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Covid-19: कोरोना की दवा लेने के बाद बदल गया आंखों का रंग, नए वैरिएंट्स से खतरे को लेकर डब्ल्यूएचओ का अलर्ट

Fri, 08 Sep 2023 12:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 08 Sep 2023 12:10 PM IST
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dark brown eyes turned blue after receiving a COVID-19 medicine favipiravir, side effects of coronavirus
कोरोना की दवा के दुष्प्रभाव - फोटो : istock

कोरोनावायरस का पिछले तीन साल से जारी संक्रमण कई प्रकार से सेहत के लिए समस्याएं बढ़ाता हुआ देखा जा रहा है। संक्रमण के कारण फेफड़ों से लेकर हृदय और कई अन्य अंगों पर भी नकारात्मक असर देखा गया है। अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि कोरोना का संक्रमण शरीर के तमाम हिस्सों को क्षति पहुंचा रहा है, इसके दीर्घकालिक जोखिम गंभीर हो सकते हैं। ऐसे ही एक चौंकाने वाले मामले में वैज्ञानिकों ने बताया कि कोविड-19 की दवा लेने के बाद छह महीने के बच्चे की भूरी आंखें नीली हो गई हैं। कोरोना के इस असामान्य चिकित्सीय दुष्प्रभाव ने सभी को अचरज में डाल दिया है। 



मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बच्चा थाईलैंड का रहने वाला है और बुखार-खांसी के लक्षणों के बाद उसे कोरोना संक्रमित पाया गया था। डॉक्टर्स ने कथित तौर पर उसे तीन दिनों के लिए एंटीवायरल दवा फेविपिराविर दी, इससे कोरोना के लक्षणों में सुधार होने लगा, हालांकि इसके बाद उसके आंखों के रंग में परिवर्तन देखा गया।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया यह गंभीर दुष्प्रभाव है जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।

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दवा के कारण बदल गया आंखों का रंग - फोटो : istock

कोविड की दवा से बच्चे की आंख पड़ गई नीली

बच्चे की मेडिकल रिपोर्ट को जर्नल फ्रंटियर्स इन पीडियाट्रिक्स में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक बच्चे की आंखों में देखे गए इस प्रकार के अप्रत्याशित लक्षण के बाद डॉक्टरों ने तुरंत बच्चे को फेविपिराविर देना बंद कर दिया। लगभग पांच दिनों के बाद बच्चे के आंखों का रंग वापस से ठीक हो गया।

मेडिकल रिपोर्ट में लेखकों ने बताया कि दवा का इस प्रकार का दुष्प्रभाव सिर्फ आंखों में ही देखा गया है। त्वचा, नाखून या अन्य किसी हिस्से में रंग में कोई बदलाव नहीं आया है। फेविपिराविर थेरेपी के 3 दिन बाद लक्षणों में सुधार हुआ।

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कोरोना के दवा के दुष्प्रभाव - फोटो : istock

कोविड-19 के दवा के दुष्प्रभाव

गौरतलब है कि कोविड-19 के उपचार के तौर पर हल्के कोरोना के लक्षण वालों के लिए फेविपिराविर को थाई मिनिस्ट्री ऑफ पब्लिक हेल्थ ने पिछले साल ही मंजूर दी थी। अध्ययन की रिपोर्ट में डॉक्टर्स ने बताया है कि यह अपने तरह का पहला मामला है जिसमें इस तरह के असामान्य लक्षण देखे गए हैं। यह केस सार्स-सीओवी-2 संक्रमण के इलाज के लिए इस दवा को प्राप्त करने वालों में इसके असामान्य प्रतिकूल प्रभावों के बारे में बताती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना के वैश्विक स्तर पर केस तेजी से बढ़ रहे हैं, इससे होने वाले दुष्प्रभावों को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। 

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कोरोना के नए वैरिएंट्स का जोखिम - फोटो : iStock

कोरोना को लेकर डब्ल्यूएचओ का अलर्ट

कोरोना के बढ़ते मामलों के देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सभी देशों को अलर्ट रहने की सलाह दी है। डब्ल्यूएचओ ने कहा, कई देश जहां इन दिनों सर्दियों की शुरुआत हो रही है वहां कोरोना के जोखिमों को लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। नए वैरिएंट्स के बढ़ते जोखिमों को ध्यान में रखते हुए टीकाकरण और कोरोना के मामलों की निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। हालांकि कुछ देशों में अब भी कोरोना के सीमित डेटा उपलब्ध हैं, डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि दुनिया भर में बड़ी संख्या में संक्रमितों के मामले बढ़े हैं।

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नए वैरिएंट्स में अतिरिक्त म्यूटेशंस की संख्या - फोटो : Pixabay

नए वैरिेएंट्स बढ़ा रहे हैं जोखिम

डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों ने बताया, मध्य पूर्व और एशिया के कुछ हिस्सों में संक्रमण और मौत के मामले बढ़ रहे हैं, यूरोप के कई हिस्सों में संक्रमितों को इंटेंसिव केयर की जरूरत हो रही है। नए वैरिएंट्स की संक्रामकता दर अधिक देखी जा रही है, इसके अलावा इसमें देखे गए अतिरिक्त म्यूटेशंस के कारण उन लोगों में भी संक्रमण होने का खतरा अधिक देखा जा रहा है जिनका वैक्सीनेशन हो चुका है या फिर जिनके शरीर में पहले के संक्रमण के बाद से प्राकृतिक प्रतिरक्षा बनी हुई है।

मॉर्डना और फाइजर ने नए वैरिएंट्स को लक्षित करने वाले टीके भी तैयार कर लिए हैं। 



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स्रोत और संदर्भ
Case report: Favipiravir-induced bluish corneal discoloration in infant with COVID-19


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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