वैश्विक स्तर पर कोरोना संक्रमण के मामले एक बार फिर से रफ्तार पकड़ रहे हैं। चीन और ब्रिटेन सहित कई देशों में नए मामलों में काफी तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। भारत में भी स्थिति पिछले कुछ दिनों से बिगड़ रही है। दिल्ली-एनसीआर के कई स्कूलों में बच्चों में तेजी से रिपोर्ट किए गए संक्रमण के मामले डराने वाले हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट पर रखा गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में नए एक्सई वैरिएंट के मामलों को लेकर चेतावनी जारी करते हुए इसे अब तक का सबसे संक्रामक रूप बताया था, भारत में भी इस वैरिएंट की एंट्री हो चुकी है। मसलन एक बार फिर से दुनियाभर में जिस तरह के हालात बन रहे हैं, वह बड़ी मुश्किलों की ओर इशारा हो सकते हैं।
बड़ी कामयाबी: अब आपकी सांस से भी चल जाएगा कोरोना संक्रमण का पता, तीन मिनट में 91% सटीकता से साथ मिलेगा परिणाम
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इंस्पेक्टआईआर कोविड-19 ब्रीथिलाइजर डिवाइस
एफडीए की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि 'इंस्पेक्टआईआर कोविड-19 ब्रीथिलाइजर' नाम की यह डिवाइस बड़ी ही सुगमता से कोविड-19 संक्रमण की पुष्टि करने में मदद कर सकती है। यह डिवाइस गैस क्रोमैटोग्राफी गैस मास-स्पेक्ट्रोमेट्री (GC-MS) नामक एक तकनीक का उपयोग करती है, जो सांस में मौजूद सार्स-सीओवी-2 वायरस से संबंधित वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों और संक्रमण के कारकों का आसानी से पता लगाने में मदद कर सकती है। खास बात है कि इसमें पारंपरिक तौर पर आरटी-पीसीआर टेस्ट की तरह नाक-मुंह के स्वाब की जरूरत नहीं होगी।
सिर्फ तीन मिनट में मिल जाएगा परिणाम
फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने बताया कि इस डिवाइस की मदद से बस तीन मिनट के भीतर ही 91.2 फीसदी सटीकता के साथ कोरोना संक्रमण की पुष्टि की जा सकती है। इतना ही नहीं यह डिवाइस नेगिटिव सैंपल टेस्टिंग में भी 99.3 फीसदी तक कारगर पाया गया है। डिवाइस काफी छोटे आकार का है जिसे कहीं ले जाना और लोगों की आसानी से जांच करना, इसे काफी खास बनाती है। इसका उपयोग अस्पतालों और मोबाइल टेस्टिंग साइटों पर आसानी से किया जा सकता है। कोरोना महामारी के इस दौर में संक्रमण का आसानी से पता लगाने में यह डिवाइस वरदान साबित हो सकती है।
आंकड़े काफी सटीक
इस टेस्टिंग डिवाइस की गुणवत्ता की जांच के लिए 2,409 प्रतिभागियों पर इसका अध्ययन किया गया। टेस्टिंग में पाया गया कि यह संक्रमण का पता लगाने में 91 फीसदी तक कारगर है। खास बात यह है कि यह 99.3 फीसदी की गुणवत्ता के साथ निगेटिव रिपोर्ट की भी पुष्टि कर सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस डिवाइस को प्रयोग में लाकर समय रहते आसानी से लोगों में संक्रमण का पता लगाने में मदद मिल सकती है, जिससे रोग को गंभीर रूप लेने से पहले से पकड़ा जा सकेगा।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
एफडीए के सेंटर फॉर डिवाइसेज एंड रेडियोलॉजिकल हेल्थ के निदेशक डॉ. जेफ शूरेन कहते हैं, वैश्विक स्तर पर कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच यह डिवाइस वरदान साबित हो सकती है। इसकी संक्रमण की पहचान करने की सटीकता और निगेटिव रिपोर्ट का पता लगाने की तकनीक, इसे खास बनाती है। इस डिवाइस का उपयोग करके प्रति माह लगभग 64,000 सैंपल टेस्ट की वृद्धि होने की उम्मीद है। वैश्विक स्तर पर इसकी उपलब्धता कई मापदंडों का विषय है, फिलहाल इसे कुछ स्थानों पर प्रयोग में लाए जाने के लिए आपातकालीन मंजूरी दे दी गई है।
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स्रोत और संदर्भ
FDA Authorizes First COVID-19 Diagnostic Test Using Breath Samples
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