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Coronavirus: वैज्ञानिकों ने विकसित की नई विधि, पता चलेगा भविष्य में कोरोना का कौन सा स्ट्रेन फैलेगा
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Fri, 26 Feb 2021 10:09 PM IST
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कोरोना वायरस में लगातार हो रहा बदलाव, यानी उसका म्यूटेशन और भी घातक हो गया है और इसकी वजह से दुनिया के कई देशों में संक्रमण के नए मामलों में काफी उछाल आया है। वायरस में लगातार बदलाव जारी है। हालांकि इसका पता लगाना काफी मुश्किल काम है, लेकिन वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई विधि विकसित की है, जो नए कोरोना वायरस के विकास के क्रम के बारे में पूर्वानुमान व्यक्त कर सकती है। इस विधि से पता चल सकता है कि वायरस का मौजूदा कौन सा रूप भविष्य में बड़े पैमाने पर फैल सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे वैक्सीन निर्माताओं को वायरस के उन स्ट्रेन से लड़ाई में अहम मदद मिल सकती है, जो एंटीबॉडी को चकमा देने में सफल हो जाते हैं।
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इस नई विधि से संबंधित अध्ययन रिपोर्ट बायोरेक्सिव वेबसाइट पर प्रकाशित की गई है। अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने कोरोना के स्पाइक प्रोटीन के तीन लाख 11 हजार 795 जीनोम अनुक्रमों की पड़ताल की। इस अध्ययन में शामिल शोधकर्ताओं में से एक लिपि ठुकराल ने कहा कि जीनोम अनुक्रमों से स्पाइक प्रोटीन में 2,584 म्यूटेशन का खुलासा हुआ। हालांकि इस अध्ययन की अभी समीक्षा नहीं की गई है।
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दरअसल, स्पाइक प्रोटीन से ही वायरस कोशिकाओं में प्रवेश करने में सफल हो पाते हैं। प्रोटीन अमीनो अम्ल अणुओं की कड़ी से बने होते हैं। लिपि ठुकराल और उनकी टीम में शामिल शोधकर्ता पिछले साल से ही अमीनो अम्ल अणुओं की कड़ी का अध्ययन कर रहे हैं, जिससे वायरस स्पाइक प्रोटीन के विभिन्न नमूने बनते हैं।
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वैज्ञानिकों के मुताबिक, टीके आमतौर पर रोग पैदा करने वाले अणुओं के प्रोटीन के खास हिस्सों के खिलाफ ही एंटीबॉडी पैदा करते हैं और अगर इन हिस्सों का म्यूटेशन हो जाए तो एंटीबॉडी वायरस को लंबे समय तक प्रभावी तरीके से निष्क्रिय करते नहीं रह सकती। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस अध्ययन से वायरस के विकास के क्रम को समझने में तो मदद मिलेगी ही, साथ ही इससे वैक्सीन को प्रभावी बनाने या नई वैक्सीन विकसित करने में भी मदद मिलेगी।
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