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भारत को कितनी वैक्सीन की जरूरत है, क्या कांच की शीशियों को लेकर भी हो सकती है परेशानी? जानिए सबकुछ

Mon, 11 Jan 2021 01:08 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Mon, 11 Jan 2021 01:08 PM IST
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Coronavirus vaccine in India covid 19 vaccination serum institute vaccine covishield
कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : iStock

भारत दुनियाभर में बनने वाली 60 प्रतिशत वैक्सीन का उत्पादन करता है, लेकिन अमेरिका के बाद कोविड-19 के सबसे ज्यादा मामले भी इसी देश में आए हैं। भारत को न सिर्फ अपने लोगों का टीकाकरण करना है बल्कि दुनिया के दूसरे देशों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी निभानी है। क्या भारत इस मांग को पूरा कर सकता है? भारत में अभी दो वैक्सीन को मंजूरी मिली है - कोविशील्ड जो ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका बना रहा है और दूसरी है कोवैक्सीन। कुछ दूसरी वैक्सीन जिनका अभी ट्रायल चल रहा है, उनका भी भारत में उत्पादन हो रहा है। भारत की दवा कंपनियों ने हाल के महीनों में उत्पादन में तेजी लाई है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, जो कि सबसे बड़ा उत्पादक है, उसके मुताबिक अभी वो हर महीने छह करोड़ से सात करोड़ वैक्सीन का उत्पादन कर सकता है। भारत बायोटेक के मुताबिक वो साल में 20 करोड़ वैक्सीन का उत्पादन कर सकते हैं, हालांकि फिलहाल उनके पास कोवैक्सीन के सिर्फ दो करोड़ डोज मौजूद हैं। दूसरी कंपनियां जिनके वैक्सीन का अभी ट्रायल हो रहा है, वो भी भारत के अधिकारियों और दूसरे देशों से बात कर रहे हैं, ताकि वैक्सीन के तैयार होने पर सप्लाई की जा सके। हालांकि इनसे जुड़ी बहुत जानकारियां मौजूद नहीं हैं। 

Coronavirus vaccine in India covid 19 vaccination serum institute vaccine covishield
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

भारत की अपनी जरूरत कितनी है?

भारत सरकार ने कहा है कि वो 30 करोड़ लोगों को जुलाई के अंत तक टीका देगी। वैक्सीनेशन प्रोग्राम 16 जनवरी से शुरू होगा और सबसे पहले फ्रंटलाइन और हेल्थकेयर वर्कर्स को वैक्सीन दी जाएगी। सात महीनों में 60 करोड़ लोगों के टीकाकरण की योजना है, यानी हर महीने लगभग 8.5 करोड़ डोज। 

Coronavirus vaccine in India covid 19 vaccination serum institute vaccine covishield
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विश्व में भारत की क्या भूमिका होगी?

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा समर्थित कोवैक्स स्कीम का हिस्सा है। इसका मकसद मिडिल इनकम (मध्यम आय) वाले देशों को वैक्सीन उपल्ब्ध करवाना है। पिछले साल सितंबर में सीरम इंस्टीट्यूट ने इस स्कीम के तहत 20 करोड़ डोज उपलब्ध करवाने की बात कही थी - ये ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन या फिर अमेरिका की नोवैक्स के डोज हो सकते हैं। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अदार पूनावाला ने बताया कि ये एग्रीमेंट बढ़ाकर 90 करोड़ डोज का किया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की प्रतिबद्धता एक अरब डोज की हो जाएगी। 

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Covishield, Vaccine - फोटो : Twitter@AdarPoonawala

बीबीसी से बात करते हुए कंपनी ने बताया कि उनकी कोशिश है कि प्रोडक्शन बढ़ाकर एक करोड़ डोज प्रतिमाह किया जाए। कोवैक्स स्कीम के अलावा, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की आपूर्ति के लिए कई देशों के साथ द्विपक्षीय वाणिज्यिक सौदे किए हैं। पूनावाला ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि टीके के लिए इस शर्त पर मंजूरी दी गई थी कि इन्हें निर्यात नहीं किया जाएगा, लेकिन उनके मुताबिक ये एक भ्रम था। बांग्लादेश द्वारा चिंता जाहिर करने के बाद भारत सरकार ने बाद में स्पष्ट किया कि निर्यात की अनुमति दी जाएगी, बांग्लादेश के साथ तीन करोड़ प्रारंभिक खुराक प्राप्त करने का सौदा है। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि भारत, 'दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माता के रूप में पड़ोसियों और दुनिया के बाकी हिस्सों के लिए अपनी प्रतिबद्धताओं के बारे में पूरी तरह से सचेत है।' 

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कोविशील्ड - फोटो : twitter@serum institute

इसके अलावा कंपनी ने सऊदी अरब, म्यांमार और मोरक्को से भी डील कर रखी है। हालांकि उन्हें कितनी वैक्सीन, कब तक चाहिए, ये अभी तक साफ नहीं है। ऐसी खबरें हैं कि नेपाल, ब्राजील और श्रीलंका भी भारत में बनी वैक्सीन में रुचि दिखा सकते हैं, लेकिन पूनावाला ने कहा है कि उनकी प्राथमिकता घरेलू मांग को पूरा करने की होगी। 'एक बार जब हम प्रारंभिक आवश्यकताओं को पूरा लें, फिर हम जल्द ही इसे अन्य देशों में निर्यात करना शुरू कर देंगे।'

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