कसरत करना सेहत के लिए अच्छा होता है। ये तो सभी जानते हैं लेकिन जरूरत से ज्यादा मोटे लोगों को खासतौर पर कसरत की सलाह दी जाती है। इसका कारण यहीं बताया जाता है कि सेहत सही रहेगी और किसी बीमारी का खतरा नहीं होगा। लेकिन अभी हाल ही में हुए शोध में एक नई जानकारी भी सामने आई है। आगे की स्लाइड में जानें क्या है जानकारी...
शोध में बताया गया है कि मोटापे के शिकार लोगों में इंसुलिन प्रतिरोध का खतरा होता है जो कि दिमाग को शरीर के बाकी हिस्सों के ठीक से काम करने और पोषण की जानकारी देता है। दिमाग का ये हिस्सा बताता है कि आपने क्या खाया है और किस हिस्से को इस खास पोषण की जरूरत है। लेकिन जब आप मोटे हो जाते हैं तो ये क्रिया काम करना बंद कर देती है।
मोटे लोग खासतौर वह लोग जो मोटापे के कारण चलने-फिरने में भी दिक्कत महसूस करते हैं उनको शोध में शामिल किया गया। और यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि कैसे कसरत करना दिमाग पर असर डालती है। इन लोगों पर दो महीने तक लगातार शोध किया गया जिसमें इनसे कसरत के रूप में वॉकिंग और साइकिलिंग शामिल की गई थी। इस तरह के शोध करने के पहले और बाद में मोटे लोगों के दिमाग का टेस्ट भी किया गया।
शोध पूरा होने के बाद किए गए टेस्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जिसमें देखा गया कि भले ही इस तरह की कसरत से वजन कम करने में कुछ ज्यादा मदद न मिली हो लेकिन दिमाग की सेहत पर बहुत सकारात्मक फर्क पड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार शरीर का मेटाबॉलिज्म सिस्टम ठीक से काम करें इसके लिए जरूरी है कि दिमाग की सेहत दुरुस्त रहे।
इस शोध में बहुत ही सकारात्मक नतीजे आए हैं। इंसुलिन नोजल स्प्रे का उपयोग करने के बाद देखा गया कि पहले और बाद में मस्तिष्क के काम करने में बहुत ज्यादा अंतर है। मस्तिष्क कसरत करने के बाद ज्यादा तेजी से गतिविधियों पर प्रतिक्रिया देता है।