हमारे शरीर को कुछ 'टूल्स' प्राकृतिक रूप से प्राप्त होते हैं। ये टूल्स जीवन को आसान बनाने में मदद करते हैं, दांत उन्हीं में से एक हैं। कई बार परिस्थितिवश इन दांतों की बनावट बिगड़ सकती है या किसी दुर्घटनावश दांत टेढ़े-मेढ़े हो सकते हैं। ऐसे समय में काम आते हैं ब्रेसेस। ब्रेसेस का काम दांतों की संरचना और आकार को दुरुस्त करने के साथ ही उन्हें सही तरीके से काम करने में मदद करना भी होता है।
सेहत की बात: इन स्थितियों में पड़ सकती है दांतों में ब्रेसेस लगवाने की जरूरत, जानिए कैसे करें देखभाल
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डॉक्टर की सलाह के मुताबिक ही लगवाएं ब्रेसेस
आजकल कई टीनएजर बिना जरूरत भी ब्रेसेस लगवाने की जिद पकड़ लेते हैं। ब्रेसेस कोई खेल नहीं है, इन्हें लगवाने, लगाए रहने तक दर्द और असहजता बनी रह सकती है। इसलिए बिना डॉक्टर के सलाह के इसे नहीं लगवाना चाहिए।
सामान्यतौर पर दांतों के किसी भी डॉक्टर से सलाह लेकर यह प्रक्रिया करवाई जा सकती है लेकिन अधिकांश लोगों को नहीं मालूम होता कि बच्चों के दांतों के अलग डॉक्टर, पीडोडोंटिस्ट होते हैं। वहीं पेरियोडोंटिस्ट, ऑर्थोडेंटिक्स व कॉस्मेटिक डेंटिस्ट्री के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भी यह काम करते हैं। इसलिए पहले जानकारी पूरी लें, उसके बाद आगे कदम बढ़ाएं।
ब्रेसेस लगवाने के बाद की सावधानी
बच्चों के लिए ब्रेसेस का उपयोग ज्यादा होता है, ऐसे में उन्हें इसके साथ ओरल हाइजीन कैसे रखना है, इसकी जानकारी देना जरूरी हो जाता है। ब्रेसेस लगाने के बाद कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है।
- डॉक्टर ने ब्रेसेस लगाते समय जिन सावधानियों को रखने के लिए कहा है, उन्हें नजरअंदाज न करें। जितने समय ब्रेसेस रहेंगे, ये सावधानियां आपके काम आएंगी और अच्छा रिजल्ट पाने में भी मदद करेंगी।
- ब्रश और कुल्ला जैसी ओरल हाइजीन की आदतें ब्रेसेस लगाने के बाद भी नियमित रखना है लेकिन इसका तरीका थोड़ा बदल जाता है। टूथपेस्ट कौन सा लेना है ये राय डॉक्टर से लें। चूंकि ब्रेसेस की शुरुआती अवस्था में दांत सेट हो रहे होते हैं इसलिए कुल्ला और ब्रश करने की सही तरीका डॉक्टर से जरूर जानें।
- दिन में कम से कम 2 बार और हर बार 2 मिनट ब्रश करना चाहिए। ब्रश सॉफ्ट ब्रिसिल्स वाला होना जरूरी है। दांतों के ऊपरी हिस्से से शुरू करके पूरे दांतों पर गोल घुमाते हुए हल्के हाथों से ब्रश करें।
- डॉक्टर से फ्लॉस और माउथवॉश के प्रयोग को लेकर भी सलाह लें। क्या ये दोनों चीजें बच्चों के लिए भी काम करेंगी? क्योंकि ज्यादा मात्रा में माउथवॉश किसी के लिए भी नुकसानदेह हो सकता है। वहीं फ्लॉस करना बच्चों के लिए मुश्किल हो सकता है। इसलिए इस बात को लेकर राय जरूर लें।
- अगर फ्लॉस नहीं कर पाते तो इसकी जगह तेज पानी की धार के साथ सफाई करने वाले टूल्स अपना सकते हैं। लेकिन इन्हें सही तरीके से उपयोग में लाना जरूरी है।
- अगर दांतों में किसी भी प्रकार का दर्द,मसूड़ों में सूजन, ब्रेसेस में दिक्कत आदि महसूस हो तो तुरन्त डॉक्टर से सम्पर्क करें। साथ ही ब्रेसेस सही तरह से फिट हैं या नहीं, इस पर पूरी नजर रखें।
ब्रेसेस के दौरान खान-पान का रखें विशेष ख्याल
इस स्थिति में खाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है लेकिन पोषण तो शरीर को चाहिए ही। इसलिए ऐसे खाद्य चुनें जो दिक्कत न बढ़ाएं और पोषण भी दें। आप दही,दूध, अच्छी तरह पकी हरी सब्जियां, पनीर, सब्जियों का सूप, दालें, नरम फल, दलिया, आदि खा सकते हैं।
कुछ चीजें ब्रेसेस के साथ दांतों को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं, इनके सेवन से बचें। इनमें भुट्टे और पॉपकॉर्न, कड़क रोटी या ब्रेड, कड़क फल और सब्जियां, कड़क कैंडी या चॉकलेट, सोडा वाले ड्रिंक, चिप्स, साबुत अनाज, आदि शामिल हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।