज्यादा पिया जाने वाला पेय है। हाल के वर्षों में स्वास्थ्य लाभ को देखते हुए लोगों के बीच ग्रीन-टी का मांग तेजी से बढ़ी है।
आज का हेल्थ टिप्स: डायबिटीज हो या कैंसर या फिर चाहते हैं लंबी आयु, बस रोजाना कीजिए इस पेय का सेवन
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कैंसर के खतरे को करती है कम
आंकड़ों से पता चलता है कि जिन देशों में ग्रीन-टी का सेवन अधिक होता है, वहां कई प्रकार के कैंसर की दर कम देखी गई है। हालांकि मनुष्यों पर इसे साबित करने के लिए और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है। शोध से पता चला है कि ऑक्सीडेटिव डैमेज से क्रोनिक इंफ्लामेशन हो सकती है, जिससे कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। एंटीऑक्सिडेंट, इस खतरे को कम करती है। ग्रीन-टी में प्रभावी एंटीऑक्सिडेंट पाए जाते हैं।
डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद
हाल के दशकों में टाइप-2 डायबिटीज की दर बढ़ रही है। हाई ब्लड शुगर के कारण होने वाली इस समस्या के कारण शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। अध्ययनों से पता चलता है कि ग्रीन टी इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करने के साथ रक्त शर्करा के स्तर को कम कर सकती है। मधुमेह रोगियों के लिए इसे विशेष लाभदायक माना जाता है।
कई अध्ययनों की समीक्षा में पाया गया कि ग्रीन-टी में पाया जाने वाला कैटेचिन, मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में सहायक होता है, जिससे वजन कम हो सकता है। कई अध्ययनों से पता चलता है कि ग्रीन टी शरीर में वसा को कम करने में मदद कर सकती है। अधिक वजन की समस्या से परेशान लोगों के लिए इसे फायदेमंद माना जाता है।
ग्रीन-टी बनाती है दीर्घायु
ग्रीन-टी में मौजूद कुछ यौगिक कैंसर और हृदय रोग से बचाने में मदद कर सकते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि रोजाना इसका सेवन आपकी उम्र को बढ़ाने में सहायक हो सकता है। एक अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने 11 वर्षों में 40,530 जापानी वयस्कों पर अध्ययन किया। इसमें जो लोग ग्रीन टी पीते थे, उनमें अध्ययन के दौरान मरने वालों की संख्या काफी कम पाई गई।
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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला के हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।