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Health Risk: 50 से अधिक उम्र वालों में बैक्टीरियल निमोनिया का खतरा अधिक, इन बीमारियों को लेकर भी रहें सावधान

Fri, 01 Sep 2023 02:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 01 Sep 2023 02:05 PM IST
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उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्याएं - फोटो : Pixabay

उम्र बढ़ने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है, यह कई प्रकार की बीमारियों को बढ़ाने वाली स्थिति भी हो सकती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को कम उम्र से ही स्वस्थ और पौष्टिक आहार के सेवन के साथ दिनचर्या को ठीक रखने की सलाह देते हैं। कम्र उम्र और युवावस्था में किए गए ये प्रयास आपको उम्र बढ़ने के साथ होने वाली कई गंभीर और घातक बीमारियों के खतरे से बचाने में मददगार हो सकते हैं।



स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस प्रकार से हमारी लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी है, इसके कारण 50 की आयु तक पहुंचते-पहुंचते कई प्रकार की बीमारियों का खतरा हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 10 में से नौ वृद्धों को किसी न किसी प्रकार की क्रोनिक बीमारी है और लगभग 10 में से आठ को एक से अधिक क्रोनिक बीमारी की समस्या है। इस तरह के आंकड़े संकेत देते हैं कि युवाओं को भविष्य में अपनी सेहत को लेकर अभी से सावधान हो जाने की आवश्यकता है। 50 की आयु तक सांस की बीमारियां, हृदय रोग, डायबिटीज की समस्या होना काफी सामान्य देखा जा रहा है, ये समस्याएं गंभीर और जानलेवा भी हो सकती हैं।

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फेफड़ों की समस्या - फोटो : Pixabay

बैक्टीरियल निमोनिया होने का खतरा अधिक

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 50 से अधिक उम्र वाले लोगों में समय के साथ फेफड़ों से संबंधित बीमारियों के होने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है, निमोनिया भी उनमें से एक है। सामान्य सर्दी-फ्लू भी इस समस्या के जोखिम को बढ़ाने वाली हो सकती है। निमोनिया के लिए अस्पताल में भर्ती लगभग 30% वृद्धजनों की इससे मृत्यु हो जाती है, 65 वर्ष से उम्र के लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने के कारण इस रोग का खतरा अधिक माना जाता रहा है।

निमोनिया से बचाव के लिए जरूरी है कि फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।

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गठिया की समस्याएं - फोटो : iStock

हड्डियों और जोड़ों की समस्या

उम्र के साथ-साथ हड्डियों में कमजोरी और इससे संबंधित बीमारियों का जोखिम भी काफी अधिक हो सकता है। यही कारण है कि ऑस्टियोपोरोसिस और आर्थराइटिस का जो खतरा पहले 60 की उम्र के बाद देखा जा रहा था, अब कम उम्र के लोग भी इसके शिकार हो रहे हैं। शारीरिक गतिविधि की कमी, पोषण संबंधी समस्या जैसे कैल्शियम-विटामिन डी की कमी आदि के कारण भी हड्डियों की बीमारियां बढ़ने लग जाती हैं।

ऑस्टियोपोरोसिस के कारण आपकी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और उनमें फ्रैक्चर होने का खतरा भी अधिक हो सकता है। यह 50 या उससे अधिक उम्र के लगभग 54 मिलियन अमेरिकियों को प्रभावित करती है। 

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आंखों की बढ़ती बीमारियां - फोटो : pixabay

आंखों में ग्लूकोमा-मोतियाबिंद होने का खतरा

उम्र बढ़ने की स्थिति आपकी आंखों के लिए भी समस्याकारक हो सकती है, जिसके कारण आपको धुंधला दिखाई देने की समस्या हो सकती है। 60 की उम्र तक मोतियाबिंद (जो आपकी आंख के लेंस को धुंधला कर देता है) और ग्लूकोमा (आंख की समस्याएं जो आपकी ऑप्टिक नर्व्स को नुकसान पहुंचाती हैं) के कारण आपकी दृष्टि भी प्रभावित होने लग जाती है।

आंखों से संबंधित इस तरह की समस्याओं से बचाव के लिए जरूरी है कि कम उम्र से ही आंखों की नियमित रूप से जांच कराते रहें।

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हृदय रोगों के जोखिम कारक - फोटो : iStock

हृदय रोग हो सकते हैं जानलेवा

उम्र बढ़ने के साथ आपकी धमनियों में प्लाक का निर्माण होने लगता है जो हृदय रोगों का एक प्रमुख कारण है। यह कम उम्र में शुरू हो सकता है और उम्र बढ़ने के साथ बदतर होता जाता है। अमेरिका में 40 से 59 आयु वर्ग में, 6.3% पुरुषों और 5.6% महिलाओं को हृदय रोग है। आहार और लाइफस्टाइल की गड़बड़ी के कारण समय के साथ हृदय रोगों का खतरा बढ़ता जा रहा है, इसे मृत्यु के प्रमुख कारणों में से भी एक माना जाता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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