लगभग दो साल से भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में कोरोना वायरस के कई वेरिएंट्स के आने के कारण लोगों में संक्रमण का खतरा बरकरार है। संक्रमण से बचाव के लिए इम्यूनिटी बढ़ाने की एक्सपर्ट सलाह देते हैं। वहीं संक्रमण के इलाज के लिए कोरोना वैक्सीन भी बनाई गईं। भारत में बड़ी संख्या में टीकाकरण होने के बाद भी लगातार कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में संक्रमण का आंकड़ा एक बार फिर बढ़ने लगा है। वैक्सीन के दोनों डोज ले चुके लोगों को बूस्टर डोज लगाने की सलाह दी जा रही है। माना जा रहा है कि वैक्सीन के दो डोज की तुलना में तीन खुराक ज्यादा असरदार है। इसी कड़ी में मेडिकल अनुसंधान परिषद (ICMR) और भारत बायोटेक के वैज्ञानिकों ने एक शोध में पाया कि डेल्टा और ओमिक्रॉन वेरिएंट के असर को कम किया जा सकता है। चलिए जानते हैं आईसीएमआर और भारत बायोटेक की कोवैक्सिन बूस्टर डोज पर अध्ययन रिपोर्ट।
Covid 19: कोरोना के खिलाफ वैज्ञानिकों की बड़ी खोज, डेल्टा-ओमिक्रॉन वेरिएंट का प्रभाव हो सकता है कम
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कोवैक्सिन का बूस्टर डोज प्रभावी
भारतीय मेडिकल अनुसंधान परिषद (ICMR) और भारत बायोटेक ने हाल ही में एक अध्ययन किया, जिसमें पाया गया कि कोरोना के खिलाफ कोवैक्सिन का बूस्टर डोज काफी सुरक्षात्मक है। कोवेक्सिन बूस्टर डोज कोविड-19 के डेल्टा वेरिएंट, ओमीक्रान वेरिएंट बीए.1.1 और बीए.2 वैरिएंट के खिलाफ अधिक प्रभावी हो सकता है। भारत बायोटेक की कोवैक्सिन के सुरक्षात्मक और प्रभावकारी गुण का अध्ययन सीरिया के हम्सटर मॉडल के अंतर्गत किया गया। जिसमें मानव संबंधी रोगों का अध्ययन पशुओं पर हुआ है। हालांकि अभी इस अध्ययन की समीक्षा की जा रही हैं।
फेफड़े की बीमारी कम करने में मददगार
अध्ययन में कहा गया कि जिन लोगों ने दो की जगह तीन डोज लगवाए हैं उनकी एंटीबॉडी डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ सुरक्षा के लिहाज से बेहतर है। वहीं कोवैक्सिन का बूस्टर डोज लगाने वालों में फेफड़े से संबंधित बीमारियां कम दिखीं। अनुसंधान के मुताबिक, वायरस का निरीक्षण करने पर पाया गया कि इसका एंटीबॉडी रिस्पाॅन्स, क्लीनिकल ऑब्सेर्वशन्स, वायरल लोड रिडक्शन और फेफड़ों की बीमारी के गंभीर को कम कर सकता है।
आईसीएमआर और भारत बायोटेक की स्टडी रिपोर्ट
आईसीएमआर और भारत बायोटेक ने अध्ययन के आधार पर कहा कि ‘डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ जब वैक्सीन की दूसरी और तीसरी खुराक के बीच तुलना की गई तो बूस्टर डोज के फायदे मिले। टीकाकरण की तीन खुराक लेने वालों के फेफड़ों की बीमारी की गंभीरता कम देखी गई।
कोवैक्सीन बूस्टर डोज कोविड वैरिएंट पर असरदार
दूसरे अध्ययन में ओमिक्रॉन के बीए 1 और बीए 2 वेरिएंट पर तीन खुराकों के असर का भी अध्ययन किया गया। पता चला कि प्लेसेबो समूहों की तुलना में वैक्सीन के डोज लेने वालों में वायरस शेडिंग, फेफड़ों में कम संक्रमण मिला। इस अध्ययन से साबित होता है कि कोवैक्सिन बूस्टर डोज इम्यूनिटी को बढ़ाता है और डेल्टा व ओमिक्रॉन वेरिएंट की गंभीरता को भी कम करता है।
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