भारत अब कोरोना से संक्रमणमुक्त होने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। एक तरफ देश में जहां कोरोना से स्वस्थ होने की दर बढ़कर 96.16 फीसदी हो गई है, तो वहीं यहां दो-दो वैक्सीन को एक साथ मंजूरी भी मिल गई है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन 'कोविशील्ड' और भारत बायोटेक की वैक्सीन 'कोवैक्सीन' के आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। इसके अलावा फाइजर ने भी भारत में अपनी वैक्सीन के इस्तेमाल के लिए मंजूरी मांगी है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि कुछ हफ्तों में कई सारी वैक्सीन उपलब्ध हो जाएंगी, तब यह कैसे तय करेंगे कि कौन सी वैक्सीन लगवाएं? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं ऐसे ही कुछ जरूरी सवालों के जवाब...
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Coronavirus Vaccine: कोरोना के कई टीकों में यह कैसे तय करेंगे कि कौन सी वैक्सीन लगवाएं? विशेषज्ञ से जानें सबकुछ
Sun, 03 Jan 2021 04:18 PM IST
सोनू शर्मा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Sun, 03 Jan 2021 04:18 PM IST
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भारत में कोरोना वैक्सीन
- फोटो : pixabay
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
- फोटो : Twitter/Air
कुछ हफ्तों में कई सारी वैक्सीन उपलब्ध होंगी, तब यह कैसे तय करेंगे कि कौन सी वैक्सीन लगवाएं?
- लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के डॉ. घनश्याम पांग्टेय कहते हैं, 'सबसे पहले इस बात का ध्यान रखें कि किसी को कभी भी, कोई भी बीमारी हो सकती है। अब वैक्सीन लगवाने के बाद अगर कोई लक्षण आते हैं, तो उसे यह मत मान बैठें कि ये वैक्सीन के कारण हुआ है। डॉक्टर से संपर्क करें। टीकाकरण शुरू होने के बाद हो सकता है, कुछ लोगों में साइड-इफेक्ट आएं और मीडिया में आपको ऐसी खबरें भी मिलें, तो उनपर तुरंत विश्वास मत करें। हो सकता है, जिसने वैक्सीन ली हो, उसे पहले से कोई बीमारी हो, याद रहे, वैक्सीन को बहुत कम समय में गहन अध्ययन के बाद मंजूरी दी गई है और हमें इसमें संतोष करना होगा।'
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टीकाकरण शुरू होने के बाद वैज्ञानिक क्या करेंगे?
- डॉ. घनश्याम पांग्टेय कहते हैं, 'हमारे पास वैक्सीन से जुड़ा डाटा बहुत सालों का नहीं है, कुछ महीनों का है। अब तक के डाटा के आधार पर सभी वैक्सीन को इमर्जेंसी अप्रूवल दिया जा रहा है। टीकाकरण शुरू होने के बाद भी वैक्सीन से जुड़ा डाटा कलेक्शन जारी रहेगा। टीकाकरण पूरी निगरानी में किया जाएगा। अगले छह महीने, नौ महीने या साल भर तक यह देखा जाएगा कि किस वैक्सीन की कितनी प्रभावशीलता रही, कितनी उपयोगी रही।'
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वैक्सीन का इमर्जेंसी अप्रूवल क्या होता है?
- डॉ. घनश्याम पांग्टेय बताते हैं, 'केंद्रीय औषधि प्राधिकरण की विशेषज्ञों की समिति ने वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल को रजामंदी है। आमतौर पर वैक्सीन बनाने में वर्षों लग जाते हैं, इस बार एक साल के भीतर ही बहुत सारी वैक्सीन अप्रूव हुईं, क्योंकि हमारे पास समय नहीं है। संक्रमण बहुत बढ़ रहा है। अमेरिका में दो करोड़ और भारत में एक करोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं। अगर समय पर वैक्सीन नहीं आई तो हो सकता है तब तक देर हो जाए। अभी तक के डाटा को वैज्ञानिकों ने चेक किया और फायदों और नुकसान का अनुपात निकाला। बीते नौ महीनों के ट्रायल में हमें फायदे ज्यादा दिखे, नुकसान कम। यह ज्यादा लोगों पर प्रभावी है, बहुत कम लोगों में ही साइड-इफेक्ट दिखे, वो भी जानलेवा नहीं हैं। उसको देखते हुए वैक्सीन को इमर्जेंसी अप्रूवल दिया गया है।'
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कई देशों में जो स्ट्रेन पाए गए हैं, वो क्या एक जैसे हैं, क्या वैक्सीन इन सब पर प्रभावी होगी?
- डॉ. घनश्याम पांग्टेय बताते हैं, 'ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के बाद अब नाइजीरिया में कोरोना का नया स्ट्रेन पाया गया है। ये सभी एक दूसरे से भिन्न हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ये जो नए स्ट्रेन हैं, उनको अभी मौजूद वैक्सीन कवर करेंगी। वैक्सीन के निर्माण की बहुत लंबी चेन है, ये निश्चित रूप से नए स्ट्रेन पर प्रभावी होंगी।'