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Coronavirus: कोरोना वायरस के ब्रिटेन स्ट्रेन पर भी प्रभावी हो सकती है 'स्वदेशी वैक्सीन', नए शोध में खुलासा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Wed, 27 Jan 2021 11:06 AM IST
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कोवैक्सीन
- फोटो : PTI
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भारत में कोरोना वायरस से अब तक एक करोड़ से भी अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं और अब इसके नए स्ट्रेन ने भी लोगों को परेशान करके रख दिया है। ब्रिटेन में मिले कोरोना के नए स्ट्रेन ने देश में सैकड़ों लोगों को संक्रमित कर दिया है। हालांकि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर इस नए स्ट्रेन पर अध्ययन कर रहा था कि 'स्वदेशी वैक्सीन' कोवैक्सीन इसपर प्रभावी होगी या नहीं। अब आईसीएमआर ने खुलासा किया है कि कोवैक्सीन ब्रिटेन स्ट्रेन के खिलाफ टीकाकरण किए गए व्यक्तियों की तुलनात्मक निष्प्रभावी गतिविधि को दर्शाता है, यानी कोवैक्सीन इस नए स्ट्रेन पर भी प्रभावी हो सकती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
कुछ दिन पहले 'नेचर' नामक पत्रिका में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया था कि आईसीएमआर के वैज्ञानिक, जिन लोगों को कोवैक्सीन दी गई है, उनके एंटीबाडीज की जांच कर रहे हैं और यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि यह वैक्सीन नए प्रकार के वायरस का भी मुकाबला करने में सक्षम है या नहीं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
दरअसल, कोवैक्सीन को भारत बायोटेक ने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के सहयोग से विकसित किया है। तीन जनवरी को भारत सरकार ने इसे आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दी थी। फिलहाल इसका इस्तेमाल टीकाकरण अभियान में किया जा रहा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
कोवैक्सीन के पहले चरण के क्लीनिकल ट्रायल के नतीजे हाल ही में 'द लैंसेट' नामक पत्रिका में प्रकाशित किए गए थे। 'द लैंसेट' के मुताबिक, जिन लोगों पर भी इस वैक्सीन का ट्रायल किया गया, उसमें इससे जुड़ी किसी गंभीर घटना की खबर नहीं मिली।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
भारत बायोटेक ने हाल ही में इस वैक्सीन से जुड़ी एक एडवाइजरी जारी की थी और गर्भवती महिलाओं, तेज बुखार से पीड़ित लोग और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कोवैक्सीन का टीका नहीं लगवाने की सलाह दी थी। कंपनी ने यह भी कहा है कि किसी तरह की एलर्जी की शिकायत वाले लोगों को भी कोवैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए।
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