देश में कोरोना महामारी को दो साल से अधिक का समय बीत चुका है। कोरोना के नए वैरिएंट्स के साथ इन दिनों कई अन्य प्रकार के संक्रमण का दौर भी जारी है। मंकीपॉक्स और टोमैटो फ्लू के साथ कई हिस्सों में स्वाइन फ्लू के मामले भी रिपोर्ट किए गए हैं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक झारखंड की राजधानी रांची में पिछले दिनों तीन लोगों में संक्रमण की पुष्टि की गई है। झारखंड के अलावा दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, मिजोरम में भी पिछले महीनों में स्वाइन फ्लू के मामले की रिपोर्ट किए जा चुके हैं।
नई चुनौती: कोविड-19 के साथ स्वाइन फ्लू के भी बढ़ रहे हैं मामले, दोनों के लक्षण लगभग समान, कैसे करें अंतर?
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स्वाइन फ्लू संक्रमण के बारे में जानिए
एच1एन1 फ्लू जिसे आमतौर पर स्वाइन फ्लू के रूप में जाना जाता है, यह मुख्य रूप से फ्लू (इन्फ्लूएंजा) वायरस के H1N1 स्ट्रेन के कारण होता है। इसके लक्षण मौसमी फ्लू के समान ही होते हैं। इसमें बुखार, खांसी, गले में खराश, बहती हुई नाक, शरीर में दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना और थकान शामिल हैं। संक्रमितों में दस्त और उल्टी की भी दिक्कत हो सकती है। इस संक्रमण के कारण मृत्युदर 1-4 फीसदी के करीब हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं इस समय देश में कई प्रकार के संक्रमण का दौर चल रहा है। मच्छर जनित कई बीमारियां भी बढ़ रही हैं, ऐसे में सभी लोगों के लिए स्वाइन फ्लू संक्रमण और अन्य में समय रहते अंतर करना बहुत आवश्यक है, जिससे स्थिति का सही निदान और उपचार किया जा सके।
कोविड-19 और स्वाइन फ्लू में अंतर
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, देश में इन दिनों कोविड-19 और स्वाइन फ्लू दोनों के मामले दर्ज किए जा रहे हैं, इनके ज्यादातर लक्षण एक जैसे हो सकते हैं, जिनको लेकर सभी लोगों को विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता है। दोनों बीमारियों के कई लक्षण एक जैसे जरूर हो सकते हैं पर दोनों की गंभीरता का स्तर अलग है, इस वजह से स्थिति की सही निदान होना भी बहुत आवश्यक है।
कोविड-19 और स्वाइन फ्लू दोनों में शरीर दर्द, थकान, सिरदर्द, बहती नाक, खांसी आने, गले में खराबी जैसी समस्या हो सकती है। इन लक्षणों में समय रहते अंतर करने की आवश्यकता है।
कैसे जानें यह कोविड-19 है या स्वाइन फ्लू?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कुछ ऐसे लक्षण हैं जो इन दोनों बीमारियों को अलग करते हैं, इसपर ध्यान देकर सही अंदाजा लगाया जा सकता है। कोविड-19 में गंध और स्वाद की कमी, सांस फूलने और शरीर पर चकत्ते जैसी समस्या हो सकती है जोकि स्वाइन फ्लू में ऐसी दिक्कत नहीं देखी जाती है।
गंभीरता के मामले में कोविड-19 को अधिक खतरनाक माना जा सकता है, स्वाइन फ्लू के ज्यादातर मामलों में डॉक्टरी सहायता की जरूरत नहीं होती है जबकि कोविड-19 कुछ स्थितियों में गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है। कोविड-19 संक्रमण की स्थिति में मृत्यु दर भी स्वाइन फ्लू से अधिक होती है।
इन संक्रामक बीमारियों से कैसे करें बचाव?
दोनों ही बीमारियां श्वसन पथ में संक्रमण के साथ शुरू होती हैं ऐसे में मास्क का प्रयोग और हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखकर आप इन दोनों से बचाव कर सकते हैं। चूंकि इन बीमारियों के कई समान लक्षण होते हैं, इसलिए दोनों में अंतर करने के लिए डॉक्टर की सलाह पर जांच कराना आवश्यक हो जाता है। बचाव के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देना आपको दीर्घकालिक लाभ प्रदान करता है, इसके लिए स्वस्थ आहार-व्यायाम को जीवनशैली का हिस्सा बनाकर लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।